Last Updated:August 27, 2026, 08:18 IST
बहराइच की ऐतिहासिक लाइल लाइब्रेरी बदहाली का शिकार है. दीवानी कचहरी के पास स्थित पुराने मौसम विभाग परिसर में बनी यह लाइब्रेरी अब पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है. इमारत की छत से बारिश का पानी टपकता है और दीवारों में गहरी दरारें आ चुकी हैं. सबसे दुखद स्थिति यह है कि लकड़ी की कीमती अलमारियों को दीमकों ने पूरी तरह से अपना शिकार बना लिया है. अलमारियों के साथ-साथ भारत के विभिन्न कोनों से एकत्र की गई सैकड़ों साल पुरानी दुर्लभ किताबें भी दीमक की भेंट चढ़ रही हैं.
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बहराइचः जिले में स्थित ऐतिहासिक लाइल लाइब्रेरी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. 14 नवंबर 1883 को भिनगा के राजा उदय प्रताप सिंह द्वारा स्थापित यह पुस्तकालय कभी देश-विदेश के ज्ञान और साहित्य का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था. राजा उदय प्रताप सिंह ने भारत के कोने-कोने से दुर्लभ और बेशकीमती किताबों को जुटाकर इस लाइब्रेरी की स्थापना की थी. यहां एक समय में 100 से अधिक पाठकों के एक साथ बैठकर अध्ययन करने की व्यवस्था की गई थी. मजबूत स्तंभों, लकड़ी की नक्काशीदार अलमारियों और कांच के दरवाजों से सजी यह ऐतिहासिक इमारत आज समय की मार और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है.
इमारत की जर्जर स्थिति और रोचक किताबों पर संकट
दीवानी कचहरी के पास स्थित पुराने मौसम विभाग परिसर में बनी यह लाइब्रेरी अब पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है. इमारत की छत से बारिश का पानी टपकता है और दीवारों में गहरी दरारें आ चुकी हैं. सबसे दुखद स्थिति यह है कि लकड़ी की कीमती अलमारियों को दीमकों ने पूरी तरह से अपना शिकार बना लिया है. अलमारियों के साथ-साथ भारत के विभिन्न कोनों से एकत्र की गई सैकड़ों साल पुरानी दुर्लभ किताबें भी दीमक की भेंट चढ़ रही हैं. कई अति-दुर्लभ ग्रंथ पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं और जो बाकी बचे हैं, वे भी सही संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर हैं.
पुस्तकालय अध्यक्ष अनीस अहमद का लगातार संघर्ष
सन 1971 से अपनी पीढ़ियों की विरासत को संभाल रहे लाइब्रेरियन अनीस अहमद लंबे समय से इस ज्ञान के खजाने को बचाने के लिए अकेले ही संघर्ष कर रहे हैं. बारिश के दिनों में जब छत से पानी टपकता है, तब वे किसी तरह किताबों को भीगने से बचाते हैं. बारिश रुकने के बाद किताबों को सुखाने के लिए जब बाहर धूप में रखा जाता है, तो वहां आवारा पशुओं द्वारा उन्हें नुकसान पहुंचाने का जोखिम बना रहता है. अपनी उम्र के इस पड़ाव पर भी अनीस अहमद पूरी निष्ठा से इन किताबों की सुरक्षा में जुटे हुए हैं, लेकिन अब संसाधनों की कमी के कारण उनके हौसले भी पस्त हो रहे हैं.
पुनरुद्धार और संरक्षण के लिए प्रशासन से गुहार
लाइब्रेरी के अस्तित्व को बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर इसके नवीनीकरण की मांग लगातार उठाई जा रही है. यदि समय रहते इस ऐतिहासिक इमारत की मरम्मत नहीं कराई गई और आधुनिक संरक्षण पद्धतियों के जरिए इन दुर्लभ पुस्तकों को दीमक से नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ी इस अमूल्य सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर से वंचित रह जाएगी। बहराइच की इस ऐतिहासिक लाइल लाइब्रेरी को तत्काल प्रशासनिक संरक्षण और जीर्णोद्धार की आवश्यकता है, ताकि ज्ञान की यह अनमोल धारा भविष्य में भी प्रवाहित होती रहे.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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Bahraich,Uttar Pradesh
First Published :
August 27, 2026, 08:18 IST










