PG बिल्डिंगों से परेशान हुए सेक्टर अल्फा-2 के निवासी, घर छोड़ने को हुए मजबूर

ग्रेटर नोएडा: अल्फा-2 सेक्टर में पीजी की बढ़ती संख्या स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है. सेक्टर में रहने वाले लोगों का आरोप है कि आवासीय मकानों में तेजी से पीजी खुलने से साफ-सफाई, शोर-शराबे और आसपास के माहौल पर असर पड़ रहा है. वहीं, सड़कों पर गड्ढे और सर्विस लेन की बदहाल स्थिति ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सेक्टर में पहले सीमित संख्या में पीजी थे, लेकिन अब इनकी संख्या काफी बढ़ गई है. कई लोगों का दावा है कि अल्फा-2 में करीब 100 से 150 पीजी संचालित हो रहे हैं. इससे परेशान होकर कुछ परिवार यहां से दूसरी जगह जाने के बारे में सोच रहे हैं. निवासियों ने प्राधिकरण से समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है.

हर गली में पीजी खुलने से बिगड़ रहा माहौल
अल्फा-2 की निवासी मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि सेक्टर में पहले प्राधिकरण की ओर से बनाई गई सड़कें अब जगह-जगह से टूट चुकी हैं और उनमें गड्ढे हो गए हैं. सर्विस लेन की स्थिति भी बेहद खराब है. उन्होंने कहा कि सेक्टर में बुजुर्ग लोगों को इन सड़कों पर आने-जाने में काफी परेशानी होती है. वहीं, पीजी की संख्या बढ़ने से आवासीय माहौल भी प्रभावित हो रहा है. मीनाक्षी के मुताबिक, अब यहां लगभग हर अगला घर पीजी में तब्दील होता दिखाई दे रहा है. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि इसी तरह आवासीय मकानों में पीजी खुलते रहे, तो परिवारों के लिए यहां रहना मुश्किल हो जाएगा। स्थानीय लोग अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाने के बारे में सोचने लगे हैं. उन्होंने बताया कि सेक्टर में करीब 100 से 150 पीजी होने का अनुमान है.

पहले 30-40 पीजी थे, अब तेजी से बढ़ी संख्या
स्थानीय निवासी भारतीय रावत ने बताया कि पहले अल्फा-2 में लगभग 30 से 40 पीजी हुआ करते थे, लेकिन अब इनकी संख्या काफी बढ़ गई है. उनका आरोप है कि लोग प्रॉपर्टी खरीदकर उसे पीजी के रूप में संचालित करने लगे हैं. इससे सेक्टर के पारंपरिक आवासीय माहौल पर असर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि कई जगह पीजी के नाम पर ऐसी गतिविधियां हो रही हैं, जिनसे आसपास रहने वाले परिवारों को असहजता महसूस होती है. उनके मुताबिक, पीजी में रहने वालों के लगातार बदलने और आसपास की गतिविधियों के कारण स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. उन्होंने सवाल उठाया कि आवासीय सेक्टर में बढ़ते पीजी के संचालन और उनसे जुड़ी समस्याओं पर निगरानी क्यों नहीं की जा रही है.

बिल्डरों की गतिविधियों से सड़कें भी बदहाल
भारतीय रावत ने सेक्टर की सड़कों की स्थिति पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े बिल्डर अपनी इमारतों को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं, लेकिन आसपास की सड़कों की स्थिति खराब होती जा रही है. जगह-जगह गड्ढे होने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि सेक्टर में कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन उनकी मरम्मत कराने के लिए प्रभावी कदम दिखाई नहीं दे रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राधिकरण को सड़कों की मरम्मत के साथ-साथ निर्माण कार्यों से होने वाली समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए.

रात में शोर-शराबा और गंदगी से परेशान लोग
स्थानीय निवासी गीता ने बताया कि सेक्टर में पीजी की संख्या बढ़ने के साथ रात के समय शोर-शराबे की समस्या भी बढ़ गई है. उनका कहना है कि देर रात तक हंगामा होने से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है. वहीं, गंदगी की समस्या भी लगातार बनी हुई है. आरती मांझी ने बताया कि पीजी की बढ़ती संख्या के कारण सेक्टर में साफ-सफाई की व्यवस्था प्रभावित हो रही है. उनके मुताबिक, कुछ लोग कूड़ा सड़कों पर फेंक देते हैं, जिससे गंदगी फैलती है. उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासी कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. तेज आवाज में गाने बजाने से भी लोगों को परेशानी होती है.

प्राधिकरण से व्यवस्था सुधारने की मांग
अल्फा-2 के निवासियों का कहना है कि सेक्टर में पीजी के संचालन, साफ-सफाई, शोर-शराबे और सड़कों की बदहाल स्थिति से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है. लोगों ने मांग की है कि प्राधिकरण पीजी की स्थिति और नियमों की जांच करे, कूड़ा फैलाने वालों पर कार्रवाई करे और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराए. स्थानीय निवासियों के मुताबिक, विकास का लाभ तभी है, जब लोगों को अपने घरों के आसपास साफ-सुथरा और सुरक्षित माहौल भी मिले. अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन शिकायतों पर कब तक ध्यान देते हैं और अल्फा-2 के निवासियों को इन समस्याओं से राहत मिल पाती है.

Source

dainikupeditor@gmail.com

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाये
  • राजनीति