Last Updated:July 01, 2026, 16:37 IST
Ayodhya Ram Mandir Daan chori: अयोध्या राम मंदिर के कथित दान गबन मामले पर संतों ने वर्तमान प्रबंधन और ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं. संतों का कहना है कि टेंट के जमाने में कम संसाधनों के बावजूद दान सुरक्षित रहता था, लेकिन अब प्रतिदिन लाखों के नकद और ऑनलाइन दान के बाद भी अनियमितताओं के आरोप दुर्भाग्यपूर्ण हैं. संत समाज ने ट्रस्ट में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे भंग करने और स्थानीय संतों को शामिल करने की मांग की है ताकि करोड़ों भक्तों की आस्था और पारदर्शिता बनी रहे.
Ayodhya Ram Mandir Daan chori: राम मंदिर से जुड़े कथित दान गबन मामले ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है. इस बीच अयोध्या के कई संतों ने पुराने दिनों को याद करते हुए मंदिर की व्यवस्था और वर्तमान प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं. संतों का कहना है कि जब रामलला अस्थायी टेंट में विराजमान थे, तब सीमित संसाधनों के बावजूद श्रद्धालुओं की छोटी-छोटी श्रद्धा राशि भी पूरी पारदर्शिता के साथ सुरक्षित रहती थी. लेकिन आज भव्य मंदिर बनने और दान की राशि कई गुना बढ़ जाने के बाद कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
टेंट के दौर में पारदर्शिता और संतों का पुराना अनुभव
संतों के अनुसार पहले अयोध्या और आसपास के गांवों से आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार ₹2, ₹5, ₹10 या ₹50 तक का दान करते थे. प्रतिदिन लगभग 10 से 15 हजार रुपये दान पात्र में जमा होते थे और उसी से मंदिर की व्यवस्था संचालित होती थी. उस समय न कोई बड़ा ट्रस्ट था और न ही जटिल प्रशासनिक ढांचा, फिर भी दान की पवित्रता और विश्वास बना हुआ था.
भव्य मंदिर में रोजाना आ रहा लाखों का चढ़ावा
अब भव्य राम मंदिर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है. संतों का कहना है कि दान पात्रों में प्रतिदिन लगभग 10 से 12 लाख रुपये नकद दान आता है, जबकि इसके अतिरिक्त चेक, ऑनलाइन ट्रांसफर और क्यूआर कोड के माध्यम से भी बड़ी मात्रा में रसीदी दान प्राप्त होता है. ऐसे में व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत और पारदर्शी होनी चाहिए थी.
करोड़ों राम भक्तों की आस्था और जवाबदेही का सवाल
संतों का आरोप है कि यदि दान की राशि को लेकर कथित गड़बड़ी के मामले सामने आते हैं तो यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा विषय है. उनका कहना है कि भगवान श्रीराम के नाम पर मिलने वाले दान की एक-एक पाई का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए और व्यवस्था पूरी तरह जवाबदेह होनी चाहिए.
वर्तमान ट्रस्ट को भंग करने की पुरजोर मांग
अयोध्या के साधु-संतों ने बड़ी मांग करते हुए कहा कि ट्रस्ट में व्यवस्था ठीक नहीं चल रही है, ट्रस्ट को भंग कर देना चाहिए और उस ट्रस्ट में साधु-संतों को शामिल करना चाहिए ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से पहले की तरह संचालित हो सके. इतना ही नहीं, संत समाज के लोगों ने ट्रस्ट पर आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रस्ट में भ्रष्टाचारी लोग भी शामिल हैं.
निष्पक्ष जांच और व्यवस्था में सुधार की जरूरत
फिलहाल, दान विवाद के बाद अयोध्या में मंदिर प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है. संत समाज का कहना है कि राम भक्तों का विश्वास सर्वोपरि है और उसे बनाए रखने के लिए दान व्यवस्था को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और मजबूत बनाया जाना चाहिए.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…
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Ayodhya,Faizabad,Uttar Pradesh











