‘IPS चला रहे जमींदारी…ये काले अंग्रेज’, UP पुलिस के सिपाही का वीडियो वायरल

Last Updated:May 07, 2026, 16:53 IST

UP Police News : लखनऊ पुलिस लाइन में ड्यूटी लगवाने के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगा है. आरोप लगाने वाला यूपी पुलिस का सिपाही है. उसका आरोप है कि यूपी की हर पुलिस लाइन में वसूली नेटवर्क चल रहा है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर सुनील शुक्ला नामक सिपाही ने अपना वीडियो जारी किया है. सिपाही ने आईपीएस अफसरों को काला अंग्रेज बताते हुए वसूली का हिस्सेदार बताया. पुलिस कमिश्नर ने वीडियो और मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस लाइन के आरआई और गणना प्रभारी के जरिए वसूली के नेटवर्क चल रहा है.

लखनऊ. यूपी पुलिस के अफसरों पर बड़ा आरोप लगा. आरोप लगाने वाला उनके ही महकमे से है. लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात सिपाही ने इससे संबंधित अपना वीडियो सोशल मीडिया पर डाला है, जो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें वह कहता है, ‘मेरा नाम सुनील कुमार शुक्ला है. मैं उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हूं. मेरी वर्तमान नियुक्ति लखनऊ कमिश्नरेट के रिजर्व पुलिस लाइन में है. मैं लखनऊ कमिश्नरेट और उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में इन काले अंग्रेज अर्थात आईपीएस अधिकारियों द्वारा चलाई जा रही भ्रष्टाचार रूपी जमींदारी व्यवस्था पर इस प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं. लखनऊ कमिश्नरेट के रिजर्व पुलिस लाइन में अर्थात आपकी नाक के नीचे इन काले अंग्रेज (आईपीएस अधिकारियों द्वारा) लूट की जमींदारी व्यवस्था चलाई जा रही है, जिनमें आपके द्वारा नियुक्त सिपाही दीवान बेचारा लूटा जा रहा है. ये व्यवस्था इतनी सुनियोजित सुव्यवस्थित ढंग से चलाई जाती है, जिस पर मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं.’

वीडियो और मामले की जांच के आदेश

वसूली के लिए कई पद
सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस लाइन के आरआई और गणना प्रभारी के जरिए वसूली के नेटवर्क चल रहा है. पुलिस लाइन में तैनात सिपाही ने खुद को वसूली का पीड़ित बताया. सुनील शुक्ला के मुताबिक, आरआई को आईपीएस नियुक्त करता है. आरआई वसूली के लिए एक गणना प्रभारी को नियुक्त करता है. गणना प्रभारी अपनी सुविधा के लिए एक गारद कमांडर नियुक्त करता है. ड्यूटी लगाने के लिए सिपाही और दीवान को रकम देनी पड़ती है. गारद कमांडर के जरिए ही वसूली की रकम ऊपर तक पहुंचती है. दो हजार रुपए प्रतिमाह प्रति व्यक्ति गारद कमांडर को देना पड़ता है. गारद कमांडर भी दो हजार रुपए देने पड़ते हैं. गारद कमांडर पूरी पुलिस लाइन से वसूली करके आरआई को देता है.

‘अब मुख्यमंत्री से ही उम्मीद’
वसूली की रकम आईपीएस को सौंपने का भी आरोप है. सुनील ने कहा, ‘लखनऊ की गणना “डी” में 110 से 120 गारद हैं, जिनमें 500 से 550 सिपाही, दीवान हैं. इनमें से करीब 400 लोगों को ड्यूटी मिलती है. ड्यूटी के लिए प्रति व्यक्ति को प्रति माह 2 हजार देने पड़ते हैं. 400 से 2 हजार का गुणा करें तो आठ लाख रुपए की वसूली सिर्फ एक गणना से हो रही है. लखनऊ पुलिस लाइन में कुल चार गणना हैं.’ सुनील ने आगे कहा, ‘मुख्यमंत्री जी, आप एक अच्छे व्यक्ति हैं और हमारे साथ न्याय करेंगे. मैं अपने पूरे पुलिस परिवार के व्यक्तियों से भाइयों-बहनों से ये कहना चाहता हूं कि मेरी बात को इतनी दूर तक पहुंचाइए कि ये सोये हुए व्यक्ति उठ जाएं. न्याय करने के लिए ये मजबूर हो जाएं. जयहिंद वंदे मातरम.’

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें

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