यूपी चुनाव 2027 से पहले ही ‘राम नाम सत्य’… सरयू में डूब गए ये 5 मुद्दे!

लखनऊ. यूपी चुनाव 2027 में वो पांच मुद्दे कौन हैं, जो कुछ दिनों पहले तक राजनीतिक पार्टियों के एजेंडे में थे, लेकिन अब अचानक से उनका ‘राम नाम सत्य’ हो गया? अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला जैसे सामने आया, सपा से लेकर हर विपक्षी पार्टियों ने इस मौके को भुनाना क्यों शुरू कर दिया? क्यों बीजेपी राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले पर बैकफुट में आने के बजाए फ्रंटफुट पर बैटिंग करने लगी? राम मंदिर में चंदा चोरी मामला सामने आने के बाद कुछ दिनों की चुप्पी के बाद बीजेपी ने इस पर आक्रमक रुख अख्तियार कर लिया है. खासकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर बरस रहे हैं. बीते सात दिनों में ऐसा एक दिन भी नहीं हुआ होगा, जब सीएम योगी सार्वजनिक सभाओं में अखिलेश यादव पर बरसे न हों. इसी तरह अखिलेश यादव भी अपनी हर सभा में अयोध्या में चंदा चोरी मामले को उछाल कर नए राजनीतिक मोड़ दे रहे हैं. ऐसे में बीते 9-10 सालों से विपक्ष ने जो सीएम योगी के खिलाफ नैरेटिव सेट किया था बुलडोजर, एनकाउंटर, भ्रष्टाचार और नौकरी का, उन मुद्दों का अब राम नाम सत्य हो गया है.

उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का शंखनाद मानो समय से पहले ही हो चुका है, लेकिन इस बार सियासी बिसात पर जो मोहरे सजे थे, वे अचानक गायब हो गए हैं. कुछ दिनों पहले तक समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी जिन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही थीं, अयोध्या के राम मंदिर में सामने आए ‘चढ़ावा चोरी’ के सनसनीखेज मामले ने उन सभी मुद्दों का ‘राम नाम सत्य’ कर दिया है. इस एक घटना ने यूपी की राजनीति की पूरी धुरी को बदलकर रख दिया है और अब मुकाबला पूरी तरह से धार्मिक अस्मिता और उसमें कथित भ्रष्टाचार की नूराकुश्ती पर आकर टिक गया है.

क्या था वो मामला जिसने बदला पूरा नैरेटिव?

राम मंदिर के भीतर से लाखों रुपये के चढ़ावे की हेराफेरी का मामला जैसे ही विशेष जांच दल की रिपोर्ट में सामने आया और आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई, विपक्ष को एक संजीवनी मिल गई. अखिलेश यादव ने इसे सीधे ‘करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़’ बताते हुए चंदा चोरी के मुद्दे को लपक लिया. इसके जवाब में सीएम योगी आदित्यनाथ और भाजपा भी बैकफुट पर जाने की बजाय फ्रंटफुट पर आकर बैटिंग करने लगे. बीते सात दिनों के बयानों को देखें, तो ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरा जब मुख्यमंत्री ने रामलला, वाराणसी के शिव कॉरिडोर और मुलायम सिंह यादव के दौर की याद न दिलाई हो. वहीं अखिलेश यादव अपनी हर चुनावी जनसभा में अयोध्या की इस कथित ‘चोरी’ को उछालकर नया राजनीतिक नैरेटिव सेट कर रहे हैं.

वो 5 बड़े मुद्दे जो नेपथ्य में चले गए

अयोध्या में चंदा चोरी विवाद के आने से पहले तक, यूपी चुनाव 2027 के एजेंडे में ये पांच मुद्दे सबसे ऊपर थे.

बुलडोजर नीति बनाम प्रशासनिक मनमानी: भाजपा जहां इसे ‘लॉ एंड ऑर्डर’ का प्रतीक मानती थी, वहीं सपा इसे एकतरफा कार्रवाई बताकर बड़ा मुद्दा बना रही थी.

एनकाउंटर राज: यूपी पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई और विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे ‘फर्जी एनकाउंटर’ के सवाल इस चुनाव के केंद्र में होने वाले थे.

भ्रष्टाचार और पेपर लीक: युवाओं और बेरोजगारों से जुड़ा यह मुद्दा विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार था, जो अब थोड़ा धीमा पड़ता दिख रहा है.

जातीय जनगणना और PDA: अखिलेश यादव का पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) का फॉर्मूला, जिसके दम पर उन्होंने लोकसभा में बड़ी सफलता हासिल की थी.

विकास और निवेश (ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट): योगी सरकार अपने कार्यकाल के इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के दावों को मुख्य चुनावी चेहरा बनाने की तैयारी में थी.

योगी की फ्रंटफुट बैटिंग और अखिलेश का पलटवार

अयोध्या मामले के बाद राजनीति इस कदर गरमाई है कि सीएम योगी ने हाथरस की जनसभा में अखिलेश यादव को सीधे चुनौती दे डाली कि अगर वे सच में धर्मनिष्ठ हैं, तो मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के आंदोलन का खुलकर समर्थन करें. योगी आदित्यनाथ ने सपा के इतिहास पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, वे आज अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने का ढोंग कर रहे हैं. इसके जवाब में अखिलेश यादव ने भी साफ कर दिया है कि उनकी सरकार आने पर वे अयोध्या को विश्व की सबसे पवित्र और अनुपम आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करेंगे, जहां भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं होगी. विपक्ष अब इस चोरी को सरकार की प्रशासनिक विफलता और आस्था के व्यापार के रूप में पेश कर रहा है.

क्या 2027 में केवल राम का ही मुद्दा रहेगा?

सियासी जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में जब भी चुनाव आते हैं, तो भावनाएं हमेशा आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर भारी पड़ जाती हैं. वर्तमान में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने दोनों ही खेमों को अपनी-अपनी तरह से फायदा उठाने का मौका दे दिया है. भाजपा जहां इसके जरिए अपने कोर हिंदू मतदाताओं को फिर से गोलबंद करने की कोशिश कर रही है और खुद को ‘कड़े एक्शन’ लेने वाली सरकार के रूप में पेश कर रही है जिसने अपने ही सिस्टम में चोरों को जेल भेजा, वहीं सपा और कांग्रेस इसके जरिए बीजेपी के ‘कट्टर ईमानदार’ और ‘धर्म रक्षक’ होने के दावों पर चोट कर रहे हैं.

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dainikupeditor@gmail.com

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