दीमक के हमले से खोखली हो रही है फसल? इन दो तरीके से करें जड़ से सफाया

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दीमक के हमले से खोखली हो रही है फसल? इन दो तरीके से करें जड़ से सफाया

Last Updated:May 08, 2026, 09:18 IST

How to Protect Crops from Termites: खेती में दीमक फसलों की जड़ों को खोखला कर भारी नुकसान पहुंचाती है. इसके नियंत्रण के लिए शुष्क मिट्टी में सिंचाई के साथ 3 लीटर क्लोरोपायरीफॉस का प्रयोग करें. जैविक उपचार के लिए 3 किलो बेवेरिया बेसियाना को गोबर की खाद में मिलाकर मिट्टी में डालें. समय पर उपचार और गहरी जुताई फसल सुरक्षा के लिए जरूरी है.

खेती-किसानी में दीमक एक ऐसी समस्या है जो फसलों की जड़ों को अंदर ही अंदर खोखला कर देती है. दीमक विशेष रूप से उन पौधों को नुकसान पहुंचाती है. जिनमें सेल्यूलोज की मात्रा अधिक होती है. यह अंधेरे और शुष्क स्थानों में पनपती है. जिससे मिट्टी के नीचे छिपी इसकी मौजूदगी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. दीमक को जड़ से खत्म करने के लिए रासायनिक और जैविक, दोनों ही तरीके प्रभावी रहते है. लेकिन अगर समय से ध्यान ना दिया जाए तो फसल को ज्यादा नुकसान हो सकता है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि दीमक के नियंत्रण के लिए सबसे पहले मिट्टी की स्थिति को समझना जरूरी है. उन्होंने बताया कि जहां शुष्कता अधिक होती है. वहां दीमक का हमला तेज होता है. रासायनिक उपचार में क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी (Chlorpyrifos 20 EC) का उपयोग कर सकते है. इसकी 2 से 3 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ मिलाकर प्रयोग करनी चाहिए. जैविक उपचार के लिए बेवेरिया बेसियाना (Beauveria bassiana) भी रोकथाम के लिए प्रभावी होता है. यह फफूंद दीमक के शरीर के संपर्क में आते ही उसे संक्रमित कर देती है और धीरे-धीरे पूरे दीमक परिवार को नष्ट कर देती है.

दीमक की प्रकृति और फसलों पर प्रभाव
दीमक मुख्य रूप से सेल्यूलोज युक्त पौधों और सामग्री को अपना आहार बनाती है. इसे अंधेरा और शुष्क वातावरण पसंद है, यही कारण है कि यह जमीन के नीचे सक्रिय रहती है. जब खेतों में नमी की कमी होती है, तो दीमक का प्रकोप तेजी से बढ़ता है. यह पौधों की जड़ों को काट देती है, जिससे पौधे सूखने लगते हैं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

रासायनिक नियंत्रण की विधि
दीमक के तत्काल नियंत्रण के लिए रासायनिक विधि काफी प्रभावी है. किसान खेत में ‘फ्लड इरिगेशन’ यानी भरपूर पानी के साथ क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी का प्रयोग करना चाहिए. प्रति हेक्टेयर लगभग 5-6 इंच पानी के साथ 3 लीटर दवा का घोल बनाकर डालने से जमीन के भीतर छिपे दीमक के झुंड पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं और फसल सुरक्षित रहती है.

जैविक उपचार: बेवेरिया बेसियाना का प्रयोग
जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए बेवेरिया बेसियाना किसी वरदान से कम नहीं है. 3 किलोग्राम बेवेरिया बेसियाना को 75 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर 10 दिनों तक कल्चर तैयार करें. इस दौरान हर दिन पानी का हल्का छिड़काव करते रहें. 10वें दिन, इस मिश्रण को खेत की गहरी जुताई के समय मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें.

बचाव और भविष्य की सावधानी
दीमक नियंत्रण के लिए गहरी जुताई भी जरूरी है. फसल बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई करें और जैविक कल्चर का प्रयोग करें. इससे न केवल मौजूदा दीमक खत्म होती है, बल्कि भविष्य में भी इसके पनपने की संभावना कम हो जाती है. यह वैज्ञानिक तरीका लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता और फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें

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