Sukanta Majumdar On Signature Forgery Case: जाली हस्ताक्षर मामले में पिछले कई दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति एकदम गरमाई हुई है। इस बीच केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले में चल रही आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की जांच से पार्टी के भीतर गहरे तक फैले भ्रष्टाचार और आंतरिक अस्थिरता का पर्दाफाश होगा। इस बीच उन्होंने टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी जमकर प्रहार किया।
टीएमसी के अंदर भ्रष्टाचार और आंतरिक अस्थिरता
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बलुरघाट में पत्रकारों से बात करते हुए मजूमदार ने कहा ‘सीआईडी फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच कर रही है। हस्ताक्षरों की जालसाजी का आरोप तृणमूल कांग्रेस के भीतर से ही आया है, इसलिए स्वाभाविक रूप से जांच होगी।’
आगे उन्होंने कहा ‘”ये दोनों नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे थे। अब जब वे दोनों सीआईडी के सामने पेश होंगे, तो सब कुछ सामने आ जाएगा; सच्चाई उजागर हो जाएगी और तथ्य स्पष्ट हो जाएंगे।’ इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि ‘टीएमसी के भीतर स्थिति अराजक है; हम इस बारे में कुछ भी नहीं कह सकते कि कौन से सांसद कहां खड़े हैं, वे कहां जाएंगे या वे किसे अपना नेता चुनेंगे।’
बागी विधायक-सांसद और जाली हस्ताक्षर
मजूमदार की ये टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट के बीच आई हैं, जहां पश्चिम बंगाल में निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों और लोकसभा में काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी है। सुखेन्दु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश बराइक सहित तीन राज्यसभा सांसदों ने भी राज्यसभा और पार्टी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
दरअसल, यह जांच पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को सोवन्देब चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता (एलओपी) के रूप में नियुक्त करने के लिए प्रस्तुत किए गए एक दस्तावेज पर हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों से संबंधित है।
13 जून को, आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने कोलकाता के अलीपुर इलाके में स्थित एजेंसी के मुख्यालय भबानी भवन में हस्ताक्षर जालसाजी मामले के संबंध में बनर्जी से लगभग 5.5 घंटे तक पूछताछ की।










