अयोध्या: रामनगरी अयोध्या में विजयदशमी के अवसर पर 32 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा. इसको लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. राजेंद्र निवास की ऐतिहासिक रामलीला के अंतर्गत होने वाला रावण दहन आकर्षण का केंद्र रहेगा. विजयदशमी पर होने वाला यह आयोजन बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देगा. भगवान श्रीराम की नगरी में दशहरे के पर्व को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.
अयोध्या स्थित रामलीला महोत्सव समिति की देखरेख में आयोजित होने वाली यह रामलीला शहर की पुरानी रामलीलाओं में शामिल है. समिति के अनुसार, देश की आजादी से पहले से ही यहां रामलीला का आयोजन किया जा रहा है. हर साल इस आयोजन को और भव्य बनाने का प्रयास किया जाता है. इस साल भी 11 दिवसीय रामलीला का आयोजन किया गया. रामलीला के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और धर्म के महत्व को दर्शाया जा रहा है.
सत्य की ही होती है विजय
समिति से जुड़े राजू लोचन शरण महाराज ने बताया कि विजयदशमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला अवसर भी है. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मानवता को सत्य के मार्ग पर चलने, धर्म का पालन करने और हमेशा न्याय के पक्ष में खड़े रहने की सीख देता है. रावण दहन के माध्यम से हर वर्ष समाज को यही संदेश देने का प्रयास किया जाता है कि आखिर में सत्य की ही विजय होती है.
रावण दहन देखने के लिए लगी भीड़
राजू लोचन शरण महाराज के मुताबिक, इस वर्ष रावण का लगभग 30 से 32 फीट ऊंचा पुतला तैयार किया गया है. विजयदशमी की रात करीब 10 बजे इसका दहन किया जाएगा. पुतला तैयार करने के लिए कई कारीगरों को लगाया गया है और उन्हें निर्धारित पारिश्रमिक का भुगतान किया गया है. आयोजन को लेकर समिति की ओर से आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं. रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है.
सद्भाव और मानवता की शिक्षा
इस आयोजन की एक खास बात सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का संदेश भी है. राजू लोचन शरण महाराज ने बताया कि इस वर्ष रावण का पुतला तैयार करने में मुस्लिम समुदाय के कारीगरों ने भी योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी आपस में भाई-भाई हैं. हमारा धर्म आपसी सद्भाव और मानवता की शिक्षा देता है.सभी समुदायों के लोगों का मिलकर धार्मिक आयोजन में योगदान देना समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है.
उन्होंने कहा कि रावण का पुतला तैयार करने वाले मुस्लिम कारीगर भी हमारे भाई हैं. सभी लोग मिलकर रावण दहन के आयोजन में शामिल होंगे. यह दृश्य पूरे समाज को एकता का संदेश देगा और बताएगा कि त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं होते, बल्कि लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का माध्यम भी बनते हैं.
समाज में भाईचारा बनाए रखने की प्रेरणा
रामनगरी अयोध्या में विजयदशमी के अवसर पर होने वाला यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक समरसता की मिसाल भी पेश करेगा. एक ओर 32 फीट ऊंचे रावण के दहन के माध्यम से अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया जाएगा, तो दूसरी ओर विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता आपसी प्रेम और सद्भाव की भावना को सामने लाएगी. भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरित यह आयोजन लोगों को बुराइयों का त्याग करने, सत्य का साथ देने और समाज में भाईचारा बनाए रखने की प्रेरणा देगा.










