Last Updated:August 25, 2026, 16:42 IST
Sultanpur News: कहते हैं कि अगर दिल में हौसला और जुनून हो तो कोई भी आदमी किसी भी काम को आसानी से कर सकता है. इसी का उदाहरण पेश किया है कोलकाता के रहने वाले रॉबिन पाल ने, जिन्होंने सुल्तानपुर की 51 साल की विरासत और अपने पिता के सफर को आगे बढ़ाया है.
सुल्तानपुर: कहते हैं कि अगर दिल में हौसला और जुनून हो तो कोई भी आदमी किसी भी काम को आसानी से कर सकता है. इसी का उदाहरण पेश किया है कोलकाता के रहने वाले रॉबिन पाल ने, जिन्होंने सुल्तानपुर की 51 साल की विरासत और अपने पिता के सफर को आगे बढ़ाया है. दरअसल रॉबिन पाल के पिता मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले थे और उन्होंने 51 साल पहले सुल्तानपुर में मूर्ति बनाने का काम शुरू किया था.
लगातार बड़ी माता से लेकर अन्य कई पंडालून में सजने वाली मूर्तियां रॉबिन पाल के पिता द्वारा बनाई जाती थी और इस विरासत को अब उनके बेटे रॉबिन पाल बखूबी निभा रहे हैं, जो कोलकाता की कारीगरी को सुल्तानपुर में प्रसारित करते हैं. ऐसे में आज हम जानेंगे रॉबिन पाल के पिता द्वारा कब इस विरासत को शुरू करने का काम किया गया.
51 साल पहले पिता ने शुरू किया था काम
सुल्तानपुर में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच मूर्तियां बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है. खास बात यह है कि शहर में मूर्तियां तैयार करने का यह हुनर बाहर से आए एक परिवार की कई पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है. कोलकाता से आए मूर्तिकार रॉबिन पाल लोकल 18 से बताते हैं कि सुल्तानपुर में मूर्ति बनाने का काम उनके पिता ने करीब 51 साल पहले शुरू किया था. पिता के बाद अब इस कला की जिम्मेदारी उन्होंने संभाल ली है. हर साल दुर्गा पूजा के दौरान वह सुल्तानपुर में अलग-अलग आकार और स्वरूप की दुर्गा प्रतिमाएं तैयार करते हैं.
5 हजार से 1 लाख रुपये तक कीमत
सिविल लाइन स्थित सेंट पॉल चर्च के सामने रॉबिन पाल और उनकी टीम इन दिनों देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटी है. यहां तैयार की जा रही मूर्तियों की कीमत उनके आकार और डिजाइन के अनुसार तय की जाती है. छोटी मूर्तियों की कीमत करीब 5 हजार रुपये से शुरू होती है, जबकि बड़ी और आकर्षक प्रतिमाओं की कीमत 1 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. प्रतिमाओं को तैयार करने में कई दिनों की मेहनत लगती है. मिट्टी से आकार देने से लेकर रंग-रोगन और सजावट तक हर चरण में बारीकी का विशेष ध्यान रखा जाता है.
हाईस्कूल तक पढ़ाई, हाथों में अद्भुत कला
रॉबिन पाल ने बताया कि उन्होंने हाईस्कूल तक ही पढ़ाई की है, लेकिन मूर्ति बनाने की कला ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है. उनके हाथों में ऐसी कला है कि मिट्टी से तैयार प्रतिमाओं में भाव और जीवंतता दिखाई देने लगती है. वह अकेले इस काम को नहीं करते, बल्कि मूर्ति निर्माण के जरिए दर्जनों से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. उनके साथ काम करने वाले कारीगर प्रतिमाओं को आकार देने, सजाने और रंगने में सहयोग करते हैं.
कोलकाता से चली आ रही यह पारंपरिक कला अब सुल्तानपुर की दुर्गा पूजा महोत्सव की तैयारियों का भी हिस्सा बन चुकी है. रॉबिन पाल के परिवार ने पांच दशक से अधिक समय पहले जिस हुनर की शुरुआत की थी, वह आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रहा है. मिट्टी की इन प्रतिमाओं में सिर्फ भगवान गणेश की आकृति नहीं, बल्कि कारीगरों की मेहनत, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत भी दिखाई देती है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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Sultanpur,Uttar Pradesh
First Published :
August 25, 2026, 16:42 IST









