कभी नवाबों का गढ़ और तहसील मुख्यालय था यह नगर, जानें इसका गौरवशाली इतिहास

Last Updated:July 02, 2026, 16:52 IST

Sultanpur News: ब्रिटिश काल के ऐतिहासिक दस्तावेजों से लेकर मुगलों और नवाबों के दौर तक, सुल्तानपुर का ‘दोस्तपुर’ कस्बा हमेशा से ही प्रशासनिक और सामरिक रूप से बेहद खास रहा है. आज भले ही यह एक नगर पंचायत की पहचान समेटे हुए हो, लेकिन कभी यह जिला मुख्यालय के बाद दूसरा सबसे बड़ा नगरीय केंद्र और तहसील का हेडक्वार्टर हुआ करता था. आइए पलटते हैं इतिहास के वो पन्ने जो दोस्तपुर के इस स्वर्णिम और समृद्ध सफर की गवाही देते हैं.

Sultanpur News: ब्रिटिश पीरियड (ब्रिटिश काल) में लिखे गए सुल्तानपुर के गजेटियर में इस बात का साफ-साफ जिक्र है कि सुल्तानपुर जिले का उपनगर और सुल्तानपुर शहर के बाद दूसरा नगरीय कस्बा सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर दोस्तपुर हुआ करता था, जिसे सैकड़ों वर्ष पहले ही बसाया गया था. पहले यह दोस्तपुर तहसील का भी मुख्यालय हुआ करता था, लेकिन समय के साथ इसके प्रशासनिक ढांचे और सीमा में परिवर्तन हुआ और आज यह सिर्फ दोस्तपुर नगर पंचायत के रूप में है. ऐसे में आज हम इसका इतिहास जानेंगे.

क्या है दोस्तपुर का इतिहास?
इतिहासकार राजेश्वर सिंह अपनी पुस्तक ‘सुल्तानपुर इतिहास की झलक’ में लिखते हैं कि सुल्तानपुर का दोस्तपुर इलाका प्राचीन समय में सुल्तानपुर जिले का उपनगर हुआ करता था. यह मझुई नदी के दक्षिणी तट पर बसा हुआ एक नगर था, जो वर्तमान में भी मौजूद है. मझुई नदी में दोस्तपुर के आगे से 12 महीने पानी रहता है. मुगलों के समय और नवाबों के कार्यकाल में यह तहसील का मुख्यालय भी हुआ करता था.

यहां पर नवाबों के चकलादार रहा करते थे और राजस्व की व्यवस्था देखा करते थे. यही वजह है कि आवागमन की सुविधा के लिए इस नगर के उत्तर दिशा में मझुई नदी पर लाखौरी ईंटों का एक विशाल और नक्काशीदार पुल बनाया गया था, जहां पर विश्राम स्थल भी बने थे.

दियरा रियासत से है ताल्लुक
वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि इस कस्बे का संबंध दियरा रियासत से भी रहा है. इतिहास के पन्नों को जब हम पलटते हैं, तो हमें पता लगता है कि इसे 1857 ई. के बाद दियरा के राजा रुस्तम शाह की विधवा को उनके परिवार वालों ने गुजारे के रूप में दिया था. मझुई नदी पर दूसरा पुल जनपद के ग्राम बरामदपुर और अंबेडकर नगर के सुरहूपुर गांव के मध्य बना, जो आज भी मौजूद है.

बदलते समय के साथ बने हैं ये नगर
1890 में जहां सुल्तानपुर जिले में सिर्फ एक नगर था, या फिर कहें शहर था सुल्तानपुर, वहीं अब सुल्तानपुर में चार नगरीय क्षेत्र हैं. इसमें लंभुआ, कोइरीपुर, दोस्तपुर और कादीपुर नगर पंचायतें शामिल हैं. यहां पर धीरे-धीरे शहरीकरण हो रहा है और आधुनिक सुविधाएं भी नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं. इसके साथ ही वंदना योजना, अमृत शहरी योजना और कई ऐसी योजनाओं के माध्यम से शहरीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इनमें दोस्तपुर सबसे समृद्ध नगर हुआ करता था.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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