कानपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने कई अहम फैसले लिए. सरकार ने यूपी को भी बड़ा तोहफा दिया है. कानपुर से कबरई के बीच एक शानदार फोरलेन हाईवे के निर्माण को हरी झंडी दे दी है. इसकी लंबाई 117.7 किलोमीटर होगी. इस फोरलेन वाले एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे प्रोजेक्ट पर कुल 7,145.14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इतना ही नहीं हाईवे को इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि भविष्य में 6 लेन का भी बनाया जा सके. आइए जानते हैं इस हाईवे के बारे में सबकुछ.
यह हाईवे भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा. परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बीओटी ( BOT) यानी बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर मोड पर लागू किया जाएगा. साथ ही मौजूदा NH-34 के कानपुर-कबरई सेक्शन का संचालन और रखरखाव भी इसी मॉडल के तहत किया जाएगा.
सफर का समय होगा कम
हाईवे को फिलहाल 4 लेन में बनाया जाएगा, लेकिन इसकी डिजाइन ऐसी होगी कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे 6 लेन तक आसानी से किया जा सकेगा. यह एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के हिसाब से डिजाइन किया जाएगा. इसके बनने के बाद कानपुर से कबरई तक का सफर 3.5 घंटे से घटकर लगभग 1.5 घंटे रह जाएगा. यह परियोजना सफर के वक्त को कम तो करेगी ही इसके साथ ही इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक और औद्योगिक सूरत को भी पूरी तरह से बदल कर रख देगी. इस हाईवे को बेहद आधुनिक मानकों के साथ तैयार किया जा रहा है, जिसमें वाहनों की रफ्तार से लेकर क्षेत्र के विकास तक का पूरा खाका खींचा गया है.
यूपी और एमपी की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
यह कॉरिडोर न केवल कानपुर और कबरई को जोड़ेगा बल्कि सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों तक तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा. इससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को मध्य प्रदेश के खनिज, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग हब से सीधा लाभ मिलेगा.
इन हाईवे और एक्सप्रेसवे से मिलेगा सीधा कनेक्शन
यह परियोजना कई प्रमुख मार्गों से जुड़ेगी, जिनमें शामिल हैं-
NH-34
NH-35
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
कानपुर रिंग रोड
SH-46
SH-91
SH-10B
SH-42
उद्योग, खनन और कृषि को मिलेगा बड़ा फायदा
इस हाईवे के बनने से सबसे बड़ा आर्थिक लाभ माल ढुलाई और व्यापार को होगा. कबरई का इलाका गिट्टी और कंक्रीट का एक बहुत बड़ा मुख्य केंद्र है. यहां से भारी मात्रा में निर्माण सामग्री कानपुर, भोपाल और आसपास के कई बड़े शहरों में सप्लाई की जाती है. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारी वाहनों की आवाजाही के कारण इस रूट पर अक्सर जाम और ट्रैफिक की समस्या बनी रहती है. इसे सुधारने के लिए इस अपग्रेडेशन की सख्त जरूरत थी. अब हाईवे के जरिए कबरई माइनिंग बेल्ट तक पहुंच आसान होगी. इससे खनिज, निर्माण सामग्री, औद्योगिक उत्पाद और कृषि उपज की ढुलाई तेज होगी. लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी.
PM गतिशक्ति के तहत 16 आर्थिक नोड्स होंगे कनेक्ट
यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री गति शक्ति (PM Gati Shakti) योजना के तहत 16 प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगी. इनमें शामिल हैं- उन्नाव, बंथर, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर, भुरगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया, ट्रांस गंगा इंटीग्रेटेड टाउनशिप, ग्रोथ सेंटर जयपुर, कानपुर नगर नोड, बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्र धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच होगी आसान. यह कॉरिडोर 9 सामाजिक और पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर करेगा. जो हैं- फतेहपुर, महोबा, कानपुर जूलॉजिकल पार्क, बुद्ध पार्क, जेके मंदिर एंड गार्डन, राधा कृष्ण मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोपेश्वर मंदिर, महोबा के पर्यटन स्थल.
परियोजना के जरिए 10 प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड्स की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिनमें-
- कानपुर
- घाटमपुर
- हमीरपुर
- महोबा
- कबरई
- भरवा सुमेरपुर रेलवे स्टेशन
- बांदा रेलवे स्टेशन
- कानपुर एयरपोर्ट
- चकेरी एयरपोर्ट
- खजुराहो एयरपोर्ट
यह प्रोजेक्ट देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी एक नई मजबूती देगा. इस फोरलेन हाईवे के बन जाने से प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत आने वाले 4 प्रमुख इकोनॉमिक नोड्स और 10 लॉजिस्टिक्स नोड्स की कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार होगा. इसके अलावा, निर्माण के दौरान करीब 1.2 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार पैदा होने का अनुमान है. साथ ही साल 2028 तक रोजाना करीब 18 हजार वाहनों के इस हाईवे से गुजरने का अनुमान लगाया जा रहा है.










