सूर्यवंशी को टेस्ट के लिए करना होगा इंतजार, जानिए क्यों ‘स्कीम’ से हैं बाहर
Last Updated:September 05, 2026, 20:07 IST
Vaibhav Sooryavanshi not in india test scheme of things: राहुल द्रविड़ की ओर से वैभव सूर्यवंशी के टेस्ट भविष्य की सराहना करने के बावजूद, यह साफ हो गया है कि वह और तिलक वर्मा फिलहाल भारत की रेड-बॉल योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं. 10 फर्स्ट-क्लास मैचों के अनुभव वाले वैभव को नेशनल टीम में जगह बनाने के लिए घरेलू क्रिकेट में निरंतरता साबित करनी होगी. दलीप ट्रॉफी फाइनल उनके लिए बेहतरीन मंच है.
वैभव सूर्यवंशी को टेस्ट डेब्यू के लिए अभी इंतजार करना होगा.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट की नर्सरी में हर दौर में कुछ ऐसे सितारे चमकते हैं, जिनकी चमक देखकर पूरी दुनिया उनका भविष्य आंकने लगती है. वैभव सूर्यवंशी ने भी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से कुछ ऐसा ही समा बांधा है. जब हाल में पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ ने वैभव के संभावित टेस्ट क्रिकेट करियर और उनके उज्ज्वल भविष्य पर बात की, तो क्रिकेट गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई. द्रविड़ का मानना है कि आईपीएल जैसे मंच पर सफेद गेंद से अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ वैभव का भारत के घरेलू रेड बॉल क्रिकेट में खेलना और सीखना बेहद जरूरी है, ताकि वह भविष्य में तीनों फॉर्मेट में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें.
इस तारीफ और उम्मीदों के बीच एक सच्चाई यह भी सामने आई है कि वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) फिलहाल भारतीय टेस्ट टीम की योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं. पीटीआई की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस युवा सनसनी और हैदराबाद के ऑलराउंडर तिलक वर्मा (Tilak Varma) को अभी लाल गेंद की राष्ट्रीय योजनाओं में शामिल नहीं किया गया है. लेकिन क्रिकेट के जानकारों के लिए यह कोई हैरान करने वाली बात नहीं है. प्रतिभा के मामले में वैभव भले ही असाधारण हों, लेकिन टेस्ट क्रिकेट के लंबे और कठिन प्रारूप के अनुभव के मामले में वह अभी शुरुआत ही कर रहे हैं.
वैभव सूर्यवंशी को टेस्ट डेब्यू के लिए अभी इंतजार करना होगा.
अनुभव और आंकड़ों की चुनौती
वैभव के अब तक के करियर आंकड़ों पर नजर डालें, तो उन्होंने महज 10 फर्स्ट-क्लास मुकाबले खेले हैं और इसके साथ ही अंडर-19 स्तर पर कुछ रेड-बॉल मैचों का अनुभव हासिल किया है. इतने छोटे करियर में उन्होंने अपनी आक्रामक शैली की झलक जरूर दिखाई है. हाल ही में सेंट्रल जोन के खिलाफ ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए उन्होंने 92 और 40 रनों की शानदार पारियां खेलीं. दुलीप ट्रॉफी के इस मुकाबले में उनकी बल्लेबाजी ने उनके हुनर और मिजाज का लोहा तो मनवाया, लेकिन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरों में जगह बनाने के लिए केवल एक या दो अच्छी पारियां काफी नहीं होतीं. चयनकर्ता और टीम प्रबंधन चाहते हैं कि वैभव घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाएं और अपनी निरंतरता साबित करें.
दलीप ट्रॉफी फाइनल में बड़ा मौका
वैभव के पास अपनी इस निरंतरता को साबित करने का पहला बड़ा मौका दुलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला है, जहां वह साउथ जोन के खिलाफ मैदान में उतरेंगे. यह एक ऐसा मंच है जहां बड़ा स्कोर बनाकर वह चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच सकते हैं.
राहुल द्रविड़ का मार्गदर्शन और संतुलन
राहुल द्रविड़ ने वैभव जैसे युवा खिलाड़ियों के विकास को लेकर एक बहुत ही सटीक बात कही थी. द्रविड़ का मानना है कि युवाओं के लिए करियर में सही संतुलन पाना बेहद जरूरी है. एक तरफ जहां आईपीएल जैसी टी20 लीग्स से वैभव को दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय घरेलू ढांचे में रेड-बॉल क्रिकेट खेलना उनकी तकनीक और मानसिक मजबूती को निखारने का काम कर रहा है. टेस्ट क्रिकेट को जीवंत बनाए रखने के लिए वैभव जैसे बहुमुखी प्रतिभा वाले युवाओं का तीनों प्रारूपों में मजबूत होना बेहद जरूरी है.
बल्लेबाजी क्रम में बदलाव की संभावना
जैसे-जैसे वैभव का खेल निखरेगा, मैदान पर उनका सही बल्लेबाजी क्रम भी स्पष्ट होता जाएगा. फिलहाल वह एक सलामी बल्लेबाज के रूप में खेलते हैं, लेकिन उनके खेल में मौजूद आक्रामकता को देखते हुए कई जानकारों का मानना है कि भविष्य में उन्हें मध्यक्रम में भी आजमाया जा सकता है, जहां वह मैच का रुख बदल सकते हैं.
भविष्य का रोडमैप और टीम इंडिया का समीकरण
यदि वह आगे भी ओपनर के रूप में ही अपनी पहचान बनाए रखते हैं, तो भारतीय टीम के भविष्य के समीकरण बहुत दिलचस्प हो सकते हैं. इस समय टीम इंडिया के अनुभवी बल्लेबाज केएल राहुल अपने करियर के उस मोड़ पर हैं जहां वह 34 वर्ष के हो चुके हैं. ऐसे में आने वाले कुछ सालों में भारतीय टेस्ट टीम को शीर्ष क्रम में एक नए और ऊर्जावान सलामी बल्लेबाज की जरूरत होगी. यदि वैभव अपनी फॉर्म और फिटनेस बनाए रखते हैं, तो वह भविष्य में यशस्वी जायसवाल के साथ मिलकर भारतीय टेस्ट क्रिकेट की नई सलामी जोड़ी का निर्माण कर सकते हैं. यह एक ऐसी आक्रामक जोड़ी होगी जो दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने का माद्दा रखेगी.
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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर
कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
September 05, 2026, 20:07 IST









