नई दिल्ली: जसपाल राणा की अचानक हुई मौत ने इंडियन शूटिंग वर्ल्ड को हिला दिया. उनके जाने से वो सिस्टम भी चला गया, जिसने भारत को शूटिंग में ‘मेडल मशीन’ बना दिया था. जसपाल राणा उन शुरुआती चेहरों में से एक थे, जिन्होंने वर्ल्ड शूटिंग के नक्शे में भारत को नई पहचान दिलाई. वह जब तक खेले शेर की तरह खेले.
कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल नौ गोल्ड मेडल
महज 12 साल की उम्र में पहला नेशनल गोल्ड मेडल जीता. चार कॉमनवेल्थ गेम्स में नौ गोल्ड समेत 15 मेडल जीते. मगर अफसोस कि आज वह हमारे बीच नहीं रहे. महज 49 साल की उम्र में 12 जून की अलसुबह राणा ने चुपचाप दुनिया को अलविदा कह दिया. वह लंबे समय से दिल की बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन इस बार ऐसे सोए कि अब कभी नहीं उठेंगे. अस्पताल सूत्रों ने बताया:
सीने में दर्द होने के बाद जसपाल राणा को एक जून को साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी धमनियों में रुकावट पाई गई. शुक्रवार तड़के उनका निधन हो गया. राणा हाल में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल की वापसी की उड़ान के दौरान बीमार पड़ गए थे और उन्हें एक चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था. नई दिल्ली में उतरते ही उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें स्टेंट डाले गए थे. शुरुआती रिपोर्टों में उनकी हालत स्थिर बताई गई थी, लेकिन बाद में बिगड़ गई.
Dronacharya Jaspal Rana and his daughter @realmanubhaker after the Paris Olympics campaign ended.
I am posting this video for the first time.
It’s almost like the Guru is eternal. Omnipresent.
कॉमनवेल्थ के हीरो, लेकिन ओलंपिक मेडल रह गया सपना
1994 के राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में 25 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतना उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बड़ी सफलता थी. दरअसल, एशियाई खेलों का उनका स्वर्ण पदक राजा रणधीर सिंह के 1978 में सोने का तमगा जीतने के 16 साल बाद भारत का पहला स्वर्ण पदक था. रणधीर सिंह का हाल ही में वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से जूझने के बाद निधन हो गया था. एक निशानेबाज के रूप में राणा के करियर का सबसे बड़ा क्षण 2006 के दोहा एशियाई खेलों में आया जब उन्होंने तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता, जिसमें उस समय के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करना भी शामिल था.
#WATCH | Delhi: The body of Jaspal Rana, shooter and coach of Double Olympics medalist Manu Bhaker, who passed away at Max Saket Hospital this morning, brought at his residence in Sainik Farm. pic.twitter.com/k0O28og9E9
शूटिंग स्टार और कोचिंग मेगास्टार साबित हुए राणा
अपने मुंहफट और बेबाक स्वभाव के लिए इंडियन शूटिंग में विद्रोही माने जाने वाले जसपाल राणा ने जब मैदान छोड़ा तो कई लोग समझने लगे कि उनकी कहानी खत्म हो गई, लेकिन असली कहानी तो उसके बाद शुरू हुई, बतौर कोच. वह 2012 से जूनियर पिस्टल कोच थे और उनकी देखरेख में ही सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे निशानेबाज उभर कर सामने आए थे, उन्होंने जूनियर स्तर पर अभूतपूर्व कार्य करके कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी तैयार किए. एनआरएआई ने पिछले साल फरवरी में उन्हें आधिकारिक तौर पर 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच बनाया था. मनु भाकर अगर पेरिस ओलंपिक 2024 में दो ब्रॉन्ड मेडल जीत पाई तो उसमें जसपाल राणा का बड़ा रोल था. मनु भाकर, राणा को हमेशा अपने पिता की तरह माना.
जसपाल राणा और मनु भाकर
अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए राणा
जसपाल राणा के परिवार में उनकी पत्नी रीना राणा, बेटी देवांशी, बेटा युवराज, पिता नारायण सिंह राणा और उनकी बहन सुषमा सिंह और छोटा भाई सुभाष राणा शामिल हैं.











