रक्षाबंधन सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं है. यह बचपन से चले आ रहे उस रिश्ते को याद करने का मौका भी है, जिसमें भाई के लिए बहन की दुआ और बहन के लिए भाई का साथ सबसे खास होता है. सियासत के बड़े नेताओं की जिंदगी में भी परिवार से जुड़े ऐसे किस्से मिलते हैं, जो उनकी राजनीतिक पहचान से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाते हैं. मुलायम सिंह यादव की जिंदगी में उनकी इकलौती बहन कमला देवी भी ऐसा ही एक रिश्ता थीं. कमला देवी राजनीति से दूर रहीं. लेकिन भाई मुलायम सिंह यादव के बेहद करीब थीं. रक्षाबंधन पर मुलायम का अपनी बहन के घर जाना, उनके हाथ का अचार खाना और बहन की तबीयत खराब होने पर अस्पताल पहुंच जाना, इस रिश्ते की गहराई बताता है. वहीं अखिलेश यादव के लिए कमला देवी सिर्फ बुआ नहीं थीं, बल्कि उन्होंने अखिलेश को बचपन में मां की तरह संभाला और पाला था. तो यूपी के UP CM के गजब किस्से में आज जानते हैं कमला देवी की कहानी.
कौन थीं कमला देवी?
कमला देवी यादव, मुलायम सिंह यादव की इकलौती बहन थीं. वह इटावा में रहती थीं और आम घरेलू जीवन जीती थीं. उनके भाई मुलायम सिंह यादव यूपी के तीन बार मुख्यमंत्री, देश के रक्षा मंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक बने, लेकिन कमला देवी खुद राजनीति से दूर रहीं. न्यूज 24 के पत्रकार राजीव रंजन ने मुलायम सिंह यादव के 81वें जन्मदिन पर प्रसारित एक विशेष कार्यक्रम में कमला देवी से हुई अपनी मुलाकात का जिक्र किया था. राजीव रंजन के मुताबिक, वह 2017 की शुरुआत में कमला देवी के घर इटावा पहुंचे थे. बातचीत में कमला देवी ने अपने भाई मुलायम और भतीजे अखिलेश से जुड़े कई निजी किस्से सुनाए थे. कमला देवी ने कहा था कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके भाई कितने बड़े नेता हैं. उनके लिए मुलायम सबसे पहले उनके भाई थे.
रक्षाबंधन पर जरूर आते थे नेताजी
कमला देवी ने रक्षाबंधन से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया था. उन्होंने कहा था कि अगर मुलायम सिंह यादव देश में हैं और स्वस्थ हैं, तो वह रक्षाबंधन के दिन उनके घर जरूर आएंगे. कमला देवी के मुताबिक, मुलायम राखी बंधवाने के लिए शुभ मुहूर्त का खास ध्यान रखते थे. उन्हें पूरा भरोसा था कि भाई चाहे कहीं भी हों, रक्षाबंधन के दिन उनके घर जरूर पहुंचेंगे. उनके मुताबिक, रक्षाबंधन के दिन सुबह से ही उनके घर के आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगती थी. समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी पता रहता था कि नेताजी अपनी बहन से राखी बंधवाने पहुंचेंगे. यह सिर्फ राखी की रस्म नहीं थी. कमला देवी के लिए यह उनके भाई के साथ उस रिश्ते का हिस्सा था, जिसे उन्होंने पूरी जिंदगी संभालकर रखा.
बहन के हाथ के अचार के दीवाने थे मुलायम
कमला देवी और मुलायम सिंह यादव के रिश्ते का सबसे दिलचस्प किस्सा उनके हाथ के बने अचार से जुड़ा है. राजीव रंजन के मुताबिक, बातचीत के दौरान कमला देवी ने बताया था कि मुलायम सिंह यादव खाने के साथ अचार जरूर खाते थे. जब तक उनकी मां जीवित थीं, नेताजी अपनी मां के हाथ का बना अचार खाते थे. मां के निधन के बाद कमला देवी अपने भाई के लिए अचार बनाकर भेजने लगीं. मुलायम को बहन के हाथ का अचार इतना पसंद था कि जब अचार खत्म हो जाता तो वह खुद फोन करके कहते थे- “कमला, अचार खत्म हो गया है, रख देना.” कमला देवी ने यह किस्सा बेहद सहज अंदाज में सुनाया था. उनके लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन इस छोटे से किस्से में भाई-बहन के रिश्ते की पूरी गर्माहट दिखाई देती है.
