लखनऊ. यूपी चुनाव 2027 से पहले गंभीर बयानों और तीखे पलटवारों के बीच कभी-कभी ऐसे मजेदार पल भी आ जाते हैं, जो सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक छा जाते हैं. ऐसा ही एक दिलचस्प नजारा समाजवादी पार्टी के दफ्तर में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देखने को मिला. मौका तो गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा का था, लेकिन जैसे ही फैजाबाद (अयोध्या) के सांसद अवधेश प्रसाद ने आंखों पर काला चश्मा चढ़ाए हुए एंट्री ली, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद को रोक नहीं पाए. उन्होंने भरी महफिल में अवधेश प्रसाद की चुटकी लेना शुरू कर दिया, जिसके बाद ठहाकों के बीच सीधे साल 2027 के ‘मिशन यूपी’ का रास्ता साफ होता दिखाई दिया.
‘काला चश्मा बहुत शुभ रहता है…’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जैसे ही मीडिया के कैमरों की फ्लैश चमकी, अखिलेश यादव की नजर अवधेश प्रसाद के काले चश्मे पर गई. अखिलेश ने बेहद मजाकिया लहजे में तंज कसते हुए कहा, “आइए आइए… आंख का ऑपरेशन कराया आपने? ओ हो ओ हो… एक चश्मा हमें भी मिला है ऐसा. वैसे बता दूं कि काला चश्मा बहुत शुभ रहता है.” अखिलेश यादव का यह अंदाज देखकर वहां मौजूद सभी पत्रकार और पार्टी कार्यकर्ता अपनी हंसी नहीं रोक पाए.
जब अयोध्या के सांसद ‘काला चश्मा’ लगाकर अखिलेश यादव की PC में पहुंचे.
• अखिलेश ने कहा- काला चश्मा शुभ होतो है.
• अयोध्या के सासंद- आपने जब लगाया था तो मुख्यमंत्री बन गए थे. pic.twitter.com/g4Q8T3sCFY
अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में काले चश्मे का एक अलग ही इतिहास और मिस्ट्री रही है. दरअसल, अखिलेश यादव खुद भी कई मौकों पर काला चश्मा पहने नजर आते हैं और इसे सपा के भीतर ‘जीत का सिंबल’ माना जाता रहा है.
सांसद अवधेश प्रसाद का तगड़ा पलटवार: ‘यही चश्मा 27 के लिए है’
सपा अध्यक्ष की इस गुदगुदाती चुटकी पर अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी फ्रंटफुट पर आकर जवाब दिया. उन्होंने मुस्कुराते हुए चश्मे को ठीक किया और कहा, “हां… बिल्कुल सही कह रहे हैं अध्यक्ष जी, वही है… यह चश्मा 27 के लिए है.” अवधेश प्रसाद ने इसके बाद एक और दिलचस्प बात याद दिलाते हुए कहा, “आपने भी जब यह काला चश्मा लगाया था, तो आप सूबे के मुख्यमंत्री बन गए थे. अब इस बार यह चश्मा उत्तर प्रदेश में फिर से बदलाव की नई इबारत लिखेगा.”
अवधेश प्रसाद का यह कहना था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल पूरी तरह से चुनावी मोड में तब्दील हो गया. नेताओं के इस दोस्ताना अंदाज और चटकारों के पीछे छिपे गहरे राजनीतिक मायने को समझने में मीडिया को भी देर नहीं लगी.
चश्मे के बहाने सीएम योगी और बीजेपी पर तीखा तंज
सपा नेताओं की इस ‘चश्मा डिप्लोमेसी’ के पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी सरकार पर बड़ा राजनीतिक हमला छिपा था. सीएम योगी आदित्यनाथ भी कभी-कबार काला चश्मा पहनते हैं. अखिलेश यादव अक्सर भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहते हैं कि “सरकार को अपना चश्मा बदलने की जरूरत है ताकि उन्हें सूबे में बढ़ती बेरोजगारी, पेपर लीक और किसानों की समस्याएं दिखाई दे सकें.”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में काले चश्मे के बहाने अखिलेश ने एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की कि जहां सत्ता पक्ष को जमीनी हकीकत दिखाई नहीं दे रही है, वहीं समाजवादी पार्टी का यह ‘शुभ चश्मा’ सीधे 2027 में सत्ता परिवर्तन की ओर देख रहा है. अयोध्या में मिली लोकसभा जीत के नायक रहे अवधेश प्रसाद के चेहरे पर यह चश्मा पहनाकर सपा यह दिखाना चाहती है कि उनका ‘अयोध्या मॉडल’ आगामी विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार साबित होने वाला है.











