केले की खेती का हब बने अमेठी के दर्जनो गांव, युवाओं ने इसे बनाया व्यवसाय का जरिया

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केले की खेती का हब बने अमेठी के दर्जनो गांव, युवाओं ने इसे बनाया व्यवसाय

Last Updated:May 08, 2026, 17:19 IST

Amethi news: अमेठी के दर्जनों गांवों के पढ़े लिखे युवा भी केले की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. जिससे यह क्षेत्र केला पट्टी के रूप में विकसित हो रहा है. कंसापुर, पूरे जयतराज, कसारा, सहजीपुर, भिच्छू का पुरवा, मल्लूपुर, मुहिबशाह, मिसरौली, बड़गांव, मधुपुर खदरी, भुजकुआरे आदि गांवों में बड़े पैमाने पर केले की खेती की जा रही है. पूरे जैयतराज के स्नातक युवा रवि शुक्ला ने बनारस तथा मध्य प्रदेश में केले की खेती देखकर एक बीघे खेत से केले की खेती शुरू की. फायदा दिखा तो इन्होंने इसे व्यवसायिक खेती के रूप में करना शुरू कर दिया. आज वह आठ बीघा खेत में केले की खेती कर रहे हैं.

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अमेठीः अमेठी का एक गांव की जहां पर पांच किसानों ने केले की खेती शुरू की. आज सैकड़ों की संख्या में किसान खेती के जरिए लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. विभाग की तरफ से भी उन्हें मुनाफा मिल रहा है और इसकी देन है की आज गांव केले की खेती का हब बन गया है.

अमेठी जिले का कंसापुर गांव खेती किसानी का हब है. समान्यतः यहां धान गेहूं की अपेक्षा पारंपरिक खेती से हटकर जैविक खेती की जाती है. जिसमें केले की खेती शामिल है. पहलें यहां चार से पांच किसान खेती करते थे आज 100 से अधिक किसान केले की खेती में लाखों की कमाई कर रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक करीब 100 हेक्टेयर से अधिक खेती इस गांव में होती है. इसके साथ ही उद्यान विभाग की तरफ से किसानों को जागरूक और लाभान्वित भी किया जाता है.

दर्जनो गांव में बड़े पैमाने पर हो रही केले की खेती

विकासखंड के दर्जनों गांवों के पढ़े लिखे युवा भी केले की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. जिससे यह क्षेत्र केला पट्टी के रूप में विकसित हो रहा है. कंसापुर, पूरे जयतराज, कसारा, सहजीपुर, भिच्छू का पुरवा, मल्लूपुर, मुहिबशाह, मिसरौली, बड़गांव, मधुपुर खदरी, भुजकुआरे आदि गांवों में बड़े पैमाने पर केले की खेती की जा रही है. पूरे जैयतराज के स्नातक युवा रवि शुक्ला ने बनारस तथा मध्य प्रदेश में केले की खेती देखकर एक बीघे खेत से केले की खेती शुरू की. फायदा दिखा तो इन्होंने इसे व्यवसायिक खेती के रूप में करना शुरू कर दिया. आज वह आठ बीघा खेत में केले की खेती कर रहे हैं.

तारापुर गांव के सुभाष सिंह परास्नातक करने के बाद व्यापार करने लगे. कंसापुर गांव में केले की खेती देखकर इन्होंने अपने यहां केले की खेती शुरू किया.  पहले वह केले के पौधे मध्य प्रदेश के जलगांव से ले आए. एक पौध तैयार करने में कुल लागत मजदूरी, सिंचाई, खाद आदि लेकर लगभग 90 रुपए लगती है. एक पौधे से 200 रुपए से अधिक की आय होती है. उन्होंने बताया कि शुरू में सवा एकड़ जमीन में डेढ़ लाख रुपए खर्च कर केले की खेती शुरू किया था. पहली बार उनको तीन लाख की आय हुई. दोगुना फायदा देखकर उन्होंने डेढ़ एकड़ और जमीन में केले की रोपाई कर दिया है। उन्होंने बताया केले की खेती करने पर मजदूरों को भी परमानेंट काम मिलता है. जिसके चलते मजदूरों को भी फायदा होता है.

उद्यान विभाग की ओर से भी मिलता है मदद

वही उद्यान निरीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि किसानों को सीधा फायदा खेती में हो रहा है. उन्होंने कहा कि खेती के जरिए विभाग की तरफ से 40 हजार का अनुदान दिया जाता है. इसके साथ ही गेहूं धान की अपेक्षा या फसल पूरी तरीके से घर पर ही आसानी से खेत में ही बिक जाती है जिससे किसान परेशान नहीं होते और उनकी अच्छी लागत और कमाई उन्हें कम समय में मिल जाती है उन्होंने कहा कि यह पूरी तरीके से गांव हब बन रहा है जिससे किसानों के साथ-साथ गांव के लोगों को भी रोजगार मिल रहा.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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