Ayodhya Ram Mandir Donation Row : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला लगातार बड़ा होता जा रहा है. जांच में सामने आया है कि अब तक गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 6 वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी ‘सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज’ (Sainik Security Services) के कर्मचारी थे. इस एजेंसी ने मंदिर में नकदी गिनने का काम करने के लिए लोगों को भेजा था.
क्या बोले सैनिक सिक्योरिटी के डायरेक्टर?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के डेटाबेस के अनुसार, सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज एजेंसी दिसंबर 2017 में वाराणसी में शुरू हुई. वाराणसी की सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के मालिक और डायरेक्टर गौरव सिंह ने बताया कि इस एजेंसी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या स्थित नया घाट ब्रांच ने कैश गिनने की प्रक्रिया के लिए हायर किया था. यह ब्रांच उन तीन बैंक ब्रांच में से एक है, जहां श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अकाउंट था.
हमसे एसबीआई की लोकल ब्रांच ने कहा था: गौरव सिंह
उन्होंने आगे बताया कि एसबीआई ने 19 लोगों को कैश काउंटिंग टीम में शामिल करने की मांग की थी. इसके बाद उनकी एजेंसी ने इन लोगों को नौकरी पर रखकर बैंक को उपलब्ध कराया. उन्होंने साफ कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट उनका क्लाइंट नहीं है, बल्कि एसबीआई है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर कॉर्पोरेट ऑफिस ही डिमांड करता है, लेकिन इस मामले में लोकल ब्रांच ने 19 कर्मचारियों की डिमांड की थी. ब्रांच ने हमसे कहा कि उनके पहले से तैनात 19 लोगों को हम अपनी टीम में शामिल करें और उन्हें ब्रांच को उपलब्ध कराएं. हमने ऐसा ही किया. डिमांड लोकल ब्रांच ने ही की थी. इन सभी कर्मचारियों को लगभग 20,000 रुपये प्रति माह वेतन दिया जाता था.
इधर एसबीआई का कहना है कि वह एसआईटी के साथ सहयोग कर रहा है. जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से ट्रस्ट को बैंकिंग सेवाएं दी हैं. वहीं, लखनऊ में SBI के एक सीनियर अधिकारी (अपना नाम न बताने की शर्त पर) ने कहा कि आमतौर पर इस तरह की हायरिंग कॉर्पोरेट या सेंट्रलाइज्ड लेवल पर की जाती है. बता दें, एजेंसी की वेबसाइट के अनुसार, यह 15 राज्यों में काम करती है और इसके क्लाइंट्स में कई सरकारी कंपनियां शामिल हैं.
कौन-कौन गिरफ्तार?
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि अयोध्या पुलिस ने एंटी-करप्शन मामलों के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज रजत वर्मा की कोर्ट में जो डॉक्यूमेंट्स जमा किए हैं, उनसे पता चलता है कि आठ आरोपियों में से छह को वाराणसी की एजेंसी पेमेंट कर रही थी. पुलिस अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर यादव ‘टिन्नू’, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला, रामाशंकर मिश्रा और करुणेश पांडेय शामिल हैं. तलाशी के दौरान 7 आरोपियों से 79.85 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं.
यह है मामला
यह विवाद 7 जून को शुरू हुआ था, जब समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण ‘पवन’ पांडेय ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर के दान में से 5 करोड़ से 7.5 करोड़ तक की रकम गायब हुई है. इसके बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया. एसआईटी ने 15 से 20 जून तक जांच की और पहली नजर में दान की रकम की गिनती और जमा करने की प्रक्रिया में अनियमितताएं मिलने की बात कही. जांच के आधार पर 26 जून को दान की गिनती से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया. आरोपियों के खिलाफ चोरी, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. फिलहाल मामले की जांच जारी है. एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि दान की रकम में कथित गड़बड़ी कितनी बड़ी थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.










