Last Updated:August 24, 2026, 23:40 IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की हिरासत में एक व्यक्ति की संदिग्ध मौत मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर एंटीमार्टम चोटें मिलने और परिवार द्वारा टॉर्चर के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद उठाया है. हाईकोर्ट ने साफ किया कि सीआरपीसी की धारा 176(1-A) के तहत हिरासत में हुई मौत पर मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य है. अदालत ने प्रतापगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) से 6 सप्ताह के भीतर जांच पूरी करें.
एसटीएफ हिरासत में मौत का मामला, हाईकोर्ट ने न्यायिक जांच के आदेश.
Allahabad High Court: उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की हिरासत में एक व्यक्ति की हुई संदिग्ध मौत के मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर गंभीर ‘एंटीमार्टम इंजरी’ (चोट के निशान) मिलने और परिजनों द्वारा पुलिस प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाने के बाद मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं.
यह पूरा मामला ज्हन्वी सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार याचिका से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की बेंच ने पाया कि पीड़ित व्यक्ति की मौत एसटीएफ की हिरासत के दौरान हुई थी. परिवार वालों का सीधा आरोप था कि हिरासत में एसटीएफ कर्मियों द्वारा अमानवीय तरीके से टॉर्चर किए जाने के कारण उसकी जान गई है. हालांकि, शुरुआत में प्रशासनिक स्तर पर लीपापोती करते हुए इसे सामान्य मौत या हार्ट अटैक बताने की कोशिश की गई थी. 16 अगस्त 2024 को सदर, प्रतापगढ़ के उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) ने अपनी रिपोर्ट में यह माना था कि मौत एसटीएफ कस्टडी में हुई, लेकिन यह तर्क दिया गया था कि मृतक दिल का मरीज था और उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले सारे राज
मामले की सुनवाई के दौरान जब हाईकोर्ट की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर पड़ी, तो उसमें मृतक के शरीर पर कई ‘एंटीमार्टम इंजरी’ दर्ज पाई गईं. कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि परिवार की ओर से गंभीर आरोप होने और शरीर पर चोट के निशान मिलने के बावजूद कानून सम्मत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.
अदालत ने गौर किया कि सीआरपीसी की धारा 176(1-A) के प्रावधानों के मुताबिक, यदि पुलिस या किसी अन्य हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो पुलिस जांच के अलावा न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा स्वतंत्र न्यायिक जांच कराया जाना अनिवार्य है. इससे पहले प्रतापगढ़ के सीजेएम की रिपोर्ट में यह सामने आया था कि परिवार द्वारा औपचारिक मांग न किए जाने का हवाला देकर यह अनिवार्य न्यायिक जांच नहीं कराई गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया.
6 सप्ताह में सौंपनी होगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम Manohar नारायण मिश्रा की बेंच ने प्रतापगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) को सीआरपीसी की धारा 176(1-A) के तहत तत्काल न्यायिक जांच शुरू करने का आदेश दें.
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Deep Raj DeepakSub-Editor
सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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Allahabad,Uttar Pradesh
First Published :
August 24, 2026, 23:40 IST










