Last Updated:July 02, 2026, 16:43 IST
Sultanpur News: उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर सिर्फ पौराणिक ही नहीं, बल्कि आज़ादी के आंदोलन के इतिहास में भी एक बेहद खास मुकाम रखता है. यह वही ऐतिहासिक धरती है जहां समाजवाद के जनक डॉ. राम मनोहर लोहिया ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी थीं. साल 1940 में सुल्तानपुर के रूपईपुर गांव में दिए उनके एक जोशीले भाषण ने ऐसी आग सुलगाई कि अंग्रेजी हुकूमत कांप उठी और उन्हें गिरफ्तार कर हथकड़ी पहना दी गई. आइए जानते हैं डॉ. लोहिया की सुल्तानपुर से गिरफ्तारी और उस ऐतिहासिक मुकदमे की पूरी कहानी, जिसके गवाह आज भी इस जिले में मौजूद हैं.
Sultanpur News: उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां पर ऐसी महान हस्तियों का पदार्पण हुआ, जिन्होंने सुल्तानपुर के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया. उन्हीं में से एक थे डॉ. राम मनोहर लोहिया, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दरमियान सुल्तानपुर में अपने कदम रखे थे और उन्हें सुल्तानपुर में ब्रिटिश हुकूमत द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था. उन्होंने सुल्तानपुर के रूपईपुर गांव में एक जोशीला भाषण दिया था. जिस गांव में उन्होंने भाषण दिया और जिसके बाद वे गिरफ्तार किए गए, वहां आज भी पुराने स्कूल और इमारतें मौजूद हैं. तो आइए आज हम जानते हैं डॉ. राम मनोहर लोहिया की सुल्तानपुर से गिरफ्तारी का पूरा किस्सा.
रूपईपुर गांव में ब्रिटिश सत्ता को दी थी चुनौती
वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह बताते हैं कि देश के प्रमुख वक्ता और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. राम मनोहर लोहिया का पदार्पण उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुआ था. साल 1940 में डॉ. राम मनोहर लोहिया सुल्तानपुर जिले के रूपईपुर गांव में आए हुए थे. यहां पर उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ एक बड़ी जनसभा की थी, जिसमें हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे. बता दें कि रूपईपुर गांव सुल्तानपुर के दोस्तपुर इलाके के अंतर्गत आता है. यहां डॉ. राम मनोहर लोहिया ने ब्रिटिश सत्ता को ललकारा था. डॉ. राम मनोहर लोहिया का भाषण कुछ ऐसा था कि उसका प्रभाव दूर-दूर तक लोगों पर पड़ा और व्यक्तिगत सत्याग्रह में भाग लेने के लिए लोगों की लंबी लाइन लग गई.
जब सुल्तानपुर बना आज़ादी के आंदोलन का प्रमुख केंद्र
यह वह दौर था जब सुल्तानपुर जिले में बाबू गणपत सहाय, देवकली दीन, सुंदरलाल गुप्ता, संगम लाल, नाजिम अली और रमाकांत सिंह समेत कई नेताओं ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आज़ादी का बिगुल फूंक दिया था. इस समय महात्मा गांधी के नेतृत्व में समूचे भारत में एक राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत हो चुकी थी. साल 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया और अंग्रेजी हुकूमत ने बगैर कांग्रेस मंत्रिमंडलों से पूछे भारत को भी युद्ध में सहयोगी होने की घोषणा कर दी.
इसके विरोध में सभी प्रांतों की अंतरिम कांग्रेस सरकारों ने इस्तीफा दे दिया. देश में जनआंदोलन की शुरुआत हो गई और अवध सूबे का सुल्तानपुर इसका एक प्रमुख केंद्र बना. उस समय कांग्रेस के युवा नेता व समाजवाद के जनक कहे जाने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया ने यहाँ पर डेरा डाल दिया. नौजवानों की अगुवाई करते हुए वे उनमें नया जोश भरने लगे.
हथकड़ी में कचहरी तक का सफर और 2 साल की जेल
इस गांव में भाषण देने के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया तत्काल इलाहाबाद (प्रयागराज) निकल गए, जहां पर उन्हें अंग्रेज सिपाहियों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद उन्हें सुल्तानपुर लाया गया और कोतवाली में बंद कर दिया गया. इतिहासकार तो यह भी बताते हैं कि डॉ. राम मनोहर लोहिया को कोतवाली से कचहरी तक हथकड़ी पहनाकर पैदल ले जाया गया था. सुल्तानपुर की अदालत में उनके खिलाफ मुकदमा चला. अंत में, 1 जुलाई 1940 को अदालत ने उन्हें दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…
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