पहली पारी में 9 विकेट फिर दूसरी पारी में 5 शिकार, 14 विकेट के बाद भी ड्रॉप
Last Updated:September 04, 2026, 17:09 IST
best bowing record: कानपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 14 विकेट लेने वाले जसुभाई पटेल का नाम इतिहास के पन्नों से कभी ओझल नहीं होगा. यह भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन चुनिंदा ‘शांत चमत्कारों’ में से एक है, जिसने खेल की दिशा और दशा को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया
एक टेस्ट में 14 विकेट लेने वाले जसु पटेल भारत के लिए खेल पाए सिर्फ 7 टेस्ट
नई दिल्ली. क्रिकेट जगत में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ रिकॉर्ड बुक तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे एक महाकाव्य की तरह पीढ़ियों को प्रेरित करती है. दिसंबर 1959 में कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम की गीली और नमी से भरी पिच पर भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक ऐसा पन्ना लिखा गया, जिसने भारत-ऑस्ट्रेलिया प्रतिद्वंद्विता की बुनियाद को हमेशा के लिए बदल दिया. . जसुभाई मोतीभाई पटेल नाम के एक 35 वर्षीय ऑफ-स्पिनर की यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्हें आखिरी क्षणों में टीम में शामिल किया गया था और उन्होंने अपने जादुई स्पेल से अपराजेय मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के घमंड को चकनाचूर कर दिया.
उस दौर में ऑस्ट्रेलियाई टीम दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में से एक थी और भारतीय क्रिकेट टीम उनके सामने लगातार संघर्ष कर रही थी. दिल्ली में खेला गया पहला टेस्ट मैच भारत बुरी तरह हार चुका था और कानपुर में भी इतिहास खुद को दोहराता हुआ नजर आ रहा था. खेल के पंडित और प्रशंसक मान चुके थे कि एक और परिचित नतीजा सामने आने वाला है. भारत गहरे दबाव में था, लेकिन कप्तान जीएस रामचंद को अचानक याद आई अपने एक गुप्त हथियार की जिसका नाम था जसुभाई पटेल.
पारी में 9 विकेट और इतिहास का जन्म
जब ऑस्ट्रेलियाई टीम अपनी पहली पारी खेलने उतरी, तब कानपुर की उस पिच पर जसुभाई पटेल ने अपनी फिरकी का ऐसा जाल बुना कि मेहमान बल्लेबाज एक-एक कर उसमें फंसते चले गए। पटेल ने पहली पारी में 69 रन देकर 9 विकेट झटके. यह उस समय किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा किया गया सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन था. पटेल की घूमती गेंदों के सामने ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज लाचार नजर आए. पटेल यहीं नहीं रुके और उन्होंने दूसरी पारी में भी अपनी धारदार गेंदबाजी जारी रखी और 5 विकेट चटकाए. पूरे मैच में 14 विकेट लेकर उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी. इस अविश्वसनीय प्रदर्शन की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी पहली ऐतिहासिक टेस्ट जीत दर्ज की.
अनिल कुंबले से पहले का सबसे महान स्पेल
क्रिकेट इतिहासकार मानते हैं कि अनिल कुंबले द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली में लिए गए ‘परफेक्ट 10’ से पहले, यह भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे महान गेंदबाजी स्पेल था. यह मैच सिर्फ एक जीत नहीं था, बल्कि इसने भारतीय टीम के भीतर यह विश्वास जगाया कि वे दुनिया की किसी भी ताकतवर टीम को हरा सकते है. आज भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जो बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जैसी कड़ी प्रतिद्वंद्विता देखने को मिलती है, उसका सबसे पहला महान भारतीय क्षण यही मैच था.
एक शांत विदाई
इस ऐतिहासिक जीत के नायक जसुभाई पटेल का करियर इसके बाद लंबा नहीं चला. उन्होंने इसके बाद केवल दो और टेस्ट मैच खेले और फिर कभी उन्हें टीम में वापस नहीं बुलाया गया. भले ही चयनकर्ताओं ने उन्हें दोबारा मौका न दिया हो, लेकिन कानपुर के ग्रीन पार्क ने यह सुनिश्चित कर दिया था कि जसुभाई पटेल का नाम इतिहास के पन्नों से कभी ओझल नहीं होगा. यह भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन चुनिंदा ‘शांत चमत्कारों’ में से एक है, जिसने खेल की दिशा और दशा को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया. जसुभाई पटेल भले ही गुमनामी में चले गए, लेकिन उनकी फिरकी का वह जादू आज भी हर सच्चे क्रिकेट प्रेमी के दिल में जिंदा है.
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Rajeev MishraAssociate editor
राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …
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New Delhi,Delhi
First Published :
September 04, 2026, 17:07 IST











