सफेद गेंद का किंग, लाल गेंद को तरसा… टीम इंडिया के लिए करियर अब खत्म समझो!
Last Updated:June 14, 2026, 05:15 IST
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार क्रिकेटर युजवेंद्र चहल लंबे समय से टीम इंडिया में वापसी नहीं कर पाए हैं. एक समय था जब चहल टीम इंडिया के स्पिन गेंदबाजी में बैकबोन हुआ करते थे, लेकिन फॉर्म में गिरावट और पर्सनल लाइफ की मुश्किलों के कारण चहल भारतीय टीम के मेन रोस्टर दूर होते चले गए और अब उनका टीम इंडिया में वापसी भी मुश्किल हो गया है.
भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य के रूप में युजवेंद्र चहल
नई दिल्ली: मॉडर्न डे क्रिकेट में आज भले ही टी20 फॉर्मेट का बोलबाला है, लेकिन हकीकत यह है कि इस खेल को जीने वाले खिलाड़ी आज भी सबसे लंबे फॉर्मेट यानी टेस्ट में खेलने का सपना देखते हैं, क्योंकि इस फॉर्मेट को ही क्रिकेट की असली पहचान माना गया है. बदलते दौर में कई नियम बदले, खेलने का तरीका बदला और अप्रोच भी बदली, लेकिन लाल गेंद से खेले जाने वाले इस फॉर्मेट ने अपनी पहचान नहीं बदली. पांच दिन तक खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट को ही किसी खिलाड़ी के लिए खुद को साबित करने का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है. यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट टीम में एक समय लिमिटेड ओवरों में बैकबोन (रीढ़ की हड्डी) कहे जाने वाले युजवेंद्र चहल ने हमेशा अपनी यह ख्वाहिश जाहिर की कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट में खेलना है, लेकिन उन्हें यह सौभाग्य नहीं मिला.
युजवेंद्र चहल ने कई बार अपने इंटरव्यू और बातचीत में कहा कि उन्हें भारत के लिए टेस्ट फॉर्मेट में खेलना है, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि अपनी उंगलियों से गेंद को नचाने वाले चहल को भारत के लिए लाल गेंद के क्रिकेट में खेलने का मौका नहीं मिला. अब तो हालात यह हो गए हैं कि चहल को टीम इंडिया के लिए लिमिटेड ओवरों में भी जगह नहीं मिल रही है. ऐसा नहीं है कि चहल कोशिश नहीं कर रहे हैं, लेकिन क्रिकेट का खेल ही ऐसा है कि अगर आपसे थोड़ी सी भी चूक होती है तो आप अपनी जगह खो देते हैं. आज चयनकर्ता चहल से आगे निकलकर भविष्य की ओर देख रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा युवा प्रतिभाओं का विकल्प तलाश रहे हैं. ऐसे में चहल जैसे गेंदबाज की टीम इंडिया में तभी वापसी हो सकती है जब वह कुछ ऐसा करें कि चयनकर्ता उन्हें वापस लेने के लिए मजबूर हो जाएं.
कैसा रहा है वनडे और टी20 में चहल का रिकॉर्ड
युजवेंद्र चहल ने साल 2016 में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए वनडे और टी20 में अपना डेब्यू किया था. उसके बाद से चहल को टीम इंडिया के लिए 72 वनडे और 80 टी20 मैचों में खेलने का मौका मिला. वनडे क्रिकेट में चहल ने 5.26 की इकॉनमी रेट से 121 विकेट अपने नाम किए. इस फॉर्मेट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 42 रन देकर 6 विकेट लेने का रहा. वहीं टी20 की बात करें तो उन्होंने 8.19 की इकॉनमी रेट से गेंदबाजी करते हुए 96 विकेट झटके. इस फॉर्मेट में चहल ने 25 रन देकर 6 विकेट लेने की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी की है.
घरेलू क्रिकेट में भी चहल ने किया है कमाल
टीम इंडिया के लिए लाल गेंद क्रिकेट में चहल को बेशक खेलने का मौका नहीं मिला है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में लिस्ट ए में उन्होंने दमदार गेंदबाजी की है. हरियाणा के लिए खेलने वाले चहल 144 लिस्ट ए मैचों में मैदान पर उतरे, जिसमें उन्होंने 225 विकेट अपने नाम किए हैं. इससे यह साबित होता है कि अगर चहल को टीम इंडिया के लिए टेस्ट में मौका मिलता तो शायद वह इस फॉर्मेट में भी अपनी गेंदबाजी से कमाल करते, लेकिन मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए एक बार को उन्हें वनडे और टी20 में तो मौका मिल सकता है, लेकिन टेस्ट में शायद ही चहल अब डेब्यू कर पाएं.
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. इस वक्त नेटवर्क 18 समूह में हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, ह…और पढ़ें
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