बलिया: उत्तर प्रदेश से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे सुनकर और देखकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी. दिन के उजाले में एक सरकारी दफ्तर में तीन भूत खड़े थे. अधिकारियों और कर्मचारियों ने जब उन्हें देखा तो एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे कोई डरावनी कहानी सच हो गई हो. लेकिन जरा ठहरिए, ये भूत नहीं बल्कि बलिया जनपद के तीन बुजुर्ग नागरिक थे.
आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि इन्हें भूत किसने बनाया? कहानी यहीं से अजीबोगरीब हो जाती है. आपने बिल्कुल सही सुना, सरकारी कागजों में इन तीनों की मौत हो चुकी है, जबकि ये अपनी वृद्धावस्था पेंशन का हक मांगने खुद विभाग पहुंच गए थे. अब आगे की कहानी हम इन्हीं तीनों बुजुर्गों की जुबानी सुनेंगे कि आखिर कैसे जिंदा इंसान को कागजों में मुर्दा बना दिया गया और जब वे अपना हक मांगने पहुंचे तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई, पढ़िए पूरी घटना.
केस नंबर 01
बलिया के हल्दी थाना क्षेत्र के दुबहर ब्लॉक के दोपही अगरौली गांव निवासी 80 वर्षीय दिव्यांग बुजुर्ग भृगुनाथ चौबे ने बताया कि उन्होंने वर्तमान ग्राम प्रधान को वोट नहीं दिया था, जिसके कारण प्रधान उन्हें तिरछी नजर से देखता था. इस ग्राम प्रधान ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उन्हें जिंदा भूत बना दिया है. वे वृद्धापेंशन के लाभार्थी हैं, लेकिन उन्हें कागजों में मृत घोषित कर दिया गया और उनकी पेंशन 30 महीने से रुक गई है. इस उम्र में उन्हें तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस समय स्थिति इतनी खराब है कि उन्हें लग रहा है कि उनका हार्ट फेल हो जाएगा. अब उनके हाथ, पैर और आंखें भी जवाब दे रही हैं. बुढ़ापे का सहारा पेंशन भी प्रधान ने छीन लिया है.
केस नंबर 02
विष्णु दयाल दुबे ने बताया कि उनकी उम्र 82 साल हो गई है. फिलहाल हालात यह है कि चुनावी रंजिश के कारण उनके ग्राम प्रधान, सचिव और वीडीओ ने मिलकर उन्हें भी मृतक घोषित कर दिया है. जब उनकी वृद्धापेंशन बंद हो गई, तो वे जानकारी लेने के लिए समाज कल्याण विभाग बलिया गए, जहां से उन्हें एक पत्र मिला, जिसमें लिखा गया था कि प्रार्थी सत्यापन में मृत घोषित पाया गया है, इसी कारण पेंशन बंद कर दी गई है. उनका वहां मजाक भी उड़ाया गया कि अरे भागो यहां दिन में ही भूत आ गया है.
उन्होंने कहा कि हजार रुपया पेंशन भी बुढ़ापे में बहुत बड़ा सहारा होता है. लेकिन आज वह भी सहारा टूट चुका है. उन्होंने हर ऑफिस में जाकर यह साबित करने का प्रयास किया कि देखिए मैं जिंदा हूं. लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हुई, तो अंत में न्यायालय का सहारा लेना पड़ा है और अब प्रधान जी पर मुकदमा भी दर्ज हो गया है. उन्होंने अपने आपको जिंदा साबित करने के लिए जिला अस्पताल बलिया सदर में इलाज का पर्ची, बैंक का स्टेटमेंट और आधार कार्ड की फोटो कॉपी आदि दस्तावेज बलिया डीएम को भी दिए हैं, जिसमें उनके हस्ताक्षर भी हैं.
केस नंबर 03
रवि दुबे ने बताया कि इसी गांव के रहने वाले कविलाश यादव हैं. इनकी भी कहानी उक्त दोनों बुजुर्गों की तरह ही है. उनकी भी उम्र लगभग 80 से 85 साल है. वे बहुत गरीब परिवार के रहने वाले हैं. कही रोजी रोटी की तलाश में गए हुए हैं. हालांकि, इसमें एक तरह से प्रधान को भी शायद कुछ नहीं मिलेगा, केवल वोट न देने के कारण कागजों में बुजुर्गों को मृत्यु घोषित कर उनका पेंशन कटवाने का यह प्रधान ने काम किया है. एक तरह से यह बहुत घिनौना काम है जो प्रधान ने केवल अपने आक्रोश और गुस्से में किया है. इसको जिन पर शंका हो रहा है कि यह शख्स उसे वोट नहीं दिया है या नहीं देगा, उनको मृत घोषित करने में जुट गया था, जिसका अब भंटाधार हो गया है.










