Last Updated:June 12, 2026, 23:03 IST
Jaspal Rana biopic: दो बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर ने अपने कोच जसपाल राणा के निधन पर एक बेहद भावुक श्रद्धांजलि दी है. मनु ने उन्हें एक गुरु, मार्गदर्शक और दोस्त बताया, जिन्होंने उनके करियर और जिंदगी दोनों को संवारा. मई के आखिरी हफ्ते में सीने में तकलीफ के बाद जसपाल राणा के दिल की एक सर्जरी हुई थी. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. वह 49 वर्ष के थे.
जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में निधन.
नई दिल्ली. भारतीय शूटिंग इतिहास के सबसे चमकदार सितारों में से एक और देश के दिग्गज कोच जसपाल राणा अब हमारे बीच नहीं रहे. खेल जगत को यह गहरा सदमा तब लगा जब महज 49 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका असामयिक निधन हो गया. कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ (ISSF) वर्ल्ड कप से लौट रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और दिल्ली के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके जाने से खेल जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़ी हस्तियों ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी है.
आने वाली थी बायोपिक
इस दुखद घड़ी में मशहूर फिल्म निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर की प्रोडक्शन कंपनी ‘रॉय कपूर फिल्म्स’ ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है. पर्दे पर असली नायकों की कहानियां लाने के लिए मशहूर इस बैनर ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक नोट साझा करते हुए एक बड़ा खुलासा किया. रॉय कपूर फिल्म्स ने बताया कि वे जसपाल राणा के जीवन और उनके संघर्षों को फिल्मी पर्दे पर उतारने की तैयारी कर रहे थे. खुद जसपाल राणा इस बायोपिक की स्क्रिप्ट को फाइनल करने के लिए मेकर्स के साथ मिलकर काम कर रहे थे, लेकिन यह कहानी पूरी होने से पहले ही वे दुनिया को अलविदा कह गए.
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पोस्ट कर दी श्रद्धांजलि
प्रोडक्शन हाउस ने अपनी श्रद्धांजलि में लिखा, ‘हम भारत की खेल उत्कृष्टता के शिल्पकार जसपाल राणा के निधन से गहरे सदमे में हैं. पदकों से इतर उनका असली ठिकाना उन अनगिनत युवा एथलीटों के भविष्य में है, जिन्हें उन्होंने तराशा. उनके साथ इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम करते हुए हम उनके खेल के प्रति समर्पण से बेहद प्रभावित हुए थे. लेकिन इन सब से अलग, हम उनकी हाजिरजवाबी, उनके ‘ड्राई सेंस ऑफ ह्यूमर’ और हर माहौल में जान फूंक देने वाले उनके मजाकिया अंदाज को हमेशा याद रखेंगे. वह हर परिस्थिति में अपनी कहानियों और चुटकुलों से हमें हंसाते थे.’
मनु भाकर को तराशने वाले ‘द्रोणाचार्य’
जसपाल राणा सिर्फ एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक असाधारण ‘गुरु’ भी थे. वर्तमान में वे भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में काम कर रहे थे. उन्होंने 1994 से 2006 के बीच चार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक (9 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज) जीते. वे भारत के सबसे सफल सीडब्ल्यूजी एथलीट हैं. इसके अलावा एशियन गेम्स में भी उन्होंने 8 मेडल देश के नाम किए. उन्हें भारतीय शूटिंग में कड़े और अनुशासित ट्रेनिंग रूटीन की शुरुआत करने के लिए जाना जाता है. इसी का नतीजा था कि उनकी देखरेख में पेरिस ओलिंपिक में मनु भाकर ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए दो मेडल जीते. खेल में उनके अद्भुत योगदान के लिए उन्हें अर्जुन अवार्ड, पद्म श्री और साल 2020 में कोचिंग के लिए द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.
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शिवम उपाध्याय उभरते हुए खेल पत्रकार हैं, जो नवंबर 2025 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. क्रिकेट विशेषज्ञता का मुख्य क्षेत्र है, लेकिन इसके अलावा हॉकी और बैडमिं…
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