मेरठ की डॉ दिव्या चौधरी ने बनाई सलाइवा से प्रेगनेंसी टेस्ट की अनोखी डिवाइस

Last Updated:March 11, 2026, 09:36 IST

Meerut News: मेरठ इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ दिव्या चौधरी ने प्रेग्नेंसी टेस्ट की अनोखी डिवाइस विकसित की है. इस डिवाइस के माध्यम से महिला के मुंह की लार से ही गर्भधारण की पुष्टि हो जाएगी. इस डिवाइस का डिजाइन पेटेंट मिल चुका है, जबकि टेक्नोलॉजी पेटेंट के लिए नई दिल्ली स्थित पेटेंट कार्यालय में आवेदन किया गया है.

मेरठ की डॉ दिव्या चौधरी ने अनोखी प्रेग्नेंसी टेस्ट किट बनाई

मेरठ. भारत में अब तक महिलाओं में गर्भ की पुष्टि यूरिन और ब्लड टेस्ट के ज़रिए ही की जाती की है. लेकिन अब इस दिशा में बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है. मेरठ इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ दिव्या चौधरी ने ऐसी डिवाइस विकसित की है. जो महिला को मुंह की लार यानी सलाइवा से गर्भधारण की पुष्टि कर देगी. दिव्या चौधरी के अनुसार ये डिवाइस गर्भधारण की शुरुआत में ही परिणाम देने में सक्षम है. इसे विकसित करने में उन्हें करीब 2 वर्ष का समय लगा. महिला के लार की केवल एक बूंद से ही कुछ सेकंड में डिवाइस रिजल्ट दे देगी.

बायोटेक्नोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दिव्या चौधरी ने एक ऐसी नवीन डिवाइस विकसित की है, जो महिलाओं के गर्भ की जांच केवल मुंह की लार से कर सकती है. अब तक भारत में गर्भावस्था की पुष्टि के लिए यूरिन या ब्लड टेस्ट का सहारा लिया जाता रहा है, लेकिन इस नई तकनीक से लार के जरिए गर्भावस्था का पता लगाया जा सकेगा, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जा रही है. महिला की लार की एक बूंद डिवाइस पर डालने के बाद कुछ ही सेकंड में परिणाम सामने आ जाता है. यदि डिवाइस के बैंड के बीच एक लाइन आती है तो गर्भ की पुष्टि होती है, जबकि लाइन न आने का मतलब गर्भ न ठहरना होता है.

डिवाइस डिज़ाइन का पेटेंट मिला

इस डिवाइस का डिजाइन पेटेंट मिल चुका है, जबकि टेक्नोलॉजी पेटेंट के लिए नई दिल्ली स्थित पेटेंट कार्यालय में आवेदन किया गया है, जिसकी प्रक्रिया जारी है. डॉ. दिव्या चौधरी ने इस डिवाइस का 30 महिलाओं पर परीक्षण किया, जिसमें यह तकनीक 100 प्रतिशत सफल पाई गई. यह डिवाइस गर्भावस्था के पहले सप्ताह से लेकर तीन महीने तक की अवस्था में भी सटीक परिणाम देने में सक्षम है. खास बात यह है कि यह डिवाइस मौजूदा यूरिन टेस्ट डिवाइस के मुकाबले लगभग 80 प्रतिशत सस्ती होगी. जहां बाजार में इस तरह की डिवाइस की कीमत करीब 1000 रुपये तक होती है, वहीं यह नई तकनीक किफायती दाम में उपलब्ध हो सकेगी.

जल्द बाजार में लाने की तैयारी

जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को एमआईईटी से 15 लाख रुपये का अनुदान भी मिला था. मार्च 2024 में एमआईईटी की ओर से जारी एक विज्ञापन के तहत देशभर से 300 आइडिया आमंत्रित किए गए थे, जिनमें से डॉ. दिव्या चौधरी का आइडिया चयनित हुआ, जिसके बाद उन्हें शोध कार्य के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की तकनीक बड़े स्तर पर विकसित होती है, तो यह स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई क्रांति साबित हो सकती है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिनके लिए पारंपरिक जांच सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं. फिलहाल, पेटेंट प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस डिवाइस को बाजार में लाने की तैयारी की जा रही है, जिसमें करीब पांच से छह महीने का समय लग सकता है. मेरठ से आई यह खोज न सिर्फ स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में नई दिशा दे सकती है, बल्कि यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार की ताकत को भी दर्शाती है.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें

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Location :

Meerut,Uttar Pradesh

First Published :

March 11, 2026, 09:36 IST

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dainikupeditor@gmail.com

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