मानिकपुर के किसान हीरामढ़ी जैविक सब्जी की खेती से रोज कमा रहे 6 हजार, सीधे खेत से बिक रहा

Last Updated:May 08, 2026, 09:39 IST

चित्रकूट के मानिकपुर पाठा के उमरी गांव के किसान हीरामढ़ी कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि पहले उनके इलाके में सब्जियां चित्रकूट मुख्यालय कर्वी या फिर मध्य प्रदेश के सतना जिले से मंगाई जाती थीं. स्थानीय बाजारों में बाहर से आने वाली सब्जियों पर ही लोग निर्भर रहते थे. लेकिन अब गांव के किसान खुद सब्जियां उगा रहे हैं और आसपास के लोग सीधे खेतों से खरीदारी करने पहुंच रहे हैं.

चित्रकूटः बुंदेलखंड का चित्रकूट पाठा क्षेत्र कभी बंजर जमीन और खेती की कठिन परिस्थितियों के लिए जाना जाता था. यहां के अधिकांश किसान खेती से दूरी बनाकर मजदूरी करना ज्यादा बेहतर समझते थे. किसानों का मानना था कि खेती में मेहनत और लागत अधिक लगती है, लेकिन उसके मुकाबले सही मुनाफा नहीं मिल पाता था. पानी की कमी और पथरीली जमीन ने भी खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया था, लेकिन अब बदलते दौर के साथ इसी पाठा क्षेत्र के कुछ किसानों ने अपनी मेहनत और नई सोच के दम पर हालात बदलने शुरू कर दिए हैं.

किसान खेती का अपनाएं जैविक तरीका

आप को बता दे कि चित्रकूट के मानिकपुर पाठा क्षेत्र के उमरी गांव के किसान आज जैविक तरीके से सब्जियों की खेती कर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं. इन किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर लौकी, कद्दू, पालक, भिंडी, चौराई और धनिया जैसी सब्जियों की खेती शुरू की है. खास बात यह है कि यह खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जा रही है, जिसमें गोबर की खाद का उपयोग किया जाता है, इससे सब्जियां प्राकृतिक रूप से तैयार होती हैं और लोगों को ताजी व स्वास्थ्य के लिए भी सही मानी जाती है.

खेतों में सब्जी खरीदने पहुंच रहे लोग

उमरी गांव के किसान हीरामढ़ी कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि पहले उनके इलाके में सब्जियां चित्रकूट मुख्यालय कर्वी या फिर मध्य प्रदेश के सतना जिले से मंगाई जाती थीं. स्थानीय बाजारों में बाहर से आने वाली सब्जियों पर ही लोग निर्भर रहते थे. लेकिन अब गांव के किसान खुद सब्जियां उगा रहे हैं और आसपास के लोग सीधे खेतों से खरीदारी करने पहुंच रहे हैं. बची हुई सब्जियां हम लोग स्थानीय बाजारों में ले जाकर बेचते हैं, जिससे उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है.उनका कहना है कि जैविक खेती में लागत भी कम आती है और बाजार में सब्जियों की मांग भी ज्यादा रहती है.

रोज 5 से 6 हजार की बिक्री

उमरी गांव के किसान हीरामढ़ी कुशवाहा ने लोकल 18 से बताया कि उनके खेतों से प्रतिदिन लगभग 5 से 6 हजार रुपये तक की सब्जियां बिक जाती हैं.इससे परिवार का खर्च आसानी से चल रहा है. उन्होंने यही बताया कि जैविक खेती की सब्जियां थोड़ी महंगी तो रहती है लेकिन शरीर के लिए काफी लाभदायक भी होती है.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

News18 न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

Location :

Chitrakoot,Uttar Pradesh

Source

dainikupeditor@gmail.com

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाये
  • राजनीति