ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर में क्यों सजाये जाते हैं हिण्डोले, जानिए परम्परा

यूपी के मथुरा के ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर में हिंडोले सजाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है. मंदिर में हिंडोले सजाने का क्या महत्व है, इसके बारे में हम जानेंगे. कहा जाता है कि भगवान के बाल स्वरूप को रिझाने के लिए श्रावण मास में इस तरह के हिंडोले सजाए जाते हैं. यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है. इसका निर्वहन आज भी पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के लोग करते चले आ रहे हैं.

श्रावण मास में होते हैं हिंडोले और घटाओं के आयोजन

श्रावण मास में हिंडोले और घटाओं के कार्यक्रम ठाकुर मंदिर द्वारकाधीश में होते हैं. इनका निर्धारण मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 डॉक्टर वागिश कुमार जी महाराज तृतीय पीठाधीश्वर कांकरोली नरेश जी के द्वारा किया जाता है. उनके सफल निर्देशन में मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 कांकरोली युवराज वेदांत कुमार जी महाराज एवं सिद्धांत कुमार जी महाराज के द्वारा कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है.

मोतियों के हिंडोले में विराजमान हुए ठाकुर द्वारकाधीश

इसी क्रम में सावन पंचमी शुक्ल पक्ष के दिन ठाकुर द्वारकाधीश जी महाराज मोतियों के हिंडोले में विराजमान हुए. यह क्रम पूरे सावन मास में निरंतर जारी रहेगा.

बाल स्वरूप को रिझाने के लिए सजाए जाते हैं हिंडोले

मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने हिंडोले सजाने की मान्यता के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि ठाकुर जी का बाल रूप है. बाल्य अवस्था में बच्चे को नई-नई चीजें और खिलौने दिए जाते हैं. इसी भाव के साथ भगवान को हिंडोले में विराजमान कराया जाता है.

तिथि और नक्षत्र के अनुसार होंगे घटाओं के आयोजन

उन्होंने बताया कि तिथि, घड़ी और नक्षत्र के हिसाब से सावन में घटाओं के आयोजन होंगे. घटा और हिंडोले वाले दिन दर्शन के समय में भी परिवर्तन किया गया है. दर्शनार्थियों के लिए एक झांकी बढ़ाई गई है, जिसमें अलग-अलग समय पर दर्शन होंगे.

हिंडोले के दिन ये रहेगा दर्शन का समय

जिस दिन घटा होगी, उस दिन सांयकाल के दर्शन का समय निर्धारित किया गया है. पहली झांकी शाम 4:50 से 5:05 बजे तक और दूसरी झांकी 5:45 से 6:00 बजे तक होगी. इसके बाद शाम 7:00 बजे से रात 8:00 बजे तक श्रद्धालु लगातार हिंडोले के दर्शन कर सकेंगे.

फल-फूलों के हिंडोले में विराजमान हुए ठाकुर जी

लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि मंदिर में समय-समय पर हिंडोले का कार्यक्रम किया जाता है. भगवान श्री कृष्ण यहां बाल रूप में विराजमान हैं. पुष्टिमार्गीय संप्रदाय में भगवान को लाड़ लड़ाने की परंपरा होती है. इसी भाव के तहत ठाकुर जी को फल और फूलों के हिंडोले में विराजमान किया गया.

जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर

हिंडोले में विराजमान ठाकुर द्वारकाधीश के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. भक्तों ने दर्शन कर खुद को धन्य माना. इस दौरान मंदिर का वातावरण भगवान द्वारकाधीश के जयकारों से गूंज उठा.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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