धान रोपाई के 24 घंटे बाद कर लें ये काम…नहीं उगेगा खरपतवार, कृषि एक्सपर्ट ने बताई ट्रिक

होमफोटोकृषि

धान रोपाई के 24 घंटे बाद कर लें ये काम…फिर नहीं उगेगा खरपतवार, जानें ट्रिक

Last Updated:July 01, 2026, 18:04 IST

Paddy Farming : यूपी में इन दिनों धान की रोपाई का काम तेजी से चल रहा है. लखीमपुर खीरी में भी हजारों किसान धान रोपाई में जुटे हैं. धान की अच्छी पैदावार के लिए समय पर रोपाई जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है रोपाई के तुरंत बाद खरपतवारों पर नियंत्रण करना. कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बिसेन लोकल 18 से बताते हैं कि धान की रोपाई के 24 से 36 घंटे के भीतर खेत में खरपतवार नियंत्रण की दवा का प्रयोग जरूर करें. किसान भाई प्रीटिलाक्लोर 50% ईसी (Pretilachlor 50% EC) या बूटाक्लोर 50% ईडब्ल्यू (Butachlor 50% EW) का प्रयोग कर सकते हैं. खरपतवार केवल पोषक तत्व ही नहीं चुराते बल्कि कीट और रोगों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं.

लखीमपुर खीरी जिले में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. इन दिनों धान की रोपाई पीक पर है. कृषि एक्सपर्ट बताते हैं कि धान की अच्छी पैदावार के लिए समय पर रोपाई जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है रोपाई के तुरंत बाद खरपतवारों का नियंत्रण. अगर शुरुआती दिनों में खरपतवारों को नहीं रोका गया, तो वे धान के पौधों के साथ पानी, पोषक तत्व और धूप के लिए प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं. इससे उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.

कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बिसेन लोकल 18 से बताते हैं कि धान की रोपाई के 24 से 36 घंटे के भीतर खेत में खरपतवार नियंत्रण की दवा का प्रयोग अवश्य करें. सही समय पर किया गया यह उपाय न केवल खेत को खरपतवार मुक्त रखता है बल्कि धान की फसल को मजबूत बनाकर बेहतर उत्पादन भी दिलाता है.

धान की रोपाई के कुछ ही दिनों बाद खेतों में कई प्रकार के खरपतवार उगने लगते हैं. इनमें चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार, संकरी पत्ती वाले खरपतवार और मोथा वर्ग के खरपतवार प्रमुख हैं. ये खरपतवार धान के पौधों से पहले तेजी से बढ़ते हैं और मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य पोषक तत्वों को अपने अंदर खींच लेते हैं. इससे धान के पौधों का विकास रुक जाता है, पौधे कमजोर हो जाते हैं

Add News18 as
Preferred Source on Google

कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बिसेन के अनुसार, धान की रोपाई के 24 से 36 घंटे के भीतर यदि खरपतवार नाशक का छिड़काव कर दिया जाए, तो अधिकांश खरपतवार अंकुरित होने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं. किसान प्रीटिलाक्लोर 50% ईसी (Pretilachlor 50% EC) या बूटाक्लोर 50% ईडब्ल्यू (Butachlor 50% EW) का प्रयोग कर सकते हैं. यह दोनों प्री-इमर्जेंस (Pre-Emergence) खरपतवारनाशी हैं.

खरपतवारनाशी दवा का प्रभाव तभी बेहतर होता है जब खेत में पर्याप्त नमी या हल्का पानी मौजूद हो. इसलिए दवा डालने के समय खेत में लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर पानी होना चाहिए. दवा डालने के बाद कम से कम दो से तीन दिनों तक खेत का पानी बाहर न निकलने दें, ताकि दवा पूरे खेत में प्रभावी तरीके से काम कर सके. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है और किसान को अधिक उपज प्राप्त होती है. बाद में मजदूरों से निराई कराने की जरूरत भी कम पड़ती है, जिससे खेती की लागत घटती है.

डॉ. प्रदीप के मुताबिक, धान की फसल में शुरुआती 30 से 40 दिनों तक खरपतवारों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो उपज में भारी गिरावट आ सकती है. खरपतवार केवल पोषक तत्व ही नहीं चुराते बल्कि कीट और रोगों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं, इसलिए शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण धान की सफल खेती की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है.

धान की खेती से किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रही है. कई बार खरपतवार पर किसान सही से नियंत्रण नहीं कर पाते हैं.  ऐसे किसानों के घाटा होना तय है. डॉ. प्रदीप बिसेन बताते हैं कि धान की खेती में अच्छी पैदावार केवल बेहतर बीज और समय पर रोपाई से नहीं मिलती. रोपाई के 24 से 36 घंटे के भीतर खरपतवार नियंत्रण की सही दवा का वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग करना जरूरी है.

Source

dainikupeditor@gmail.com

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाये
  • राजनीति