लखनऊ : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हैं और समाजवादी पार्टी ने भी अपनी पूरी ताकत चुनावी मैदान में झोंक दी है. पार्टी किसी भी मोर्चे पर चूक नहीं करना चाहती. सूत्रों के मुताबिक, इसी बीच अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की मुलाकात ने यूपी की सियासत में नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं. हालांकि, दोनों दलों की तरफ से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक बात नहीं कही गई है. इसके बावजूद कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है.
दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी INDIA ब्लॉक का हिस्सा थी. लेकिन हरियाणा विधानसभा चुनाव में सीटों पर तालमेल नहीं बन पाया और इसके बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए. दिल्ली विधानसभा चुनाव में तो AAP और कांग्रेस ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा. इसका फायदा सीधे तौर पर बीजेपी को मिला और दोनों दलों को नुकसान उठाना पड़ा.
दिल्ली चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने आम आदमी पार्टी के समर्थन में प्रचार भी किया था. ऐसे में संजय सिंह और अखिलेश यादव की हालिया मुलाकात को उसी पुराने तालमेल की कड़ी के तौर पर भी देखा जा रहा है. यही वजह है कि कांग्रेस के लिए इस मुलाकात ने कुछ असमंजस जरूर पैदा किया है.
कांग्रेस की असली चिंता यूपी नहीं, पंजाब
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की चिंता सिर्फ उत्तर प्रदेश को लेकर नहीं है. उसकी बड़ी परेशानी पंजाब को लेकर है. पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है. दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ पूरी ताकत से चुनाव लड़ रही हैं. खास बात यह है कि पंजाब में भी विधानसभा चुनाव लगभग उसी समय होने हैं, जब उत्तर प्रदेश में चुनाव होंगे.
ऐसे में कांग्रेस नहीं चाहती कि एक राज्य में आम आदमी पार्टी के साथ नजदीकी दिखे और दूसरे राज्य में दोनों दल आमने-सामने चुनाव लड़ें. दिल्ली चुनाव के बाद तो कांग्रेस और AAP के बीच रिश्ते और भी तल्ख हो गए थे. दोनों दल एक-दूसरे पर बीजेपी की ‘बी टीम’ होने का आरोप लगाते रहे हैं.
कांग्रेस का आरोप रहा है कि आम आदमी पार्टी उन राज्यों में चुनाव लड़कर विपक्षी वोटों का बंटवारा करती है, जहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच होता है. ऐसे में अगर यूपी में सपा और AAP के बीच कोई तालमेल बनता है तो कांग्रेस के लिए यह सियासी तौर पर असहज स्थिति हो सकती है.
कांग्रेस को सपा पर भरोसा
हालांकि, कांग्रेस को उम्मीद है कि अखिलेश यादव यूपी में उसे नजरअंदाज नहीं करेंगे. कांग्रेस के सूत्रों का मानना है कि सपा और कांग्रेस के बीच बीजेपी को हराने के लिए गठबंधन की जरूरत है. वहीं, यूपी में आम आदमी पार्टी की सियासी पकड़ भी सीमित है. कांग्रेस यह भी मानकर चल रही है कि जिस तरह सपा लगातार AIMIM को बीजेपी की ‘बी टीम’ बताती रही है, उसी तरह अखिलेश यादव आम आदमी पार्टी को भी यूपी में गठबंधन से दूर रख सकते हैं.
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरी थीं. उस चुनाव में आम आदमी पार्टी को यूपी में कोई खास सफलता नहीं मिली थी. ऐसे में कांग्रेस को भरोसा है कि सपा बीजेपी के खिलाफ मजबूत लड़ाई के लिए उसके साथ ही आगे बढ़ेगी.











