क्या वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और तिलक होंगे बाहर? गेंद अब गंभीर के पाले में

नई दिल्ली. भारतीय घरेलू क्रिकेट का सबसे प्रतिष्ठित मंच, दलीप ट्रॉफी 2026 कौन जीतेगा इसका जवाब तो 10 को मिल जाएगा क्योंकि 6 सितंबर से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खिताबी भिड़ंत होनी है लेकिन इस महामुकाबले से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट गलियारों में एक बड़ी दुविधा ने जन्म ले लिया है. दुविधा यह है कि क्या ईस्ट जोन की रीढ़ बन चुके युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी और कप्तान ईशान किशन, और दूसरी तरफ साउथ जोन की कमान संभाल रहे तिलक वर्मा इस फाइनल मैच का हिस्सा हो पाएंगे?

अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी सीरीज के चलते बने इस पेचीदा समीकरण के बाद अब अंतिम फैसला टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर के हाथों में है. दलीप ट्रॉफी का पांच दिवसीय फाइनल मुकाबला 6 सितंबर से 10 सितंबर तक चेन्नई में खेला जाएगा. दूसरी तरफ, अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए चुनी गई भारतीय टीम को 9 सितंबर को ही दिल्ली में रिपोर्ट करना है.

दलीप ट्रॉफी फाइनल की गणित

सबसे बड़ा गणित यह फंस रहा है कि यदि वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और तिलक वर्मा फाइनल मुकाबला खेलने उतरते हैं, तो मैच के चारों या पांचों दिन खेलने के बाद वे 10 तारीख को ही दिल्ली में भारतीय टीम से जुड़ पाएंगे. यह टाइमिंग नेशनल कैंप और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के लिहाज से बेहद तंग है. राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की मंशा साफ है कि जो भी खिलाड़ी उपलब्ध हैं, वे घरेलू क्रिकेट का यह बड़ा फाइनल खेलें।. यही वजह है कि केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल और मोहम्मद सिराज को साउथ जोन के लिए खेलने की हरी झंडी दे दी गई है, लेकिन वैभव, ईशान और तिलक के मामले में पेंच फंसा हुआ है.

‘वंडर बॉय’ वैभव सूर्यवंशी पर टिकीं नजरें

ईस्ट जोन के उप-कप्तान वैभव सूर्यवंशी ने सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन के खिलाफ 81 गेंदों में 92 रनों की तूफानी पारी खेलकर इतिहास रचा है. वे दलीप ट्रॉफी इतिहास में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बन गए हैं. ऐसे में ईस्ट जोन कभी नहीं चाहेगा कि फाइनल जैसे बड़े मंच पर उनका यह इन-फॉर्म ओपनर टीम से बाहर रहे लेकिन नेशनल टीम के शेड्यूल को देखते हुए उनके खेलने पर सस्पेंस गहरा गया है. नीचे दिया गया वीडियो इस युवा खिलाड़ी की प्रतिभा और इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है.

कप्तानों का संकट: ईशान और तिलक की दुविधा

संकट सिर्फ वैभव सूर्यवंशी तक सीमित नहीं है ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन और साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा दोनों ही इस समय अपनी-अपनी टीमों के लीडर हैं. अगर गंभीर इन खिलाड़ियों को नेशनल कैंप के लिए जल्दी बुलाने का फैसला करते हैं, तो दोनों ही जोन को फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में अपने नियमित कप्तानों के बिना उतरना होगा. यह दोनों ही टीमों के संतुलन को बिगाड़ सकता है, विशेषकर साउथ जोन के लिए जो तिलक वर्मा की अगुवाई में खिताबी जीत का सपना देख रही है.

फैसला अब गौतम गंभीर के पाले में

बीसीसीआई सूत्रों के मुताबिक, चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर भी इस स्थिति की समीक्षा करने और फाइनल का जायजा लेने चेन्नई पहुंच रहे हैं. अंतिम निर्णय पूरी तरह से हेड कोच गौतम गंभीर की रणनीति पर निर्भर करता है. गंभीर खिलाड़ियों को दलीप ट्रॉफी का पूरा फाइनल खेलने की छूट दें और उन्हें 10 सितंबर को दिल्ली में देर से जुड़ने की अनुमति दें. भविष्य की सीरीज की तैयारियों और टीम बॉन्डिंग को प्राथमिकता देते हुए गंभीर इन तीनों खिलाड़ियों को फाइनल से दूर रखकर सीधे 9 सितंबर को दिल्ली पहुंचने का निर्देश दें. गौतम गंभीर अपने कड़े और स्पष्ट फैसलों के लिए जाने जाते हैं अब देखना दिलचस्प होगा कि वे ‘घरेलू क्रिकेट की गरिमा’ और ‘इंटरनेशनल सीरीज की तैयारी’ में से किसे प्राथमिकता देते हैं. क्रिकेट फैंस और दोनों टीमों के सेलेक्टर्स की सांसें फिलहाल गंभीर के इसी एक फैसले पर अटकी हुई हैं.

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dainikupeditor@gmail.com

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