सपा का PDA पर कॉन्सेप्ट क्लियर, अखिलेश इसी नाम से घोषित करेंगे घोषणापत्र

Last Updated:October 20, 2026, 12:35 IST

Akhilesh Yadav PDA and UP Chunav: लोकसभा चुनाव 2024 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जातीय आधार पर PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण बनाया. उनका यह प्रयोग सफल रहा और लोकसभा में समाजवादी पार्टी की सीटें बीजेपी को पछाड़ कर 37 पर पहुंच गईं. मायावती का वोट दलित बैंक सपा की ओर मुखातिब हुआ. इसका फायदा न सिर्फ अखिलेश यादव को मिला, बल्कि 2022 के विधानसभा में 2 सीटों पर सिमटी कांग्रेस भी 6 सीटें हासिल करने में कामयाब रही. अगले साल हो रहे विधानसभा चुनाव में भी PDA के सहारे ही सपा मैदान में उतरेगी.

समाजवादी पार्टी PDA के सहारे ही उतरेगी यूपी विधानसभा चुनाव में.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल यानी 2027 में होने हैं, पर, राजनीतिक दलों की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं. भाजपा जल्दी अपनी रणनीति का खुलासा तो नहीं करती, लेकिन विधानसभा में दूसरे नंबर पर रही समाजवादी पार्टी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. लोकसभा चुनाव 2024 की तरह असेंबली चुनाव में भी कांग्रेस से गठबंधन के संकेत हैं. लोकसभा चुनाव में उत्तर प्देश की कुल 80 सीटों में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीती थीं और उसके सहयोगी कांग्रेस को भी 6 सीटें मिल गई थीं. 2019 के लोकसभा चुनाव अकेले भाजपा को 62 और 2022 के विधानसभा चुनाव में 255 सीटें हासिल हुई थीं. समाजवादी पार्टी को लोकसभा में सिर्फ 5 सीटों और विधानसभा चुनाव में 125 सीटों से संतोष करना पड़ा था.

सपा के साथ से कांग्रेस का कल्याण

2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को छोड़ कांग्रेस तालमेल किया था. इसके साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जातीय आधार पर PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण बनाया. उनका यह प्रयोग सफल रहा और लोकसभा में समाजवादी पार्टी की सीटें बीजेपी को पछाड़कर 37 पर पहुंच गईं. मायावती का वोट दलित बैंक सपा की ओर मुखातिब हुआ और इसका फायदा न सिर्फ अखिलेश यादव को मिला, बल्कि गठबंधन की रणनीति पीडीए समीकरण का फायदा उठाते हुए 2022 के विधानसभा में 2 सीटों पर सिमटी कांग्रेस भी लोकसभा चुनाव में 6 सीटें हासिल करने में कामयाब रही. पीडीए का आजमाया नुस्खा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भी अखिलेश जरूर आजमाएंगे. जगह-जगह पीडीए सम्मलेन के आयोजन से इसका संकेत मिलने लगा है.

अखिलेश यादव ने बढ़ाया PDA का दायरा

पीडीए का दायरा भी अखिलेश ने इस बार बढ़ा दिया है. वे समय-समय पर PDA की परिभाषा बदलते रहे हैं. पहले जहां उन्होंने PDA का मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताया था. उन्होंने और भी कुछ परिभाषाएं बताई हैं. उनमें एक है PD यानी पंडित और A यानी आधी आबादी. उन्होंने PDA की एक और परिभाषा दी. P मतलब पीड़ित, D यानी दुखी और A यानी आदिवासी. यही नहीं, उन्होंने PDA की एक और परिभाषा दी- पिछड़ा, दया और अगड़े. इसका मतलब साफ है कि 2024 के PDA को विस्तार देकर अखिलेश समग्र समाज को साधने की रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे.

PDA के नाम ही सपा का मेनिफेस्टो

अखिलेश यादव का PDA प्रेम इसी से समझा जा सकता है कि 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर उन्होंने समाजवादी पार्टी का घोषणापत्र जारी करने की जानकारी अपने सोशल मीडिया हैंड X पर दी है. उन्होंने घोषणापत्र का नाम भी बता दया है, जिसमें पीडीए को शामिल किया किया है. घोषणापत्र का नाम होगा- ‘सत्ताईस का संकल्प : पीडीए के प्रमाणपत्र’. इसमें समाज के हर वर्ग को ध्यान देने की बात कही गई है. इसके अलावा जिला स्तर पर स्थानीय मुद्दों को लेकर भी अलग घोषणापत्र तैयार किए जाएंगे. घोषणापत्र जारी करने में अखिलेश की हड़बड़ी की वजह यह है कि वे जन-जन तक अपनी पार्टी की कार्य योजनाएं पहुंचाना चाहते हैं. भाजपा या किसी भी अन्य दल ने अभी तक ऐसी घोषणा नहीं की है.

कांग्रेस से गठबंधन, काम अलहदा

अखिलेश यादव इंडिया ब्लाक का हिस्सा हैं. पिछला लोकसभा चुनाव समाजवादी ने इंडिया ब्लाक के साथ ही लड़ा था. पर, विधानसभा चुनाव की तैयारी समाजवादी पार्टी जिस अंदाज में कर रही है, उसमें कांग्रेस अभी तक साथ नहीं दिखती. अलबत्ता कांग्रेस ने अजय राय की जगह दूसरे को प्रदेश अध्यक्ष जरूर बना दिया है, लेकिन इसे लेकर उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी आपस में ही लड़-भिड़ रहे हैं.

राहुल गांधी की नजर अभी विपक्षी दलों के सहारे नरेंद्र मोदी सरकार को अस्थिर करने पर है. शायद कांग्रेस को लगता है कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के महत्व को देख क्षेत्रीय दल राज्यों में उनकी शर्तें मान लेंगे. पर, यूपी में समाजवादी पार्टी शायद ही करे. पिछली बार अकेले लड़कर कांग्रेस विधानसभा में 2 सीटों पर सिमट गई थी. इसलिए अखिलेश यादव उन्हें 50 सीटें भी दे दें तो आश्चर्य ही होगा. समाजवादी पार्टी के लोग मानते हैं कि इतने उम्मीदवार भी कांग्रेस को नहीं मिल पाएंगे. कांग्रेस की दावेदारी बराबर सीटों की है. इतना नहीं तो 150 सीटें उसे चाहिए ही. अखिलेश इसके लिए तैयार होते हैं या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

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ओमप्रकाश अश्क

प्रभात खबर, हिंदुस्तान और राष्ट्रीय सहारा में संपादक रहे. खांटी भोजपुरी अंचल सीवान के मूल निवासी अश्क जी को बिहार, बंगाल, असम और झारखंड के अखबारों में चार दशक तक हिंदी पत्रकारिता के बाद भी भोजपुरी के मिठास ने ब…

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Lucknow,Lucknow,Uttar Pradesh

First Published :

October 20, 2026, 12:35 IST

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dainikupeditor@gmail.com

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