लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने जमीनी स्तर पर बेहद आक्रामक और रणनीतिक रूप से पुख्ता चक्रव्यूह रचना शुरू कर दिया है. इस बार का मुख्य फोकस अखिलेश यादव के पसंदीदा ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और अधिक धार देना तथा सवर्णों, खासकर ब्राह्मण समाज को पार्टी के पाले में मजबूती से जोड़ना है. पार्टी राजपूत चेहरों के बजाए इस बार के चुनाव में ब्राह्मण, भूमिहार और कायस्थ सवर्ण वोट साधने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है.सपा के चुनावी गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, आगामी चुनाव में पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव के अलावा पांच ऐसे कद्दावर चेहरे तय किए गए हैं, जो स्टार कैंपेनर के रूप में हेलीकॉप्टर से पूरे उत्तर प्रदेश का तूफानी दौरा करेंगे. इनमें सनातनी ब्राह्मण चेहरा, यादव समाज का प्रतिनिधित्व, दलित और मजबूत अति पिछड़ा वर्ग के महारथी शामिल होंगे, जो सीधे तौर पर भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने का काम करेंगे.
यूपी चुनाव 2027 में जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए अखिलेश यादव और डिंपल यादव के अलावा पांच ऐसे दिग्गज नेताओं की फौज तैयार की गई है, जो पार्टी के मुख्य स्टार कैंपेनर होंगे. ये वो चेहरे हैं जो जातिगत समीकरणों, क्षेत्रीय प्रभाव और प्रशासनिक व राजनैतिक अनुभव के मामले में बेहद माहिर माने जाते हैं. जाति और चेहरे के संतुलन के हिसाब से तैयार इस खास पैनल में ब्राह्मण-भूमिहार, यादव, जाट, दलित और मौर्य-कुशवाहा जैसे बड़े गैर-यादव ओबीसी चेहरों को तरजीह दी गई है. आइए जानते हैं उन पांच चेहरों के बारे में, जो 2027 के चुनाव में सपा के हेलीकॉप्टर पर सवार होकर सूबे में सियासी माहौल गरमाएंगे.
माता प्रसाद पांडेय
समाजवादी पार्टी की हालिया ब्राह्मण आउटरीच बैठकों और रणनीतियों से यह साफ हो गया है कि वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय 2027 के चुनाव में पार्टी का सबसे बड़ा सवर्ण चेहरा होंगे. उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके माता प्रसाद पांडेय की छवि एक बेहद गंभीर, विद्वान और सर्वमान्य ब्राह्मण नेता की है. पूर्वांचल में उनकी गहरी पकड़ है. अखिलेश यादव उन्हें हेलीकॉप्टर थमाकर प्रदेश के उन सभी ब्राह्मण बहुल क्षेत्रों में भेजेंगे, जहां भाजपा से पारंपरिक रूप से नाराज या असंतुष्ट चल रहे सवर्ण मतदाताओं को सपा के पाले में लाना है.
शिवपाल यादव ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ओम प्रकाश राजभर पर हमला बोला है.
शिवपाल सिंह यादव
अखिलेश यादव के चाचा और जसवंतनगर के विधायक शिवपाल सिंह यादव पार्टी के पारंपरिक ‘यादव’ वोट बैंक को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं में जोश फूंकने के लिए सबसे अहम मोहरा हैं. शिवपाल की खूबी यह है कि वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े हुए हैं. पूरे प्रदेश में यादव बाहुल्य सीटों के साथ-साथ जहां भी संगठन को मजबूत करने और बूथ मैनेजमेंट को धार देने की जरूरत होगी, वहां शिवपाल सिंह यादव मुख्य कमान संभालेंगे. उनका हेलीकॉप्टर दौरा पश्चिमी यूपी से लेकर मध्य यूपी और बुंदेलखंड तक सघन रूप से प्लान किया जा रहा है.
अवधेश प्रसाद
अयोध्या (फैजाबाद) लोकसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले अवधेश प्रसाद मौजूदा समय में सपा के सबसे बड़े दलित आइकन बन चुके हैं. वे पार्टी के ‘PDA’ पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक फॉर्मूले के दलित विंग का सबसे बड़ा और चमकीला चेहरा हैं. अवधेश प्रसाद का इस्तेमाल सपा पूरे प्रदेश के सुरक्षित सीटों पर दलित, विशेषकर पासी और वाल्मीकि समाज के मतों को अपनी तरफ खींचने के लिए करेगी. अयोध्या में भाजपा को पटखनी देने वाले उनके नैरेटिव को पार्टी पूरे राज्य में भुनाएगी.
बाबू सिंह कुशवाहा
सपा ने गैर-यादव ओबीसी जातियों को साधने के लिए बाबू सिंह कुशवाहा को लोकसभा में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. उत्तर प्रदेश की राजनीति में मौर्य, कुशवाहा, शाक्य और सैनी समाज की आबादी काफी मायने रखती है. बाबू सिंह कुशवाहा की इन जातियों में गहरी पैठ है, विशेषकर बुंदेलखंड और मध्य यूपी के इलाकों में. भाजपा के गैर-यादव ओबीसी कार्ड को बेअसर करने के लिए कुशवाहा एक स्टार प्रचारक के तौर पर हेलीकॉप्टर से राज्यभर के अति पिछड़े बाहुल्य क्षेत्रों में रैलियां करेंगे.
सनातन पांडेय
सपा के ब्राह्मण चेहरे के रूप में दूसरा सबसे बड़ा नाम बलिया के सांसद सनातन पांडेय का है. सनातन पांडेय जमीन से जुड़े आक्रामक नेता माने जाते हैं, जिनकी पूर्वांचल के युवाओं और छात्र राजनीति से निकले सवर्णों के बीच काफी मजबूत पकड़ है. माता प्रसाद पांडेय जहां बुजुर्ग और परिपक्व ब्राह्मण मतों को साधेंगे, वहीं सनातन पांडेय अपनी आक्रामक शैली से युवाओं और जोश से भरे सवर्ण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ेंगे. उन्हें बलिया, गाजीपुर, मऊ, देवरिया और गोरखपुर बेल्ट में विशेष रूप से मोर्चे पर लगाया जाएगा.
समाजवादी पार्टी की इस रणनीति के पीछे सिर्फ चुनाव प्रचार नहीं, बल्कि एक गहरा सोशल इंजीनियरिंग का गणित है. पार्टी ने यह समझ लिया है कि सिर्फ कोर वोट बैंक यादव और मुस्लिम के भरोसे सत्ता तक नहीं पहुंचा जा सकता. यही कारण है कि अखिलेश यादव ने अपनी रैलियों को बेहद केंद्रित करने और इन 5 महारथियों को अलग-अलग पॉकेट्स में स्वतंत्र रूप से उतारने का फैसला लिया है. यह पांचों चेहरे मिलकर यूपी के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेंगे, जिससे भाजपा की घेराबंदी मजबूत की जा सके.











