अयोध्या के पूर्वी गेट मऊ के तमसा नदी के रामघाट व दोहरीघाट पर विश्राम किये थे भगवान राम

Last Updated:May 08, 2026, 16:42 IST

Mau news: मऊ जनपद तमसा तट के किनारे बसा हुआ है. इस नदी की कहानी भगवान राम से जुड़ी हुई है. इस मऊ जनपद को अयोध्या का पूर्वी गेट माना जाता है. कहा जाता है कि राम वनवास के दौरान मऊ में समय अधिक बिताए है और तमसा तट के किनारे ऋषि मुनियों से जाकर मिले थे. लोकल 18 से बात करते हुए पंडित शशांक त्रिपाठी बताते हैं कि मान्यता है इस तट पर कभी श्री राम आए थे और यहीं विश्राम किए थे.

मऊः उत्तर प्रदेश का मऊ जनपद तमसा तट के किनारे बसा हुआ है. इस नदी की कहानी भगवान राम से जुड़ी हुई है. इस मऊ जनपद को अयोध्या का पूर्वी गेट माना जाता है. कहा जाता है कि राम वनवास के दौरान मऊ में समय अधिक बिताए है और तमसा तट के किनारे ऋषि मुनियों से जाकर मिले थे. लोकल 18 से बात करते हुए पंडित शशांक त्रिपाठी बताते हैं कि मान्यता है इस तट पर कभी श्री राम आए थे और यहीं विश्राम किए थे.

इस वजह से यह स्थान काफी खास माना जाता है. वनवास के दौरान राम मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना तमसा तट पर आए थे. यहां विश्राम करने के बाद देवर्षि देवलास जाकर वहां तपस्वी देवल मुनि से जाकर मिले थे. वहां मिलने के बाद बेलौली गए और वह दोहरीघाट में सरयू से मिले थे. देवल मुनि बहुत ही तपस्वी थे, जिन्हें ज्ञान में नारद की उपाधि प्राप्त थी. हिंदू सभ्यता के प्रखर महर्षि ऋषि थे, जब हिंदुओं का अस्तित्व समाप्त हो रहा था तो उन्होंने हिंदुओं को बचाने के लिए पुरजोर कार्य किया था.

वनवास का समय भी तमसा के किनारे बिताये

जिस स्थान पर देवर्षि देवल मुनि से जाकर मिले थे वह पूरे भारत में प्रसिद्ध स्थान है, क्योंकि वहां सूर्य मंदिर है. इस मंदिर को आस्था का प्रतीक भी कहा जाता है. लोग कहते हैं कि मऊ जनपद में कई स्थानों पर प्रभु श्री रामचंद्र जी गए हैं. जिसमे वनदेवी मंदिर भी शामिल है. वनदेवी वह स्थान है जहां महर्षि वाल्मीकी का आश्रम था और सीता जी जाकर किसी आश्रम में रहती थी. यही लव कुश का जन्म हुआ है. हालांकि वनवास के दौरान श्री राम का अधिक समय चित्रकूट में बिता लेकिन सीता की खोज करने जब निकले तो अंतिम पड़ाव में वह मऊ में काफी समय बिताए कई स्थानों पर वह गए. इस वजह से मऊ जनपद को श्री राम से जुड़ती हुई कहानी मानी जाती है.

दो घाटों पर लगता है मेला

हालांकि मऊ जनपद में जिस स्थान पर पहले श्री राम आकर रुके थे आज उस तमसा के किनारे बने घाट को रामघाट के नाम से जाना जाता है. जहां प्राचीन शिव मंदिर है. यहां दो घाट है एक रामघाट और दूसरा रघुवीर घाट, दोनों घाटों का विशेष महत्व है. यहां प्रत्येक देव दीपावली और डाला छठ पर भव्य मेले का आयोजन होता है और लोग हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा पाठ करते हैं. इस वजह से मऊ में तमसा तट और श्रीराम से जुड़ी कहानी मानी जाती है और काफी प्रसिद्ध मानी जाती है यही वजह है कि मऊ में लोग तमाशा तट को बड़ा महत्व देते हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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