गन्ने के खेत, तेंदुए का खौफ… पढ़िए बिजनौर की आंखों देखी ग्राउंड रिपोर्ट

बिजनौर : उत्तर प्रदेश के बिजनौर में दो तेंदुओं की आहट ने गांव वालों की चैन की नींद उड़ा दी है. रात हो या दिन हर वक्त स्थानीय निवासियों को अनजानी आहट से डर लगता है. बिजनौर के हालात को देखते हुए वन विभाग की टीम हर इलाके में सर्चिंग करने निकलती है. पेट्रोलिंग के दौरान टीम के लोग सड़क पर चलते हुए लोगों को भी सावधान करते हैं. न्यूज 18 इंडिया की टीम ने रात को चौकसी की पड़ताल करने के लिए फॉरेस्ट ऑफिस के अधिकारियों से संपर्क किया और उन्होंने हमें बताया कि वह रोजाना रात को उन सभी पॉइंट्स पर जाते हैं, जहां पर तेंदुए की आहट या मूवमेंट होती है. हमें फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने कई ऐसी जानकारियां दी, जिसमें उन्होंने बताया कि कहीं से भी गांव वासी उन्हें फोन पर जानकारी देते हैं तो तुरंत ही टीम को वहां रवाना किया जाता है.

खेतों में छिप जाते हैं तेंदुए

रात के अंधेरे में या दिन के उजाले में खेतों के बीचोंबीच तेंदुए छिप जाते हैं. उन्हें तलाशने के लिए थर्मल ड्रोन का सहारा लिया जा रहा है. इसके जरिए कोई भी जीव या फिर ह्यूमन बॉडी इस थर्मल ड्रोन के जरिए पकड़ में आ जाती है. न्यूज़ 18 इंडिया की टीम के सामने वन विभाग की टीम ने थर्मल ड्रोन के जरिए खेतों के ऊपर से सर्चिंग भी की. वही गांव वालों की तादाद भी रात के अंधेरे में निकलने के लिए ज्यादा थी क्योंकि बाइक सवार लोग आ जा रहे थे, जिन्हें फॉरेस्ट डिपार्मेंट मना भी कर रहा था कि वह अंधेरे में ना निकले.

यह रणनीति अपना रहा प्रशासन

गांव वालों को तेंदुए से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन ने कई तरह की रणनीति पर काम किया है. लोगों को लगातार सावधान रहने के लिए कई तरह की जानकारियां दी गई हैं. स्थानी लोगों के बीच फॉरेस्ट विभाग ने कुछ ऐसे व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाए हैं, जिनमें लोगों के संपर्क में रहकर फॉरेस्ट विभाग उन्हें हर जानकारी देता है.

106 से ज्यादा पिंजरे लगाए गए

अधिकारियों ने बताया कि हर गांव में उनकी गाड़ी अनाउंस करते हुए जाती है ताकि लोगों को वन विभाग के होने की जानकारी भी मिले और वह सतर्क भी रहे. बिजनौर के पूरे इलाके में 106 से ज्यादा पिंजरे लगाए गए हैं. इन पिंजरों में तेंदुए पकड़े भी जाते हैं. वहीं वन विभाग कई बार रात को भी औचक निरीक्षण करके उन पिंजौर की पड़ताल करने निकल पड़ता है जो गन्ने के खेतों के बीचों में लगाए गए हैं.

7 साल के मासूम लक्ष्य को बनाया था शिकार

नजीबाबाद में 19 अगस्त की शाम आदमखोर तेंदुए ने 7 साल के मासूम लक्ष्य को अपना निवाला बना दिया था. परिवार के मुताबिक, लक्ष्य रोजाना की तरह ट्यूशन पढ़ने गया था. ट्यूशन के बाद काफी देर तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की तो कही कुछ पता नहीं चला. रोते हुए मां बाप ने पूरा दुखड़ा सुनाया कि पूरा गांव बच्चे की तलाश में जुटा था, लेकिन उनका बच्चा अगले दिन गन्ने के खेतों के बीच मिला जिसके दोनों पैर तेंदुआ खा गया था. परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है.

अपने मासूम बेटे की मौत के बाद परिवार के लोगों में तेंदुओं का खौफ साफ नजर आता है. मां-बाप और दादी की आंखें अभी भी तेंदुए की आहट के अनजाने डर से कांप रही हैं. उनकी रातों की नींद उड़ चुकी है. लक्ष्य के पिता मजदूरी का काम करते है, जिस जगह पर तेंदुए ने लक्ष्य पर हमला करके उसे घसीटा था वो एक आबादी क्षेत्र है, लेकिन तेंदुआ उस घटनास्थल से तकरीबन आधा किलोमीटर दूर गन्ने के खेतों में लेकर गया था. जिसकी वजह से स्थानीय लोगों को उसे तलाशने में कई घंटे लगे. इस घटना के बाद पूरे नजीबाबाद में स्थानीय वन विभाग की टीम ने 22 से ज्यादा पिंजरे लगाए हैं.

मासूम बच्चे की मौत के बाद परिजनों की शिकायत पर घर के पास कुछ ही दूरी पर एक पिंजरा लगा दिया गया है जिसमें एक मेमना बांधा गया है ताकि तेंदुए को पकड़ा जा सके. इस इलाके में पिछले कुछ समय में कई जगह पर तेंदुए की आहट से लोगों का निकलना बंद हो गया है.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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