गाजीपुर मेले में असम के बांस के अचार की धूम, घुटनों के दर्द में फायदेमंद

Last Updated:July 02, 2026, 18:22 IST

Ghazipur Mela unique food: गाजीपुर जनपद के स्थानीय मेले में इस बार एक ऐसा अनोखा स्टॉल लगा है, जो न सिर्फ लोगों के लिए भारी कौतूहल का विषय बना हुआ है, बल्कि अपनी खासियतों से हर किसी को हैरान कर रहा है. सुदूर पूर्व राज्य असम से आए संतोष कुमार गुप्ता मेले में विशेष ‘बांस का अचार’ लेकर पहुंचे हैं. उनका दावा है कि पारंपरिक विधि से तैयार यह अनोखा अचार न केवल खाने में बेहद स्वादिष्ट है, बल्कि घुटनों के दर्द को दूर करने सहित कई औषधीय गुणों से भी भरपूर है.

Ghazipur Mela unique food: गाजीपुर के मेले में इस बार कुछ ऐसा देखने को मिला जो स्थानीय लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया है. असम से आए संतोष कुमार गुप्ता यहां बांस का अचार लेकर पहुंचे हैं, जिसके बारे में उनका दावा है कि यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है. असम के मूल निवासी संतोष कुमार गुप्ता बताते हैं कि यह अचार वहां की पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है.

घुटनों के दर्द में राहत का दावा
वे दावा करते हैं कि इसे नियमित रूप से खाने से घुटनों के दर्द में राहत मिलती है और शरीर के विकास में भी यह सहायक है. हालांकि, वे स्पष्ट करते हैं कि इसका पूरा असर दिखने में करीब दो से ढाई साल का समय लग सकता है.

जानिए कैसे बनता है पारंपरिक ‘बांस कोरील’
असम में बांस के अचार (जिसे स्थानीय भाषा में ‘बांस कोरील’ या ‘खोइरिश’ से संबंधित माना जाता है) को बनाने की प्रक्रिया काफी पारंपरिक और श्रमसाध्य है. इसके लिए मुख्य रूप से बांस की नई और कोमल कोपलों का चयन किया जाता है, जिन्हें छीलकर और बारीक काटकर कई दिनों तक पानी में भिगोकर या उबालकर उनका कड़वापन निकाला जाता है. इसके बाद, इन टुकड़ों को सुखाकर या नमी बरकरार रखते हुए सरसों के तेल, पारंपरिक मसालों जैसे राई, हल्दी, और कभी-कभी सिरके या स्थानीय किण्वन तकनीक का उपयोग करके तैयार किया जाता है.

25 दिनों की कड़ी मेहनत और 5 साल की लंबी शेल्फ लाइफ
बांस के अचार की निर्माण प्रक्रिया काफी लंबी और मेहनत भरी है. जब बांस 10-15 फीट का हो जाता है, तब इसे काटा जाता है. उबालने, कटाई-छंटाई और रेशा निकालने की लंबी प्रक्रिया के बाद, आम के अचार की तरह इसमें मसाले मिलाए जाते हैं. इसे तैयार होने में 20 से 25 दिन का समय लगता है. सबसे खास बात इसकी उम्र है- संतोष के मुताबिक, यह अचार बिना खराब हुए 5 साल तक आराम से खाया जा सकता है.

कौतूहल के साथ सेहत की उम्मीद, 320 रुपये किलो है कीमत
मेले में 320 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहे इस अचार को लोग कौतूहल और स्वास्थ्य लाभ की उम्मीद में खरीद रहे हैं. क्या वाकई बांस का अचार घुटनों के दर्द को दूर कर सकता है? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन गाजीपुर के मेले में यह स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र जरूर बना हुआ है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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