ब्रैडमैन को पहले टेस्ट के बाद कर दिया था ड्रॉप, एडीलेड में क्या हुआ था?

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ब्रैडमैन को पहले टेस्ट के बाद कर दिया था ड्रॉप, एडीलेड में क्या हुआ था?

Last Updated:September 03, 2026, 13:20 IST

don bradman debut story: डॉन ब्रैडमैन के करियर का अंत ओवल के मैदान पर एक भावुक ‘शून्य’ (0) के साथ हुआ था, उसकी शुरुआत भी उतनी ही अजीब और संघर्षपूर्ण थी. साल 1928 में जब इस 20 साल के दुबले-पतले लड़के ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया की बैगी ग्रीन कैप पहनी, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इतिहास को हमेशा के लिए बदलने जा रहा है. उनके डेब्यू मैच की नाकामी इस बात का सबूत है कि महानता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि वह असफलताओं की भट्टी में तपकर निखरती है

खराब प्रदर्शमन की वजह से डॉन ब्रैडमैन को कर दिया था डेब्यू टेस्ट के बाद ड्रॉप

नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर जब भी महानता का जिक्र होता है, तो सर डोनाल्ड जॉर्ज ब्रैडमैन का नाम सबसे शीर्ष पर आता है. उनका 99.94 का टेस्ट औसत एक ऐसी दीवार है जिसे आज तक दुनिया का कोई भी बल्लेबाज छू तक नहीं सका लेकिन नियति की कहानी हमेशा पहली ही गेंद से साफ नहीं होती.

डॉन ब्रैडमैन के करियर का अंत ओवल के मैदान पर एक भावुक ‘शून्य’ (0) के साथ हुआ था, उसकी शुरुआत भी उतनी ही अजीब और संघर्षपूर्ण थी. साल 1928 में जब इस 20 साल के दुबले-पतले लड़के ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया की बैगी ग्रीन कैप पहनी, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इतिहास को हमेशा के लिए बदलने जा रहा है. उनके डेब्यू मैच की नाकामी इस बात का सबूत है कि महानता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि वह असफलताओं की भट्टी में तपकर निखरती है.

जब ब्रिस्बेन की पिच पर डगमगाए कदम

बात 30 नवंबर 1928 की है, जब इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी. ब्रिस्बेन के एक्जीबिशन ग्राउंड पर खेले गए इस पहले टेस्ट मैच में डॉन ब्रैडमैन ने अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया. पहली पारी में नंबर 7 पर बल्लेबाजी करने उतरे ब्रैडमैन इंग्लैंड की कलाई के स्पिनर जैक वाइट और तेज गेंदबाज मॉरिस टेट के सामने असहज नजर आए. वह केवल 18 रन बनाकर आउट हो गए. दूसरी पारी में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम एक विशाल लक्ष्य का पीछा कर रही थी, तो ब्रैडमैन को नंबर 6 पर भेजा गया लेकिन इस बार तो कहानी और भी खराब रही. वह महज 1 रन बनाकर चलते बने. पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम दूसरी पारी में सिर्फ 66 रनों पर ढेर हो गई और इंग्लैंड ने यह मैच 675 रनों के विशाल अंतर से जीत लिया जो आज भी रनों के लिहाज से टेस्ट इतिहास की सबसे बड़ी हार है.

टीम से बाहर होने का दंश और तंज का जवाब

इस बेहद खराब प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं ने ब्रैडमैन को दूसरे टेस्ट मैच की प्लेइंग इलेवन से बाहर का रास्ता दिखा दिया. उन्हें 12वें खिलाड़ी (सब्स्टीट्यूट) के रूप में बाउंड्री पर फील्डिंग करनी पड़ी। कहा जाता है कि डेब्यू मैच के दौरान इंग्लिश गेंदबाज मॉरिस टेट ने ब्रैडमैन को आउट करने के बाद मजाक में कहा था कि “मैंने अपना खरगोश ढूंढ लिया है”. ब्रैडमैन ने यह बात सुन ली थी और उन्होंने इसे अपनी प्रेरणा बना लिया.

मेलबर्न में लीजेंड का उदय

चोटिल खिलाड़ियों की वजह से ब्रैडमैन की तीसरे टेस्ट (मेलबर्न) में वापसी हुई. इस बार ‘द डॉन’ एक बदले हुए इंसान थे. उन्होंने पहली पारी में शानदार 79 रन बनाए और दूसरी पारी में धैर्य की नई मिसाल पेश करते हुए 112 रनों की शतकीय पारी खेली. यह उनके करियर का पहला टेस्ट शतक था हालांकि ऑस्ट्रेलिया यह मैच भी हार गया, लेकिन दुनिया को समझ आ गया था कि क्रिकेट के क्षितिज पर एक नए सूरज का उदय हो चुका है. डॉन ब्रैडमैन का डेब्यू हमें सिखाता है कि असफल शुरुआत किसी के भविष्य का फैसला नहीं कर सकती. पहली पारी के 18 रन से लेकर करियर के आखिरी शून्य तक, ब्रैडमैन का सफर क्रिकेट इतिहास की सबसे खूबसूरत दास्तां है.

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Rajeev MishraAssociate editor

राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …

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New Delhi,Delhi

First Published :

September 03, 2026, 13:20 IST

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dainikupeditor@gmail.com

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