1 नाम से मेकर्स ने बना डाली 2 फिल्में, पहली हुई फ्लॉप, दूसरी ने रिलीज के साथ मचाया हंगामा

Last Updated:July 20, 2026, 16:38 IST

एक ही नाम से कई बार फिल्में बनाने का ट्रेंड बॉलीवुड में नया नहीं है. अक्सर देखा गया है कि जब प्रोड्यूसर किसी हिट टाइटल को फिर से भुनाने की कोशिश करते हैं, तो कभी वह सफल हो जाता है और कभी-कभी दर्शक उसे सिरे से नकार देते हैं. लेकिन आज हम जिस नाम की बात कर रहे हैं, उसकी कहानी थोड़ी अनोखी है. एक ही नाम से अलग-अलग दौर की बनी दो फिल्मों में से पहली बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी फ्लॉप साबित हुई, जबकि कई दशकों बाद आई इसी नाम की दूसरी फिल्म ने रिलीज होते ही थिएटर में हंसी का ऐसा तूफान मचाया कि मेकर्स हैरान रह गए. जानें किस नाम ने बदल दी बॉलीवुड की किस्मत.

नई दिल्ली. फिल्मों की चकाचौंध भरी दुनिया में किसी एक नाम पर दांव लगाना हमेशा से फिल्म बनाने वालों का पसंदीदा काम रहा है, लेकिन किस्मत हमेशा एक ही तरफ नहीं होती. बॉलीवुड के इतिहास के पन्नों में एक ऐसी ही हैरान करने वाली कहानी है, एक ऐसे नाम की जिसने दो अलग-अलग दशकों में दो बिल्कुल अलग इतिहास बनाए. जब ​​यह नाम पहली बार स्क्रीन पर आया, तो बड़े नामों की फौज होने के बावजूद, थिएटर में सन्नाटा छा गया और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. लेकिन सालों बाद, जब वही नाम दोबारा आया तो इसने हंसी का ऐसा तूफान मचाया कि बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड टूट गए. तो आइए, इस अनोखे इत्तेफाक और उस जादुई नाम के बारे में और जानें!

1971 में डायरेक्टर एसएम अब्बास ने ‘हंगामा’ नाम की एक मल्टी-स्टारर फिल्म बनाई, जो कॉमेडी और ड्रामा का मिक्स थी. इस फिल्म में अपने समय के कुछ सबसे पॉपुलर और आइकॉनिक चेहरे थे, जिनमें विनोद खन्ना, किशोर कुमार, महमूद और जीनत अमान शामिल थे. बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग वाले एक्टर्स के होने के बावजूद, फिल्म का कमजोर स्क्रीनप्ले और बिखरी हुई कहानी दर्शकों को अट्रैक्ट नहीं कर पाई.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपनी लागत भी नहीं निकाल पाई और एक बड़ी फ्लॉप साबित हुई. 1971 की असफलता के लगभग 32 साल बाद, मशहूर डायरेक्टर प्रियदर्शन ने एक बार फिर ‘हंगामा’ टाइटल को भुनाने का फैसला किया. जब 2003 में फिल्म अनाउंस हुई, तो ट्रेड एनालिस्ट को डर था कि सुपरस्टार के बिना फिल्म बॉक्स ऑफिस पर स्ट्रगल करेगी.

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लेकिन, प्रियदर्शन को अपनी कॉमिक टाइमिंग, कन्फ्यूजिंग स्क्रीनप्ले और परेश रावल, आफताब शिवदासानी, अक्षय खन्ना और रिमी सेन की परफॉर्मेंस पर पूरा भरोसा था. जब 1 अगस्त 2003 को ‘हंगामा’ थिएटर में आई, तो इसने हर अंदाजा गलत साबित कर दिया. गलतफहमियों और मजेदार ह्यूमर से भरी यह सिचुएशनल कॉमेडी पहले दिन से ही दर्शकों को लुभाने लगी.

परेश रावल का ‘राधेश्याम तिवारी’ का रोल और आफताब-अक्षय खन्ना के बीच की केमिस्ट्री ने दर्शकों को बांध लिया. फिल्म ने न सिर्फ अपने बजट से कई गुना ज्यादा कमाई की, बल्कि उस साल की सबसे सफल फिल्मों में से एक बन गई.

जहां 1971 की ‘हंगामा’ अपने सीरियस नेचर और कमजोर कॉमेडी की वजह से कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी, वहीं 2003 की ‘हंगामा’ ने बॉलीवुड में ‘कन्फ्यूजन कॉमेडी’ के कॉन्सेप्ट को नया रूप दिया. इसके गाने ‘चैन आपको मिला’ और ‘परी परी’ आज भी पसंद किए जाते हैं. प्रियदर्शन के शानदार डायरेक्शन और नीरज वोरा के मजेदार डायलॉग्स ने इस फिल्म को एक कल्ट क्लासिक बना दिया, जिसे दर्शक आज भी TV और OTT प्लेटफॉर्म पर बड़े चाव से देखते हैं.

बॉलीवुड का इतिहास इस बात का गवाह है कि सिर्फ एक अच्छा या कैची टाइटल किसी फिल्म को सुपरहिट नहीं बनाता. इन दोनों फिल्मों का सफर, जिनका टाइटल ‘हंगामा’ है, इसका सबूत है. जहां 1971 में बड़े नामों वाली एक फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई, वहीं 2003 में एक कम बजट की फिल्म ने, अपने कंटेंट और बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग की वजह से, बॉक्स ऑफिस पर सच में हंगामा मचा दिया.

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