Last Updated:August 25, 2026, 22:04 IST
रूस के साथ मिलकर बनाई गई AK-203 असॉल्ट राइफल अब पूरी तरह भारतीय हो गई है. उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा प्लांट में AK-203 का 100 फीसदी स्वदेशी वर्जन तैयार किया गया है, जिसे भारत में ‘शेर’ नाम दिया गया है. इसके साथ ही भारत ने राइफल निर्माण में विदेशी कंपोनेंट्स पर निर्भरता खत्म करने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है.
अमेठी AK-203 राइफल.
अमेठी : डिफेंस सेक्टर में भारत दिन-ब-दिन मजबूत होता जा रहा है. भारत ने हथियार बनाने के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है. रूस के साथ मिलकर बनाई जा रही AK-203 असॉल्ट राइफल का अब 100 फीसदी स्वदेशी वर्जन तैयार हो गया है. भारत में इसे शेर नाम दिया गया है. यूपी में अमेठी के कोरवा स्थित प्लांट में तैयार इस राइफल के साथ अब भारत को इसके निर्माण के लिए विदेशी कंपोनेंट्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
अमेठी जिले के कोरवा स्थित इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड ने AK-203 के सभी प्रमुख हिस्सों का देश में ही निर्माण करने की क्षमता हासिल कर ली है. कंपनी जल्द ही 10 पूरी तरह स्वदेशी राइफलों को भारतीय सेना को सौंपेगी. सूत्रों की माने तो 100 फ़ीसदी AK203 भारतीय सेवा को सुपुर्द करने से पहले हर कसौटी पर इसे चेक किया जाए फिर अप्रैल 2027 से पूरी तरह देसी AK-203 की डिलीवरी शुरू करने की तैयारी है. कंपनी की माने तो स्वदेशी प्रोटोटाइप राइफल का फैक्ट्री में करीब 3,000 राउंड सफल परीक्षण किया जा चुका है. बताया जा रहा है कि इन राइफलों को गर्म मौसम के साथ-साथ ऊंचाई वाले इलाकों में भी परखा जाएगा. कंपनी का कहना है कि उसे अपनी राइफल पर पूरा भरोसा है और परीक्षण के साथ ही बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी भी शुरू कर दी जाएगी.
अमेठी जिले के कोरवा प्लांट फिलहाल करीब हर 100 सेकंड में एक AK-203 तैयार करने की क्षमता रखता है. यानी एक घंटे में लगभग 36 राइफलें बनाई जा सकती हैं. कंपनी अगले साल से दो शिफ्ट में उत्पादन शुरू करने की योजना बना रही है. इसके बाद रोजाना करीब 600 राइफलें तैयार की जा सकेंगी. इसका मतलब है कि हर महीने लगभग 12 हजार और सालाना करीब 1.5 लाख AK-203 राइफलों का उत्पादन संभव होगा.
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में अमेठी के कोरवा में आयुध निर्माण परियोजना की शिलान्यास की थी और मंच से कहा था अमेठी की पहचान अब दुनिया की सबसे शक्तिशाली राइफल के नाम से होगी. वहीं भारतीय सशस्त्र बलों के लिए 6 लाख से ज्यादा AK-203 राइफलें तैयार करनी हैं. मौजूदा उत्पादन क्षमता को देखते हुए कंपनी का दावा है कि पूरा ऑर्डर 2030 या 2031 की शुरुआत तक पूरा किया जा सकता है, जबकि मौजूदा अनुबंध के मुताबिक इसे 2032 तक पूरा करना है.
भारतीय सेना को अब तक करीब 55 हजार AK-203 राइफलें मिल चुकी हैं. हालांकि इनमें शुरुआती दौर में रूस से आए कंपोनेंट्स का इस्तेमाल किया गया था और धीरे-धीरे इनका स्वदेशीकरण बढ़ाया गया. इसके अलावा करीब 7,500 राइफलें असेंबल होकर तैयार हैं, जिन्हें जल्द सेना को भेजा जाना है. शुरुआती 70 हजार राइफलों के चरण में स्वदेशीकरण का स्तर करीब 5 फीसदी से बढ़कर 70 फीसदी तक पहुंचा था. अब 100 फीसदी स्वदेशीकरण हासिल होने के बाद AK-203 के उत्पादन में भारत की भूमिका पूरी तरह बदल गई है.
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Abhijeet ChauhanSub-Editor
अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…
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Amethi,Lucknow,Uttar Pradesh
First Published :
August 25, 2026, 22:03 IST










