Last Updated:July 18, 2026, 08:34 IST
Annu Kapoor Support Ban On Diljit Dosanjh Film Satluj: अन्नू कपूर ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर चल रहे विवाद पर ऐसा बयान दिया है, जिसने बहस को और तेज कर दिया है. जहां फिल्म इंडस्ट्री का एक वर्ग सरकार के फैसले का विरोध कर रहा है. वहीं, अन्नू कपूर ने बिल्कुल अलग रुख अपनाते हुए साफ कहा कि सार्वजनिक सहानुभूति जुटाने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए. उन्होंने फिल्म, सेंसर बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट का जिक्र करते हुए ऐसी बात कही, जिसकी अब हर तरफ चर्चा हो रही है.
अन्नू कपूर ने ‘सतलुज’ बैन पर खुलकर अपनी बात रखी है.
नई दिल्ली. दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को बड़े पर्दे पर तो मेकर्स नहीं ला सके. ओटीटी पर घर-घर पहुंचने का प्लान मेकर्स ने बनाया, जो सिर्फ 48 घंटे तक ही सफल रह सका. ‘पंजाब 95’ से ‘सतलुज’ हुई दिलजीत दोसांझ की ये फिल्म सिर्फ दो दिन में जी5 से हटा दी गई. जिसके बाद जहां फिल्म इंडस्ट्री का एक बड़ा वर्ग सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर सवाल उठा रहा है. वहीं, दिग्गज एक्टर अन्नू कपूर ने इस पूरे मामले पर सरकार और सेंसर बोर्ड के पक्ष में अपनी राय रखी है. उन्होंने दो टूक कहा कि अगर फिल्म निर्माताओं को फैसले से आपत्ति है तो उन्हें सार्वजनिक मंचों पर शिकायत करने के बजाय कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए.
हमारे सहयोगी यूट्यूब चैनल ‘कड़क’ के साथ एक खास बातचीत में अन्नू कपूर ने कहा कि अगर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने किसी फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार किया है या उस पर आपत्ति जताई है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.
कलाकार इस बात से वाकिफ होता है: अन्नू
दिलजीत दोसांझ के उस बयान का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने कला को राजनीति से अलग रखने की बात कही थी. अन्नू कपूर ने कहा कि संवेदनशील विषयों पर फिल्म बनाने वाले कलाकारों को शुरू से ही पता होता है कि उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
‘रोने-धोने का क्या फायदा, कोर्ट जाओ’
उन्होंने कहा, ‘आपने फिल्म में अभिनय किया और नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि अगर सेंसर बोर्ड प्रमाणपत्र नहीं देता है तो आपको सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए. हर कोई जानता है कि यह एक विवादास्पद विषय है और अब आप जनता से सहानुभूति की भीख मांग रहे हैं. आत्म-दया में क्यों पड़ना? सुप्रीम कोर्ट जाओ. इस पर रोने का क्या फायदा?’
‘राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को गंभीरता से लेना चाहिए’
अन्नू कपूर ने आगे कहा कि जब सेंसर बोर्ड राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए प्रमाणपत्र देने से इनकार करता है तो ऐसी आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘क्या देश में अराजकता फैलना एक फिल्म की रिलीज से ज्यादा महत्वपूर्ण है? क्या मेरे देश की सड़कें जलना, घर फूंके जाना और माताओं-बहनों का जिंदा जलना एक फिल्म से कम मायने रखता है? एक फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा होने के नाते मैं यह कह रहा हूं कि मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी मेरे समाज में शांति और सुरक्षा का बने रहना है.’
सीबीएफसी से फिल्म नहीं मिला था सर्टिफिकेट
आपको बता दें कि ‘सतलुज’ का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है. यह फिल्म पहले ‘पंजाब 95’ के नाम से बनाई गई थी और करीब चार सालों तक सीबीएफसी के साथ प्रमाणन विवाद में फंसी रही. इसके बाद फिल्म 3 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज हुई, लेकिन महज दो दिन बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. इस फैसले के बाद फिल्म जगत के कई कलाकारों और फिल्मकारों ने सेंसरशिप और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई थी.
क्या है फिल्म सतलुज की कहानी
आपको बता दें कि ये फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है. खालड़ा ने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद विरोधी अभियानों के दौरान कथित तौर पर अज्ञात लोगों के अवैध अंतिम संस्कार के मामलों की जांच की थी. फिल्म उनकी जांच, कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करने की कोशिश और 1995 में उनके रहस्यमय ढंग से लापता होने की घटनाओं को पर्दे पर दिखाती है.
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15 साल पहले पत्रकारिता से शुरू हुआ शिखा पाण्डेय का सफर आज भी उसी जुनून के साथ जारी है. दिसंबर 2019 में न्यूज18 हिंदी से जुड़ने के बाद वह चीफ सब एडिटर के रूप मे…
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