पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद पार्टी में अंदरूनी असंतोष साफ नजर आ रहा है। बुधवार को ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली लोकसभा सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा ममता बनर्जी के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
काकोली घोष पिछले कई दशकों से TMC से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने 1976 से पार्टी के साथ अपना जुड़ाव बताया है। 1984 में उनका सक्रिय राजनीतिक सफर शुरू हुआ था। हाल ही में उन्हें लोकसभा में TMC की चीफ व्हिप की जिम्मेदारी से हटा दिया गया था। उनकी जगह कल्याण बनर्जी को यह पद सौंपा गया। इस फैसले से काकोली काफी नाराज थीं।
इस घटना के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह पार्टी छोड़ सकती हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा था,
“1976 से जुड़ाव, 1984 में सफर शुरू हुआ। आज मुझे चार दशकों की वफादारी का इनाम मिला है।”
बैठक में शामिल होने के बाद इस्तीफा
मंगलवार को काकोली घोष छह अन्य TMC विधायकों के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुईं। बैठक में बारासात की सांसद काकोली के अलावा देगंगा, स्वरूपनगर, हारोआ और बसीरहाट क्षेत्र के विधायक भी मौजूद थे।
इससे पहले उन्होंने TMC के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने पार्टी की कुछ आंतरिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए थे।
बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में असंतोष बढ़ता जा रहा है। BJP सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि करीब 50 विधायक और 20 सांसद पार्टी से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि अगर BJP का केंद्रीय नेतृत्व हरी झंडी दे तो ये नेता TMC छोड़कर BJP में शामिल हो सकते हैं। काकोली घोष का इस्तीफा इसी आंतरिक कलह का हिस्सा माना जा रहा है।