एक-दो बार हेलीकॉप्टर से भी गया अचार
कमला देवी ने यह भी बताया था कि उनका बनाया अचार कभी-कभी मुलायम सिंह यादव तक पहुंचाने के लिए खास इंतजाम भी किए जाते थे. उन्होंने गर्व के साथ बताया था कि एक-दो बार उनका बनाया अचार हेलीकॉप्टर से भी भेजा गया था. सोचिए, एक तरफ देश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव का इतना बड़ा कद और दूसरी तरफ बहन के हाथ के घर के बने अचार के लिए वही नेताजी खुद फोन करते थे. यही वह निजी रिश्ता था, जो राजनीति की तमाम व्यस्तताओं से अलग था.
अखिलेश यादव को बेटे की तरह पाला
कमला देवी और अखिलेश यादव का रिश्ता भी बेहद खास था. राजीव रंजन ने अपने कार्यक्रम में बताया था कि अखिलेश यादव को उनकी बुआ कमला देवी ने मां की तरह पाला था. अखिलेश ने अपने बचपन का एक हिस्सा बुआ के घर बिताया था और उनकी स्कूली पढ़ाई भी वहां हुई थी. इसी वजह से अखिलेश और कमला देवी के बीच काफी गहरा लगाव रहा. बाद में अखिलेश यादव राजनीति में आए. वह यूपी के मुख्यमंत्री बने और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली. लेकिन राजनीतिक पहचान बनने के बाद भी बुआ के साथ उनका पारिवारिक रिश्ता अपनी जगह बना रहा. यानी कमला देवी के लिए अखिलेश सिर्फ उनके भाई मुलायम के बेटे नहीं थे, बल्कि वह बच्चा थे जिसे उन्होंने अपने घर में बेटे की तरह संभाला था.
बहन की तबीयत बिगड़ी तो संसद नहीं गए
कमला देवी ने मुलायम सिंह यादव के अपनी बहन के प्रति लगाव का एक और किस्सा बताया था, जो शायद इस रिश्ते की सबसे मजबूत तस्वीर है. राजीव रंजन के मुताबिक, एक बार संसद का सत्र चल रहा था. मुलायम सिंह यादव का काफिला दिल्ली स्थित उनके आवास से संसद के लिए निकला था. रास्ते में उन्हें पता चला कि कमला देवी की तबीयत खराब हो गई है और उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाया गया है. यह खबर मिलते ही मुलायम सिंह यादव का काफिला संसद की तरफ जाने के बजाय सीधे मेदांता अस्पताल की ओर मुड़ गया. कमला देवी का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण चल ही रहा था कि मुलायम सिंह यादव अस्पताल पहुंच गए. वहां उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि यह उनकी बहन हैं और उनका सबसे बेहतर इलाज किया जाए. उन्होंने डॉक्टरों से कमला देवी का पूरा ख्याल रखने को कहा.
मुलायम के लिए नेता नहीं, भाई थे
कमला देवी ने राजीव रंजन से बातचीत में एक बेहद अहम बात कही थी. उन्होंने बताया था कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनका भाई कितना बड़ा नेता है. मुलायम सिंह यादव देश के रक्षा मंत्री रहे. यूपी के मुख्यमंत्री रहे. संसद में बड़े पदों पर रहे. दशकों तक राजनीति में उनका दबदबा रहा. लेकिन कमला देवी के लिए वह इन तमाम पदों से पहले उनके भाई थे. यही वजह थी कि रक्षाबंधन पर उनके घर का माहौल बदल जाता था. लोगों को भरोसा रहता था कि नेताजी अपनी बहन से राखी बंधवाने जरूर आएंगे.
मुलायम के बाद भी जारी रहा रिश्ता
मुलायम सिंह यादव का 10 अक्टूबर 2022 को निधन हो गया. उनके जाने के बाद भी कमला देवी और यादव परिवार के बीच रक्षाबंधन का रिश्ता बना रहा. 2022 में शिवपाल सिंह यादव अपनी बहन कमला देवी के घर पहुंचे और उनसे राखी बंधवाई थी.
सियासत से दूर, परिवार के बेहद करीब
यादव परिवार की पहचान यूपी की राजनीति से जुड़ी रही है. मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी बनाई. शिवपाल सिंह यादव लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे. अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के तौर पर यूपी की कमान संभाली.लेकिन कमला देवी इन सबसे अलग रहीं. उन्होंने राजनीति में कोई भूमिका नहीं निभाई. न चुनाव लड़ा, न राजनीतिक बयानबाजी की. उनका संसार परिवार के आसपास ही रहा. शायद यही वजह है कि उनकी कहानी और भी दिलचस्प हो जाती है. इतने बड़े राजनीतिक परिवार की इकलौती बहन होने के बावजूद वह आम जिंदगी जीती रहीं.











