Last Updated:July 18, 2026, 04:01 IST
हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था. जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा, उस दौर में दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद, राजेंद्र कुमार, धर्मेंद्र, जितेंद्र और मनोज कुमार जैसे बड़े सितारे इंडस्ट्री पर छाए हुए थे. इसके बावजूद राजेश खन्ना ने अपनी अलग पहचान बनाई और देखते ही देखते लाखों दिलों की धड़कन बन गए. लेकिन आज ही के दिन 18 जुलाई को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था.
नई दिल्ली. 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना का असली नाम जतिन खन्ना था. फिल्मों में आने से पहले ही उन्हें एक्टिंग का शौक था. लेकिन उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ एक बड़े टैलेंट कॉम्पिटिशन से, जिसमें करीब 10 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था. उन्हीं चुनिंदा लोगों में राजेश खन्ना भी शामिल थे.
राजेश खन्ना ने खुद बताया था कि फिल्म इंडस्ट्री में उनका कोई गॉडफादर नहीं था. न कोई रिश्तेदार था और न ही कोई सहारा. उन्होंने अखबार में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स-फिल्मफेयर टैलेंट कॉन्टेस्ट का विज्ञापन देखा. विज्ञापन काटकर फॉर्म भरा और अपनी तीन तस्वीरें भेज दीं. कुछ दिन बाद उन्हें ऑडिशन के लिए बुलावा आ गया.
ऑडिशन के दौरान उनके सामने बीआर चोपड़ा, बिमल रॉय, शक्ति सामंत और जीपी सिप्पी जैसे दिग्गज निर्माता बैठे थे. उनसे एक डायलॉग बोलने के लिए कहा गया. लेकिन राजेश खन्ना ने पहले किरदार के बारे में सवाल पूछ लिए. उन्होंने कहा कि बिना यह जाने कि किरदार कैसा है, उसकी मां कौन है, वह अमीर है या गरीब, पढ़ा-लिखा है या नहीं, डायलॉग कैसे बोलूं.
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उनका यह जवाब सुनकर वहां मौजूद निर्माता भी हैरान रह गए. बीआर चोपड़ा ने कहा कि ऐसा सवाल तो कोई थिएटर कलाकार ही पूछ सकता है. इसके बाद उनसे अपना पसंदीदा डायलॉग सुनाने के लिए कहा गया. राजेश खन्ना काफी घबरा गए थे. तभी उन्हें अपने एक नाटक का डायलॉग याद आया और उन्होंने वही सुनाया. यही डायलॉग उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. बाद में उन्होंने खुद बताया था कि इसी डायलॉग की वजह से जीपी सिप्पी ने उन्हें फिल्मों में मौका दिया.
इसके बाद राजेश खन्ना ने फिल्म ‘आखिरी खत’ से अपने करियर की शुरुआत की. शुरुआती फिल्मों से उन्हें बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी जगह बना ली.फिर साल 1969 में आई फिल्म ‘आराधना’, जिसने उनकी किस्मत बदल दी. इस फिल्म में उन्होंने डबल रोल निभाया और फिल्म के गाने भी सुपरहिट साबित हुए. ‘मेरे सपनों की रानी’ और ‘गुनगुना रहे हैं भंवरे’ जैसे गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं.
‘आराधना’ की सफलता के बाद राजेश खन्ना ने लगातार हिट फिल्मों की झड़ी लगा दी. उनका स्टारडम ऐसा था कि लोग उनकी हेयरस्टाइल, बोलने का अंदाज और एक्टिंग तक कॉपी करने लगे. उस दौर में उनकी हर फिल्म का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता था.
यूं तो राजेश खन्ना ने हर एक्ट्रेस के साथ कई फिल्मों में काम किया. लेकिन अकेले मुमताज संग ही उन्होंने 10 सुपरिहट और ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया था. इन फिल्मों में दोनों की जोड़ी का काफी पसंद किया गया था.
अपने लंबे फिल्मी करियर में राजेश खन्ना ने तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते. फिल्मों के बाद उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और 1992 से 1996 तक कांग्रेस के सांसद रहे. जीवन के आखिरी दिनों में वह कैंसर से जूझ रहे थे. 18 जुलाई 2012 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. आज भी राजेश खन्ना को हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार के रूप में याद किया जाता है और उनकी फिल्में व गाने लोगों के दिलों में जिंदा हैं.
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