धर्मेंद्र के जिस गाने को ‘हल्का’ बताकर किया था रिजेक्ट, उसे शंकर जयकिशन ने बनाया अमर

Last Updated:May 22, 2026, 19:38 IST

Dharmendra Evergreen Hit Songs : कुछ नायाब गीतों के बनने की दास्तां बड़ी दिलचस्प है. इनमें से कुछ गानों को फिल्ममेकर्स के रिजेक्शन का सामना भी करना पड़ा था. धर्मेंद्र के ही एक सुपरहिट गाने को लीजिए. उसे पास कराने में शंकर जयकिशन को काफी पापड़ बेलने पड़े थे. वे इसे मोहम्मद रफी से गवाना चाहते थे. मगर फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर ताराचंद बड़जात्या ने यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि गाना ही इतना हल्का है, तो इसे गाकर मोहम्मद रफी क्या कर लेंगे. मगर यह नायाब गाना सुपर-डुपर हिट रहा, जिसे आज भी लोग गुनगुनाना पसंद करते हैं.

नई दिल्ली: साल 1969 में एक फिल्म आई थी, नाम है- ‘प्यार ही प्यार.’ इसका एक गाना 57 साल बाद भी पॉपुलर है, जिसे धर्मेंद्र और वैजयंती माला पर फिल्माया गया था. गाने को मोहम्मद रफी ने गाया था. मगर जब गाने को शंकर जयकिशन बना रहे थे, तब फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर ताराचंद बड़जात्या ने इसे तुच्छ मानकर रिजेक्ट कर दिया था. वह गाना तब भी सुपरहिट था, आज भी है. गाने के बोल आज भी कानों में मिश्री घोलते हैं. (फोटो साभार: IMDb)

शंकर जयकिशन को 1968 में पद्मश्री से जब सम्मानित किया गया था, तब वह फिल्म ‘प्यार ही प्यार’ के गानों पर काम कर रहे थे. उन्हें फिल्म की सिचुएशन का ख्याल था, जिन पर उन्हें गाने बनाने थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शंकर जयकिशन पद्मश्री लेने दिल्ली गए. वे ओबेरॉय होटल में ठहरे हुए थे. जयकिशन को रोमांटिक सिचुएशन पर एक धुन याद आई. उन्होंने धुन पर एक मुखड़ा भी लिख दिया. उन्हें धुन के साथ-साथ मुखड़ा भी भा गया. (फोटो साभार: IMDb/AI से जेनरेटेड इमेज)

जयकिशन ने जब यह धुन और मुखड़ा शंकर को सुनाया, तो उन्हें भी गीत बहुत पसंद आया. उन्होंने मुंबई जाकर इसे मोहम्मद रफी की आवाज में रिकॉर्ड कराने का मन बनाया. वे मुंबई पहुंचे, तो फिल्म के प्रोड्यूसर सतीश वागले को गीत सुनाया. उन्हें भी गाने की धुन-बोल भा गए. सबको लग रहा था कि यह गाना सुपरहिट होगा, मगर अभी भी एक रुकावट थी.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर ताराचंद बड़जात्या थे. वे तब फिल्मों के गीत-संगीत में दखलअंदाजी करते थे. शंकर जयकिशन जानते थे कि उनकी अनुमति के बिना गाना पास नहीं हो पाएगा. प्रोड्यूसर सतीश वागले ने यह गाना ताराचंद बड़जात्या को सुनाने की नसीहत दी और बोले कि वह ही इसे फाइनल करेंगे. (फोटो साभार: IMDb)

प्रोड्यूसर के कहने पर शंकर जयकिशन गाना सुनाने ताराचंद के पास पहुंचे. गाना सुनने के बाद ताराचंद बड़जात्या ने कहा कि यह बहुत हल्का गाना है. यह गीत नहीं चलेगा. इस सिचुएशन पर कोई दूसरा गाना बनाओ. शंकर जयकिशन को धक्का लगा. वह जिसे सुपरहिट समझ रहे थे, उसे ताराचंद ने एक झटके में रिजेक्ट कर दिया. (फोटो साभार: IMDb/AI से जेनरेटेड इमेज)

शंकर जयकिशन ने गाने की पैरवी करते हुए कहा कि जब इसे मोहम्मद रफी गाएंगे, तो कमाल हो जाएगा. ताराचंद बड़जात्या बोले कि यह इतना हल्का गीत है, रफी साहब भी इसमें क्या कर लेंगे. प्रोड्यूसर सतीश वागले के कानों तक खबर पहुंची, तो वे बोले कि यह गीत मुझे बहुत पसंद है. किसी तरह ताराचंद बड़जात्या को मनाओ. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

शंकर जयकिशन को एक तरकीब सूझी. उन्होंने 1952 में दिलीप कुमार की फिल्म ‘दाग’ में काम किया था, जिसके डिस्ट्रिब्यूटर भी ताराचंद बड़जात्या था. उन्होंने इस फिल्म का एक गाना ‘ऐ मेरे दिल कहीं ओर चल’ भी रिजेक्ट कर दिया था, जो बाद में सुपरहिट रहा था. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

ताराचंद बड़जात्या के साथ अगली मुलाकात में शंकर जयकिशन ने उन्हें याद दिलाया कि आपका रिजेक्ट किया एक गाना सुपरहिट रहा था. इसलिए, हमारे कहने पर आप इसे फिल्म में रख लें. ताराचंद ने कुछ सोचकर उनकी बात मान ली. इस गाने को पूरा लिखा था हसरत जयपुरी ने. सुपर-डुपर हिट रहा यह गाना आज कहावतों में है. यह नायाब गाना है- ‘मैं कहीं कवि न बन जाऊं तेरे प्यार में ऐ कविता.’ (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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