Last Updated:September 16, 2026, 10:55 IST
Baba Neem Karoli : प्रयागराज एक ऐसा शहर है जहां आस्था अक्सर सड़कों और घाटों पर झलकती है. यहां चर्च लेन की एक शांत गली में बना एक साधारण सा घर इन दिनों भक्तों को अपनी ओर खींच रहा है. आइए जानते हैं इसकी वजह
नीम करौली बाबा का प्रयागराज के घर से कनेक्शन.
प्रयागराज : कभी-कभी कोई फिल्म आती है उसका न कोई ज्यादा प्रमोशन होता और न कोई प्रचार… फिर भी बॉक्स ऑफिस और लोगों के दिल में जगह बना लेती है. ऐसी ही एक फिल्म है हनुमान अंश. बाबा नीब करौरी के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश हर किसी को पसंद आ रही है. इसकी वजह से बाबा से जुड़े स्थानों पर भीड़ देखने को मिल रही है. अब एक और जगह चर्चा में आ गई है वो है- प्रयागराज की Church Lane में बना 18/4 नंबर वाला साधारण-सा घर. यहां कोई बड़ा मंदिर नहीं, न कोई मूर्ति और न ही पूजा-पाठ होती है, लेकिन फिर भी हर शाम लोग यहां आते हैं.
साधारण सा घर खींच रहा ध्यान
प्रयागराज की चर्च लेन की एक शांत गली में बना एक साधारण सा घर इन दिनों भक्तों को अपनी ओर खींच रहा है. यह घर आसपास के घरों जैसा ही है, लेकिन फिर भी यह एक पवित्र स्थान माना जाता है. यहां हर शाम लोग साधारण से घर में सिर झुकाने के लिए आ रहे हैं. शीश नवाने की वजह यह है कि इस घर में कभी प्रसिद्ध आध्यात्मिक हस्ती नीम करौली (नीब करौरी) बाबा रुके थे.
‘हनुमान अंश’ की शूटिंग इस घर में नहीं हुई थी
बता दें, यह घर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे सुधीर मुखर्जी का था और बाबा साल में एक या दो बार उनसे मिलने के लिए यहां आते थे. हालांकि फिल्म ‘हनुमान अंश’ की शूटिंग इस घर में नहीं हुई थी, लेकिन फिल्म में बाबा का जिक्र होने से लोगों की उनमें दिलचस्पी फिर से बढ़ गई है. यही कारण है कि लोग यहां आने लगे हैं. यह घर शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक आगंतुकों के लिए खुला रहता है. यहां कोई चढ़ावा स्वीकार नहीं किया जाता. लोगों को केवल दर्शन करने की अनुमति है. दर्शन के बाद लोगों को सत्या पांडे और उनके पति इंद्रेश प्रसाद में लड्डू देते हैं. यह दोनों इस घर की देखभाल करते हैं.
करीब 100 साल पुराना रिश्ता
बाबा नीम करौली और प्रोफेसर सुधीर मुखर्जी का रिश्ता करीब 100 साल पुराना बताया जाता है. दोनों की पहली मुलाकात 1935 में कोलकाता के दक्षिणेश्वर मंदिर में हुई थी. बाबा ने उस समय सुधीर मुखर्जी को एक मंत्र दिया था. बाद में 1950 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में दोनों की फिर मुलाकात हुई. सुधीर मुखर्जी ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर की नौकरी शुरू की. बाबा से प्रभावित होकर उन्होंने 1956 में चर्च लेन में अपना घर बनवाया.
एक कमरा सुरक्षित
आज भी इस घर में बाबा नीम करौली का एक कमरा सुरक्षित रखा गया है. कहा जाता है कि बाबा इसी कमरे में आराम और प्रार्थना करते थे. उनके तख्त और तकिए की रोज पूजा होती है और फूल चढ़ाए जाते हैं. हर मंगलवार को चादर बदली जाती है. बाबा को लौकी की सब्जी, मूंग दाल और बेसन की रोटी पसंद थी. आज भी इन्हीं चीजों का भोग लगाया जाता है.
सत्या के अनुसार, बाबा नीम करौली हनुमान जी के भक्त और उनके अवतार माने जाते थे. उनका कहना था कि बाबा ने प्रोफेसर मुखर्जी को हनुमान के रूप में दर्शन दिए थे. बाबा चमत्कारों का प्रचार नहीं करते थे और कहते थे कि चीजें अपने आप होती हैं. बाद में प्रोफेसर मुखर्जी के परिवार के करीब आ गईं. उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने सत्या को बेटी की तरह अपनाया. प्रोफेसर मुखर्जी का 1997 में निधन हुआ और कुछ साल बाद उनकी पत्नी कमला का भी निधन हो गया. उनका कहना है कि बाबा ने प्रोफेसर मुखर्जी से कहा था कि यह घर उनका है और वे हमेशा यहां रहेंगे. आज भी परिवार को इस घर में बाबा की मौजूदगी महसूस होती है.
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काव्या मिश्राSenior Sub Editor
Kavya Mishra is a Senior Sub Editor at News18 Hindi with over seven years of experience in digital and print journalism. She is part of the regional editorial team, covering Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana …
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First Published :
September 16, 2026, 10:55 IST











