Last Updated:October 20, 2026, 07:17 IST
देशभर में विजयदशमी पर रावण दहन किया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के विंध्याचल में एक अलग परंपरा निभाई जाती है. यहां प्रभु श्रीराम के रावण के पुतले पर बाण मारने के बाद स्थानीय लोग उसे लूटकर ले जाते हैं. मान्यता है कि पुतले के हिस्से घर ले जाने से सुख-समृद्धि और शांति आती है. आचार्य पं. अनुपम महाराज के मुताबिक, विंध्याचल में यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है.
मिर्जापुर: देशभर में विजयदशमी का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस दिन प्रभु श्रीराम रावण का वध करते हैं, जिसके बाद यह पर्व उत्साहपूर्वक मनाया जाता है. विजयदशमी का पर्व असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक के रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है. हालांकि, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के विंध्याचल में रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता है.
विंध्याचल में रावण दहन नहीं, पुतला लूटने की है परंपरा
इस दिन प्रभु श्रीराम रावण के पुतले पर बाण मारते हैं, जिसके बाद स्थानीय लोग पुतले को लूटकर ले जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि पुतले के हिस्सों को घर ले जाने से सुख-समृद्धि और शांति आती है. यही वजह है कि सालों से इस अनोखी परंपरा के साथ विजयदशमी का त्योहार मनाया जा रहा है. इस बार भी यह पर्व उत्साह और प्रेम के साथ मनाया जाएगा.
सैकड़ों साल पुरानी है रावण का पुतला लूटने की परंपरा
विंध्याचल में सैकड़ों सालों से रावण के पुतले को लूटकर ले जाने की परंपरा है. ऐसी मान्यता है कि रावण ब्राह्मण कुल का वंशज था, इसलिए उसका दहन करना उचित नहीं माना जाता है. यही वजह है कि प्रभु श्रीराम रावण को बाण मारकर आगे बढ़ जाते हैं, जिसके बाद स्थानीय लोग पुतले को लूटने के लिए धावा बोल देते हैं. बाण लगते ही लोग पुतले पर टूट पड़ते हैं और जिसे जो हिस्सा हाथ लगता है, वह उसे लेकर चला जाता है. सैकड़ों सालों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन आज भी विंध्याचल के निवासी करते हैं.
क्या है रावण का पुतला लूटने के पीछे की मान्यता?
विंध्यधाम के विद्वान आचार्य पं. अनुपम महाराज ने बताया कि विंध्य क्षेत्र में अमरावती चौराहे के पास विजयदशमी पर रात करीब 10 बजे यह आयोजन होता है. इस दौरान प्रभु श्रीराम का आगमन होता है और वे रावण के पुतले पर बाण मारते हैं. उनके बाण मारने के बाद कुछ ही देर में स्थानीय लोग पुतले को लूटकर ले जाते हैं.
उन्होंने बताया कि सैकड़ों सालों से यह परंपरा चली आ रही है. इसके पीछे विद्वानों का मत है कि रावण ब्राह्मण था. इस वजह से उसके पुतले का दहन करना उचित नहीं माना जाता. ऐसे में उसे नीचा दिखाने और अपमानित करने के लिए पुतले को लूटकर ले जाने की परंपरा शुरू हुई.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…
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Mirzapur-cum-Vindhyachal,Mirzapur,Uttar Pradesh
First Published :
October 20, 2026, 07:03 IST











