Last Updated:July 01, 2026, 13:27 IST
Banaras Pink Meenakari Chess Set Demand: बनारस की 400 साल पुरानी गुलाबी मीनाकारी कला अब ग्लोबल हो चुकी है. काशी के कलाकारों द्वारा तैयार किए गए इस कला के खास चेस सेट की डिमांड आज अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में है. इसकी शुरुआती कीमत 52 हजार रुपये है, जबकि सबसे बड़ा साइज 1 लाख 40 हजार रुपये तक का है. साल 2021 में पीएम मोदी ने यह चेस सेट अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को गिफ्ट किया था, जिसके बाद से इस नायाब कला को वैश्विक पहचान मिली और स्थानीय कारीगरों व महिलाओं की कमाई में बड़ा सुधार आया है.
वाराणसी: बनारस की पारंपरिक गुलाबी मीनाकारी अब काशी की तंग गलियों से निकलकर सात समंदर पार ग्लोबल हो चुकी है. करीब 400 साल पुरानी इस खूबसूरत कला से बना चेस सेट यानी शतरंज इन दिनों पूरी दुनिया में अपनी चमक बिखेर रहा है. काशी के स्थानीय कारीगर रात-दिन लगकर इन खास चेस सेटों को तैयार कर रहे हैं, जिनकी सबसे ज्यादा डिमांड अमेरिका से आ रही है. इसके अलावा भी कई देशों से लगातार इसके ऑर्डर मिल रहे हैं, जिसे देखते हुए कारीगर इसे अलग-अलग साइज में बना रहे हैं.
गुलाबी मीनाकारी से जुड़े युवा आर्टिजन रोहन विश्वकर्मा ने बताया कि इस एक चेस सेट को पूरी तरह तैयार करने में लगभग 10 दिन का समय लगता है. इसे कई चरणों में बनाया जाता है, जिसमें सैनिक, हाथी, घोड़े, ऊंट, राजा और रानी के मोहरे ढाले जाते हैं और फिर कारीगर बारीकी से इनमें गुलाबी मीनाकारी का रंग भरते हैं. कीमत की बात करें तो इस खास चेस सेट की शुरुआती कीमत 52 हजार रुपये है, जबकि इसके सबसे बड़े साइज की कीमत 1 लाख 40 हजार रुपये तक जाती है, जितने में आज के समय में एक आईफोन खरीदा जा सकता है.
कमला हैरिस भी हैं इसकी फैन
रोहन ने बताया कि साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका यात्रा के दौरान वहां की तत्कालीन उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को यही गुलाबी मीनाकारी वाला चेस सेट उपहार में दिया था. वह भी इस कला की खूबसूरती की कायल हो गई थीं. उस समय भी इस चेस सेट के ऑर्डर्स में अचानक तेजी आई थी और अब एक बार फिर दुनिया भर के शौकीन लोग काशी के हस्तशिल्पियों को इसके बड़े-बड़े ऑर्डर दे रहे हैं.
प्रमोशन से बदली कारीगरों की तकदीर
कारीगरों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद वैश्विक मंचों पर गुलाबी मीनाकारी का प्रमोशन कर रहे हैं, जिसका सीधा फायदा यहां के लोकल कलाकारों को मिल रहा है. करीब 10 साल पहले तक हालात ऐसे थे कि लोग इस काम को छोड़ रहे थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब बनारस की महिलाएं भी घर के कामकाज के साथ इस 400 साल पुरानी कला से अच्छी-खासी कमाई कर रही हैं. कई महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग दी गई है, जिससे वे आज हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक कमा पा रही हैं.
मुगल महारानियां भी पसंद करती थीं यह आर्ट
बनारस की यह गुलाबी मीनाकारी मुगलों के जमाने की राजशाही कारीगरी का हिस्सा हुआ करती थी. उस दौर में मुगल महारानियां सोने के जेवरों पर इस आर्ट को बेहद पसंद करती थीं. वक्त के साथ इस कला में बदलाव आया है और वर्तमान समय में काशी के कारीगर सोने के साथ-साथ चांदी के बर्तनों, मूर्तियों और गहनों पर भी यह खूबसूरत काम कर रहे हैं.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …
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Varanasi,Uttar Pradesh











