झांसी : माफिया अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान की झांसी-कानपुर हाईवे पर इस महीने की शुरुआत में एक कार हादसे में जान चली गई थी. जब हादसा हुआ तो किसी को नहीं पता था कि सड़क पर कराह रहे ये लोग किसी बड़े माफिया शख्स से जुड़े हुए हैं. बाद में जब पता चला तो हड़कंप मच गया. शुरुआत में काफी अलग-अलग पहलू हादसे को लेकर सामने आए. तकनीकी जांच के लिए एक कमेठी बनाई गई. अब इस जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है. इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.
यह है मामला
हादसा 6 अगस्त यानी गुरुवार सुबह करीब साढ़े दस बजे हुआ था. क्रेटा कार में कुल पांच लोग सवार थे. तेज रफ्तार के कारण कार का चालक नियंत्रण खो बैठा और वाहन डिवाइडर से जा टकराया. हादसे में जहद, उमर और अहजाम घायल हो गए. सभी घायलों को मेडिकल कॉलेज झांसी में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत सामान्य बताई गई. वहीं, अबान और सोनू की मौत हो गई. पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराकर शव घरवालों को सौंप दिया था. जेल में बंद बड़े भाइयों को जनाजे में शामिल होने की अनुमति मिलने में समय लग गया, इसलिए अबान की मौत के दो दिन बाद उसे सुपुर्द ए खाक किया गया.
हादसा कैसे हुआ?
हादसे के बाद तकनीकी जांच के लिए परिवहन विभाग के आरआई राघव कुमार एवं एमटी (तकनीकी) प्रभारी शिव कुमार की अगुवाई में टीम बनाई गई है. टीम ने कार के ब्रेकिंग सिस्टम, स्टीयरिंग, सस्पेंशन, पहिये, व्हील अलाइनमेंट, वाहन की बॉडी का क्रश पैटर्न, पैसेंजर कंपार्टमेंट, एयरबैग और सीट-बेल्ट सिस्टम की जांच की. इतना ही नहीं हादसे से पहले कार में कोई यांत्रिक खराबी तो नहीं थी इस बात की भी जांच की गई. रिपोर्ट में हादसे की तो पुष्टि होती है लेकिन, इसके पीछे की वजह साफ नहीं हो सकी. हालांकि दुर्घटना के हालत को देखते हुए चालक को झपकी आने की संभावना जताई जा रही है. जांच रिपोर्ट लखनऊ आला पुलिस अफसरों को भी भेजी गई है.
इतनी तेज थी स्पीड
अबान की कार में बायां फ्रंट हिस्सा कंक्रीट की कठोर दीवार से टकराने के बाद पीछे की सीट तक धंस गया था. इससे पता चल रहा था कि जिस समय हादसा हुआ उस समय उसकी रफ्तार 130 किलोमीटर के करीब थी. क्षेत्राधिकारी (मोंठ) सुनील शर्मा ने बताया कि कार की स्पीड की वजह से कार सीधे कंक्रीट की मजबूत सुरक्षा दीवार से जा टकराई. टक्कर की वजह से स्टीयरिंग से पहियों को नियंत्रित करने वाला टाई-रॉड क्षतिग्रस्त हो गया. एयरबैग भी अबान की जान नहीं बचा सका.
उन्होंने कहा कि सुरक्षा दीवार से टक्कर के बाद कार का बायां हिस्सा पूरी तरह पीछे की ओर धंस गया था. इसे तकनीकी भाषा में फ्रंटल डिफॉर्मेशन क्रश कहते हैं. हादसे में अगली सीट पर बैठे यात्री के लिए यह सबसे जानलेवा होता है. कार लगभग 36.1 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से दौड़ रही थी. ऐसे में चालक के पास सामने आई बाधा से बचने के लिए एक सेकंड का ही मौका था, उस दौरान भी कार करीब 36 मीटर आगे बढ़ गई. इस वजह से कंक्रीट की सुरक्षा दीवार से भिड़ते ही कार का फ्रंट क्रश जोन पीछे के पैसेंजर हिस्से तक जा पहुंचा था.
हादसे में कार टक्कर के बाद करीब 10 फीट की ऊंचाई तक उछली और फिर दाएं टायर के बल नीचे आकर गिरी. ऐसी स्थिति में दायां पहिया और सस्पेंशन सामान्य सड़क संपर्क की तुलना में अचानक बहुत अधिक वर्टिकल इम्पैक्ट लोड झेलते हैं. जमीन से टकराते समय वाहन का पूरा भार उस हिस्से में आया, इसे तकनीकी रूप से इम्पैक्ट लोडिंग बताया जाता है. हादसे के बाद इसी वजह से बाएं हिस्से के टकराने के बावजूद कार के दाएं हिस्से के टायर समेत सस्पेंशन क्षतिग्रस्त हो गया था.










