शाहरुख की ऑनस्क्रीन मां, कभी लुक को लेकर सुनने पड़ते थे ताने, फिर 1 रोल से बन गईं स्टार

Last Updated:July 17, 2026, 04:01 IST

हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री जरीना वहाब ने अपनी मेहनत और शानदार अभिनय के दम पर इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई. एक समय ऐसा भी था जब उन्हें अपने रंग-रूप और लुक को लेकर कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया. अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने साबित किया कि किसी कलाकार की पहचान उसके हुनर से होती है.

नई दिल्ली. जरीना वहाब का जन्म 17 जुलाई 1959 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में हुआ था. बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था. फिल्मों में आने के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से एक्टिंग की ट्रेनिंग ली.

जरीना को शुरुआत में फिल्मों में काम पाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा. बताया जाता है कि कई लोगों ने उनके लुक और सांवले रंग को लेकर सवाल उठाए. यहां तक कि उन्हें कुछ जगहों पर नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का सामना भी करना पड़ा. लेकिन जरीना ने हार नहीं मानी और लगातार अपने लिए मौके तलाशती रहीं.

साल 1974 में उन्हें पहली फिल्म ‘इश्क इश्क इश्क’ में काम करने का मौका मिला. इस फिल्म को देव आनंद ने बनाया था और इसमें जीनत अमान, शबाना आजमी और कबीर बेदी जैसे कलाकार भी थे. फिल्म में जरीना ने जीनत अमान की बहन का किरदार निभाया था. हालांकि फिल्म ज्यादा सफल नहीं रही, लेकिन जरीना के अभिनय पर लोगों की नजर जरूर गई.

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कहा जाता है कि इससे पहले उन्हें फिल्म ‘गुड्डी’ के लिए भी चुना गया था, लेकिन बाद में यह भूमिका जया बच्चन को मिल गई. इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों के ऑफर मिलने लगे.

साल 1976 में आई बासु चटर्जी की फिल्म ‘चितचोर’ ने जरीना वहाब को घर-घर में पहचान दिला दी. इस फिल्म में उन्होंने गीता नाम की एक साधारण और मासूम लड़की का किरदार निभाया था. अमोल पालेकर के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया. फिल्म की सफलता के बाद जरीना रातोंरात लोकप्रिय हो गईं.

इसके बाद उन्होंने ‘घरौंदा’, ‘अगर’, ‘जज्बात’, ‘सावन को आने दो’, ‘गोपाल कृष्णा’, ‘नैया’, ‘सितारा’ और ‘अनपढ़’ जैसी कई फिल्मों में काम किया. फिल्म ‘घरौंदा’ के लिए उन्हें साल 1977 में फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए बेस्ट एक्ट्रेस कैटेगरी में नामांकन भी मिला था.

जरीना वहाब ने सिर्फ हिंदी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई. अपने लंबे करियर में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए. समय के साथ उन्होंने मां, सास और मजबूत महिला किरदारों को भी पर्दे पर बखूबी निभाया.

साल 1974 में उन्हें पहली फिल्म ‘इश्क इश्क इश्क’ में काम करने का मौका मिला. इस फिल्म को देव आनंद ने बनाया था और इसमें जीनत अमान, शबाना आजमी और कबीर बेदी जैसे कलाकार भी थे. फिल्म में जरीना ने जीनत अमान की बहन का किरदार निभाया था. हालांकि फिल्म ज्यादा सफल नहीं रही, लेकिन जरीना के अभिनय पर लोगों की नजर जरूर गई.

साल 2010 में आई फिल्म ‘माय नेम इज खान’ में उन्होंने शाहरुख खान के किरदार रिजवान खान की मां की भूमिका निभाई थी, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया. इसके बाद भी वह फिल्मों, टीवी और वेब सीरीज में लगातार काम करती रही हैं. जरीना वहाब की निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने साल 1986 में अभिनेता आदित्य पंचोली से शादी की थी. दोनों की मुलाकात फिल्म ‘कलंक का टीका’ के सेट पर हुई थी. उनके दो बच्चे हैं. बेटी सना और बेटा सूरज पंचोली.

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