Last Updated:July 17, 2026, 12:21 IST
क्या आप जानते हैं कि भारत की ‘रामायण’ और ग्रीस की मशहूर कहानी ‘द ओडिसी’ में बहुत सी बातें एक जैसी हैं? दोनों कहानियों में हीरो को लंबे वक्त तक अपने घर से दूर रहना पड़ता है. दोनों ही एक लंबी लड़ाई जीतकर घर वापस लौटते हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और ग्रीक योद्धा ओडिसियस, दोनों की ही मदद भगवान करते हैं. सदियों की दूरी होने के बावजूद इन दोनों कहानियों का इतना मिलना महज एक इत्तेफाक है या कुछ और यही बात लोगों हैरान कर रही है.
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क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘द ओडिसी’ सिनेमाघरों में आज रिलीज हो चुकी है.
नई दिल्ली. मशहूर फिल्ममेकर क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ आज यानी 17 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. होमर के मशहूर ग्रीक महाकाव्य पर बनी यह फिल्म बड़े पर्दे पर एक जादुई विजुअल ट्रीट की तरह है. इस फिल्म को पूरी तरह से आईमैक्स 70 एमएम कैमरे से शूट किया गया है. फिल्म में मैट डैमन ने राजा ओडिसियस का लीड रोल निभाया है, जबकि ऐन हैथवे उनकी वफादार रानी पेनेलोप और टॉम हॉलैंड उनके बेटे टेलीमेकस के किरदार में हैं.
दिलचस्प बात है कि ‘द ओडिसी’ की तुलना भारतीय महाकाव्य ‘रामायण’ से हो रही है, जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों की गाथा कहता है. भले ही ‘रामायण’ और प्राचीन ग्रीक महाकाव्य ‘द ओडिसी’ दो अलग-अलग सभ्यताओं की कहानियां हैं. लेकिन जब आधुनिक जमाने के लोग इन्हें करीब से देखते हैं, तो दोनों के बीच की हैरान कर देने वाली समानताएं दंग कर देती हैं. चाहे मर्यादा पुरुषोत्तम राम और ग्रीक योद्धा ओडिसियस का सफर हो या फिर माता सीता और पेनेलोप की अटूट निष्ठा. दोनों ही कहानियां संघर्ष, मर्यादा और बुराई पर अच्छाई की जीत पर एक जैसे ताने-बाने को बुनते हैं.
श्रीराम-ओडिसियस और माता सीता-पेनेलोप के एक जैसे आदर्श
‘रामायण’ के श्रीराम और ‘द ओडिसी’ के ओडिसियस, दोनों ही अपने युग के महान नायक हैं, लेकिन दोनों की वीरता का अंदाज अलग है. राम जहां धर्म, सत्य और मर्यादा के प्रतीक हैं, वहीं ओडिसियस अपनी बुद्धिमत्ता, चालाकी और रणनीति के लिए जाने जाते हैं. दोनों नायकों की सबसे बड़ी समानता यह है कि दोनों ही एक लंबी और थका देने वाली जर्नी से गुजरते हैं. दूसरी ओर, दोनों महाकाव्यों की नायिकाएं- सीता और पेनेलोप, पतिव्रता धर्म और वफादारी की मिसाल हैं. सीता जहां रावण की लंका में बंदी होने के बावजूद राम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहीं, वहीं पेनेलोप ने ओडिसियस की 20 साल लंबी अनुपस्थिति के दौरान महल पर कब्जा जमाने आए सैकड़ों दुष्टों को अपनी बुद्धिमानी से दूर रखा. दोनों ही देवियों ने विपरीत परिस्थितियों में अपनी निष्ठा को आंच नहीं आने दी.
वनवास, घर वापसी और दुश्मनों से सामना
थीम के मामले में दोनों ग्रंथों की कहानी लगभग एक ही ट्रैक पर चलती है. दोनों ही कहानियों के केंद्र में वनवास और निर्वासन है. राम को 14 साल का वनवास मिलता है, तो ओडिसियस ट्रोजन वॉर के बाद देवताओं के श्राप के कारण 20 साल तक अपने घर से दूर भटकता रहता है. इसके बाद आता है वापसी का मुश्किल सफर. राम को लंकापति रावण से विजय के बाद अयोध्या लौटना है और ओडिसियस को तमाम दुश्मनों को हराकर अपने द्वीप इथाका वापस आना है. दोनों कहानियों में कर्तव्य सर्वोपरि है. इसके अलावा, जहां श्रीराम की मदद भगवान हनुमान और वानर सेना थे करते हैं, वहीं ओडिसियस की रक्षा बुद्धि की देवी एथेना करती हैं.
एक-दूसरे से प्रभावित है कहानी या फिर महज इत्तेफाक?
अब आधुनिक जमाने के लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इन दोनों महाकाव्य एक-दूसरे से प्रेरित हैं? विद्वानों के बीच इसे लेकर दो मुख्य विचार हैं. पहला विचार यह है कि सिकंदर के भारत आगमन के बाद इंडो-ग्रीक सांस्कृतिक आदान-प्रदान के दौरान कहानियों का लेन-देन हुआ होगा. हालांकि, अधिकांश आधुनिक विद्वान और भाषाविद् इसे तुलनात्मक पौराणिक कथाओं का हिस्सा और महज एक खूबसूरत इत्तेफाक मानते हैं. प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कार्ल जुंग के सिद्धांतों के अनुसार, इंसान का अवचेतन मन बुनियादी तौर पर एक जैसा सोचता है. यही वजह है कि दो अलग-अलग कोनों में बैठी सभ्यताओं ने वीरता, संघर्ष और घर वापसी के लिए एक जैसे ही ताने-बाने को चुना.
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Kamta PrasadSenior Sub Editor
कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …
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