रामपुर के 3 महाभारतकालीन चमत्कारी धाम, जहां आज भी जिंदा हैं रहस्य और आस्था

Last Updated:May 07, 2026, 18:18 IST

रामपुर सिर्फ नवाबों की नगरी ही नहीं बल्कि रहस्यमयी और महाभारतकालीन धार्मिक धरोहरों का भी बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां ऐसे प्राचीन मंदिर और आश्रम मौजूद हैं जिनसे जुड़ी चमत्कारी कहानियां आज भी लोगों की आस्था को मजबूत करती हैं. कहीं सदियों पुराने वटवृक्ष हैं.

यूपी के जनपद रामपुर के तहसील शाहाबाद की नगर पंचायत सेफनी स्थित स्वर्गाश्रम को लोग मनोकामना पूरी करने वाला धाम मानते हैं. यहां 25 सिद्ध संतों की समाधियां मौजूद हैं जिनके बारे में कई चमत्कारी कहानियां सुनने को मिलती हैं. बाबा तुलसीदास की तपस्या से जुड़ी बातें आज भी यहां के लोग बड़े विश्वास से बताते हैं. हर सोमवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. कई परिवार अपने बच्चों का पहला मुंडन भी यहीं कराते हैं. रामपुर के अलावा मुरादाबाद, काशीपुर और रुद्रपुर से भी लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं.

रामपुर के भमरौआ में स्थित प्राचीन पातालेश्वर शिव मंदिर को लोग महाभारत काल से जुड़ा मानते हैं. कहा जाता है कि यहां पांडवों ने वनवास के दौरान भगवान शिव की आराधना की थी. मंदिर का जिक्र नवाबों के पुराने दस्तावेजों और मुरादाबाद मंडल के गजेटियर में भी मिलता है. हर साल शिवरात्रि पर यहां बड़ा मेला लगता है, जहां रामपुर बरेली, मुरादाबाद और बदायूं तक से श्रद्धालु पहुंचते हैं. अब इस मंदिर को 101 करोड़ रुपये की लागत से भव्य कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है.

भमरौआ के शिव मंदिर की खास बात यह है कि इसका जिक्र नवाबों के करीब 300 साल पुराने रिकॉर्ड में मिलता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले यहां घना जंगल हुआ करता था और साधु-संत तपस्या करने आते थे. धीरे-धीरे यह स्थान बड़ी आस्था का केंद्र बन गया. शिवरात्रि के दौरान यहां हजारों भक्त जल चढ़ाने पहुंचते हैं.

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माता वेला भवानी मंदिर परिसर में मौजूद वटवृक्षों को लोग चमत्कारी मानते हैं. सरकारी सर्वे में इनकी उम्र 700 साल से ज्यादा बताई गई है. श्रद्धालुओं का कहना है कि इन पेड़ों के नीचे बैठते ही मन को शांति मिलती है. कई लोग यहां ध्यान लगाने भी आते हैं. गर्मियों में भी यहां ठंडी हवा का एहसास होता है. यही वजह है कि यह जगह सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान बना रही है.

माता बेला भवानी के मंदिर में सिर्फ पूजा पाठ ही नहीं बल्कि यहां बच्चों को धार्मिक शिक्षा भी दी जाती है. यहां एक आवासीय गुरुकुल चलता है जहां वेद पुराण और संस्कृति की पढ़ाई कराई जाती है. खास बात यह है कि यहां किसी भी धर्म और जाति का बच्चा शिक्षा ले सकता है. मंदिर के आचार्य बताते हैं कि पुरानी गुरु शिष्य की परंपरा को फिर से मजबूत करने की कोशिश हो रही है.

पंडित महिपाल बताते हैं कि स्वर्गाश्रम को लेकर लोगों में मान्यता है कि यहां मांगी गई संतान की मुराद जरूर पूरी होती है. जिन दंपतियों को संतान नहीं होती वे यहां आकर विशेष पूजा करते हैं और गोबर से सतियां बनाकर छोड़ते हैं. मन्नत पूरी होने के बाद बच्चे का पहला मुंडन भी इसी आश्रम में कराया जाता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है यहां आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि आश्रम में पहुंचते ही मन को अलग शांति महसूस होती है हर साल यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है.

रामपुर के ये महाभारतकालीन चमत्कारी धार्मिक स्थल सिर्फ मंदिर नहीं बल्कि आस्था इतिहास और रहस्य का जीवंत संगम हैं. भमरौआ का प्राचीन पातालेश्वर शिव मंदिर सेफनी का माता वेला भवानी धाम और सिद्ध संतों से जुड़ा स्वर्गाश्रम सदियों पुरानी मान्यताओं को आज भी अपने भीतर समेटे हुए हैं. इन स्थलों पर उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं.

रामपुर की शाहाबाद तहसील के सेफनी नगर पंचायत में स्थित श्री माता वेला भवानी मंदिर को बेहद चमत्कारी माना जाता है. मान्यता है कि यह स्थान महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और द्वापर युग में भी यहां पूजा होती थी. मंदिर परिसर में मौजूद विशाल वटवृक्ष श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं. यहां रामपुर ही नहीं बल्कि संभल, अमरोहा, शाहजहांपुर और पीलीभीत से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं. नवरात्र के दौरान यहां दिनभर भक्तों की लंबी लाइन लगी रहती है.

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