Last Updated:August 25, 2026, 09:30 IST
वाराणसी : सन् 1957 में वाराणसी के राजघाट की खुदाई की गई थी, तब काफी कुछ मिला था. सभी चीजों को 22 बक्से में बंद करके ज्यों का त्यों रख दिया गया. अब जब बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी ने लंबे समय से बंद पड़े इन बक्सों को खोला तो अंदर का सामान देखकर इतिहास के जानकार भी हैरान रह गए. आखिर इन बक्सों में ऐसा क्या था ? पूरा मामला क्या है? आइए जानते हैं सबकुछ.
कहानी करीब 70 साल पुरानी है. साल 1957 में राजघाट में पुरातात्विक खुदाई शुरू हुई थी. खुदाई के दौरान बड़ी संख्या में पुरानी चीजें मिली थीं. खुदाई का काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) ने मिलकर किया था. यह खुदाई 1957 से 1969 तक चली. उस समय मिली चीजों को बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में रख दिया गया था. इन्हीं चीजों में से काफी सामग्री 22 बक्सों में बंद करके रख दी गई थी. समय के साथ ये बक्से काफी खराब हो गए. 20 अगस्त को करीब 70 साल बाद इन बक्सों को खोला गया.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग (AIHC) विभाग के प्रमुख प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार के मुताबिक, बक्सों में अलग-अलग तरह की पुरानी चीजें मिली हैं. 10000 से अधिक पुरावशेष, पुराने मिट्टी के बर्तन, प्राचीन सिक्के, मूर्तियां, औजार, मुहर और सील, तांबे की चीजें, हाथीदांत से बनी वस्तुएं, हड्डी से बनी वस्तुएं, कई दूसरे पुराने सामान.
इन चीजों में चित्रित काली मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं, जिन्हें करीब 3 हजार साल पुराना माना जा रहा है. इसके अलावा, इन बक्सों में मिली कुछ मुहरें खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं. इन पर ब्राह्मी लिपि में लिखे अक्षर मिले हैं. अब BHU के ऐसे विशेषज्ञ इन मुहरों की जांच करेंगे, जो पुरानी लिपियों और शिलालेखों को पढ़ने का काम करते हैं. जरूरत पड़ने पर देश की दूसरी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी. इन मुहरों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उस समय लोगों का व्यापार, प्रशासन और आर्थिक व्यवस्था कैसी थी. साथ ही उस दौर के लोगों और स्थानों से जुड़ी जानकारी भी सामने आ सकती है.
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इन बक्सों में सिर्फ पुरानी चीजें ही नहीं मिली हैं. यहां से करीब 3 हजार ग्लास स्लाइड और 5 हजार से ज्यादा फोटो निगेटिव भी मिले हैं. इन तस्वीरों में देश के कई ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों की तस्वीरें हैं. इनमें राजघाट, मंझी, रत्नागिरी, अजंता, एलोरा जैसे स्थान शामिल हैं. इन तस्वीरों की खास बात यह है कि ये कई दशक पुरानी हैं. उस समय इन ऐतिहासिक जगहों की हालत आज से काफी अलग थी. बाद में मौसम, प्रदूषण, विकास और संरक्षण के काम से इन जगहों में काफी बदलाव आया है. इसलिए ये पुरानी तस्वीरें इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए बहुत काम की साबित हो सकती हैं.
वहीं, भगवान विष्णु, शिव और बुद्ध की मूर्तियों की तस्वीरें भी मिली हैं. इन तस्वीरों को अब विशेषज्ञों द्वारा जांचा जा रहा हैय संरक्षण प्रक्रिया के तहत इन्हें सुरक्षित करने का काम किया जाएगा.
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी ने इस पूरे संग्रह पर काम करने के लिए तीन विशेष शोध टीम बनाई हैं. ये टीमें पुरानी चीजों की पहचान करेंगी, उनका रिकॉर्ड तैयार करेंगी और उन्हें सुरक्षित रखने का काम करेंगी. मुहरों और पुरानी लिपियों के लिए अलग विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी. वहीं फोटो और निगेटिव को भी सुरक्षित किया जाएगा. इतने लंबे समय तक रखे रहने की वजह से बक्सों की हालत खराब हो चुकी थी. ऐसे में इनके अंदर रखी चीजों को सुरक्षित निकालना भी बड़ी चुनौती थी. BHU के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि इन बक्सों में ऐसी चीजें हैं, जिनका इतिहास और विरासत के लिहाज से बहुत महत्व है. उन्होंने कहा कि जब इन चीजों की खुदाई हुई थी, उस समय पुरातत्व के क्षेत्र में आज जैसी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक उपलब्ध नहीं थी. इसके बावजूद उस समय के शोधकर्ताओं ने इन चीजों को संभालकर रखा, ताकि भविष्य में इन पर शोध किया जा सके.
राजघाट वाराणसी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में गंगा और वरुणा नदी के पास स्थित है। यह इलाका प्राचीन वाराणसी का हिस्सा माना जाता है। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, राजघाट से खुदाई के दौरान ऐसी मुहरें मिली थीं, जिन पर वाराणसी नाम से जुड़े प्रमाण मिले। इससे यह साबित करने में मदद मिली कि राजघाट का संबंध प्राचीन वाराणसी से था। सबसे पहली बार राजघाट में पुराने अवशेष 1939 में मिले थे. उस समय काशी रेलवे स्टेशन का विस्तार किया जा रहा था. इसी दौरान जमीन से कुछ पुरानी चीजें मिलीं. इन्हें जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI को भेजा गया. इसके बाद राजघाट को लेकर पुरातत्व विभाग की रुचि बढ़ी और आगे यहां खुदाई की गई. खुदाई 1957 से 1969 तक हुई. इस खुदाई में BHU और ASI दोनों शामिल थे. बीएचयू के प्रोफेसर ए.के. नारायण और पुरातत्वविद टी.एन. रॉय की देखरेख में खुदाई की गई थी. इस दौरान जमीन के अंदर से पुराने घरों जैसी संरचनाएं, मिट्टी की चीजें, मुहरें और कई दूसरे पुरावशेष मिले. इन खोजों से पता चला कि राजघाट में लोग कई सदियों से रह रहे थे.
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August 25, 2026, 09:30 IST









