नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट को यूं ही रेड बॉल क्रिकेट की सबसे कठिन परीक्षा नहीं कहा जाता. पांच दिनों तक चलने वाले इस लंबे फॉर्मेट में किसी भी टीम का कद सिर्फ जीती गई ट्रॉफी या घरेलू दबदबे से तय नहीं होता. इसका असली पैमाना है समय की कसौटी पर खरी उतरने वाली वह बल्लेबाजी विरासत, जो दशकों तक मैदान पर गढ़ी जाती है. जब बात क्रीज पर घंटों डटे रहकर तिहरे अंक को छूने यानी शतकों की आती है, तो क्रिकेट की दुनिया के इतिहास पर कुछ चुनिंदा देशों का वर्चस्व साफ नजर आता है. 1877 में जब पहला आधिकारिक टेस्ट मुकाबला खेला गया, तब से लेकर आज तक कई टीमों के बल्लेबाजों ने अपनी कलात्मकता, धैर्य और तकनीक से क्रिकेट प्रेमियों को सम्मोहित किया है. हालांकि, टेस्ट इतिहास की शतकीय यात्रा में एक देश ऐसा है जिसने लंबी परंपरा और सबसे ज्यादा मुकाबले खेलने के दम पर शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया हुआ है और वह देश है इंग्लैंड.
टेस्ट क्रिकेट के जनक कहे जाने वाले इंग्लैंड (England Cricket Team) के बल्लेबाजों ने खेल के इस फॉर्मेट में अब तक 945 बार शतकीय पारी खेली है. इतनी बड़ी संख्या का श्रेय न केवल इंग्लैंड के समृद्ध क्रिकेटिंग कल्चर को जाता है, बल्कि इस बात को भी जाता है कि उन्होंने इतिहास में सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं. इंग्लिश बल्लेबाजों की इस स्वर्णिम लिस्ट में फिलहाल सबसे बड़ा नाम मॉडर्न युग के दिग्गज जो रूट का है. जो रूट ने अपनी निरंतरता और बेहतरीन तकनीक के दम पर इंग्लैंड के लिए सर्वाधिक 41 टेस्ट शतक जमाए हैं. वे न सिर्फ अपनी टीम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की रीढ़ हैं, बल्कि मौजूदा दौर में महानता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं.
टेस्ट में सबसे ज्यादा सेंचुरी जड़ने वाली विश्व की पांच टीमें.
ऑस्ट्रेलिया का खौफनाक दबदबा और पोंटिंग का योगदान
इंग्लैंड अगर शतकों के मामले में सबसे आगे है, तो उसका चिर-प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया भी इस रेस में बहुत पीछे नहीं है. कंगारू बल्लेबाजों की आक्रामक और निडर शैली का ही नतीजा है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम 906 टेस्ट शतकों के साथ इस सूची में दूसरे पायदान पर मजबूती से खड़ी है. इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के आंकड़ों के बीच का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है, जो इन दोनों देशों के बीच एशेज जैसी ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता को और रोचक बनाता है. ऑस्ट्रेलिया के शतकीय साम्राज्य की कमान संभाली पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने. पोंटिंग ने अपने करियर में कुल 41 टेस्ट शतक जड़े. उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों ने ही ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के उस दौर को जन्म दिया, जब दुनिया की हर टीम उनसे थर-थर कांपती थी. स्टीव वॉ, डॉन ब्रैडमैन और मैथ्यू हेडन जैसे दिग्गजों ने भी इस 906 के आंकड़े को गढ़ने में अपनी भूमिका निभाई.
भारतीय क्रिकेट की स्वर्णिम यात्रा और सचिन का शिखर
इस ऐतिहासिक तालिका में तीसरे नंबर पर चमकता है भारतीय क्रिकेट का नाम. भारतीय बल्लेबाजों ने टेस्ट प्रारूप में अब तक कुल 570 शतक दर्ज किए हैं. हालांकि इंग्लैंड से भारत का अंतर 375 शतकों का है, लेकिन जिस तरह भारतीय क्रिकेट ने पिछले कुछ दशकों में प्रगति की है, वह इस बात का सबूत है कि उपमहाद्वीप से उठी यह ताकत दुनिया के हर कोने में असरदार साबित हुई है.
भारत के इन 570 शतकों की कहानी में सबसे बड़ा अध्याय ‘क्रिकेट के भगवान’ कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने लिखा है. सचिन ने अपने लंबे करियर में 51 टेस्ट शतक जमाए. यह आंकड़ा न केवल भारत में सबसे ऊपर है, बल्कि पूरे विश्व टेस्ट इतिहास में किसी भी बल्लेबाज द्वारा लगाया गया सबसे ज्यादा शतकों का रिकॉर्ड है.
सचिन के इस अविश्वसनीय आंकड़े के अलावा भारत की इस विरासत को मजबूती देने में सुनील गावस्कर की ठोस नींव, राहुल द्रविड़ की ‘द वॉल’ वाली दृढ़ता, वीरेंद्र सहवाग की बेखौफ आक्रामकता और विराट कोहली के आधुनिक क्लास का बहुत बड़ा योगदान रहा है.
अन्य टीमों की स्थिति
अगर बात बाकी क्रिकेटिंग राष्ट्रों की करें, तो वेस्टइंडीज का नाम भारत के ठीक बाद आता है. विव रिचर्ड्स, ब्रायन लारा और रोहन कन्हाई जैसे दिग्गजों के दम पर कैरेबियाई टीम ने 507 टेस्ट शतक बनाए हैं. वहीं एशियाई सरजमीं की दूसरी बड़ी ताकत पाकिस्तान के नाम 434 शतक दर्ज हैं. दक्षिण अफ्रीका ने भी तेज पिचों पर अपने बल्ले का लोहा मनवाते हुए 410 टेस्ट शतक पूरे किए हैं, जबकि न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के नाम 343 शतक हैं. लिस्ट में इसके बाद श्रीलंका की टीम आती है, जिसके बल्लेबाजों ने अब तक 309 बार तीन अंकों का आंकड़ा छुआ है.










